
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के सामने आने के साथ ही राज्य की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। इस चुनाव में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने ऐतिहासिक जीत हासिल कर बहुमत से ज़्यादा सीटें पाई हैं। जहाँ एक ओर जनता दल (यूनाइटेड) ने स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार ही फिर से बिहार के मुख्यमंत्री होंगे, वहीं बीजेपी ने कहा है कि अंतिम निर्णय एनडीए के विधायक दल की बैठक में विधायकों द्वारा सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: ताजा समीकरण
एनडीए ने 202 की सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं जनता दल (यू) यानी JDU ने 85 सीटें हासिल की हैं। बाकि सहयोगी दलों—चिराग पासवान की लोजपा रामविलास, जीतनराम मांझी की हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने भी गठबंधन को मजबूती दी है। विपक्षी महागठबंधन महज़ 35 सीटों पर सिमटकर रह गया।
मुख्यमंत्री पद पर सियासी रस्साकशी
हालांकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत एनडीए ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया था। जेडीयू के दावे के अनुसार, सीएम के लिए कोई वैकेंसी नहीं है—नीतीश ही रहेंगे मुख्यमंत्री। जेडीयू पदाधिकारियों व प्रमुख नेताओं जैसे विजय चौधरी, श्याम रजक और ललन सिंह ने खुलकर घोषणा की कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे।वहीं, बीजेपी थोड़ा सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहती रही है कि विधायक दल की बैठक के बाद नेता चुना जाएगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और गया के मंत्री प्रेम कुमार के मुताबिक, एनडीए के पांचों दल मिलकर मुख्यमंत्री चुनेंगे।
NDA के मंत्रिमंडलीय गणित
खबरों के अनुसार, बिहार में एनडीए गठबंधन की नई सरकार के कैबिनेट गठन का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को 14-16 मंत्री मिल सकते हैं, जबकि जेडीयू को 13-14 मंत्री और अन्य सहयोगी दलों को भी भागीदारी दी जा सकती है।
समीकरण बदलेंगे या भरोसा बरकरार रखेंगे?
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि महाराष्ट्र जैसी स्थिति बिहार में पैदा हो सकती है, जिसमें सीट अधिक होने की वजह से बीजेपी अपने सीएम पद का दावा ठोक सकती है। हालांकि पुख्ता सूत्रों के अनुसार, अगर खुद नीतीश कुमार ऐसी इच्छा व्यक्त करते हैं तभी इस समीकरण में बदलाव संभव है, वरना जेडीयू किसी और को रिस्क लेकर सीएम बनाना नहीं चाहेगी।
जनता और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
बीजेपी के कई नेताओं के समर्थकों ने ज़रूर अपने नेता को सीएम बनाए जाने की मांग उठाई है, लेकिन मुकम्मल निर्णय सामूहिक सहमति पर ही टिका रहेगा। जेडीयू के सभी वरिष्ठ नेताओं और लगभग सभी एनडीए सहयोगी दलों—चिराग पासवान, संतोष मांझी और उपेंद्र कुशवाहा—ने साफ समर्थन दिया है कि “नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनने चाहिए”।
अगले मुख्यमंत्री का ऐलान कब?
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 से 22 नवंबर के बीच एनडीए विधायक दल की बैठक में नेता चुना जाएगा और नई सरकार का शपथग्रहण समारोह होगा। जेडीयू और बीजेपी अपने-अपने विधायक दल का नेता घोषित करेंगे, जिसके बाद एनडीए पूरी तरह से मिलकर अपने सर्वसम्मति से सर्वस्वीकार्य नेता का नाम आगे बढ़ाएगा। तमाम संकेत फिलहाल नीतीश कुमार के ही मुख्यमंत्री बनने को लेकर हैं।
‘सुशासन बाबू’ की छवि
पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार ने बिहार में कानून व्यवस्था, सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण में जितना सुधार किया है, उसी वजह से वे ‘सुशासन बाबू’ के नाम से विख्यात हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव और गठबंधन राजनीति में लचीला रुख बिहार की स्थिरता की गारंटी रहे हैं।
नीतीश कुमार की राजनीति—बदलते समीकरणों के उस्ताद
नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का सबसे अनुभवी और चतुर रणनीतिकार माना जाता है।
वह कई अवसरों पर गठबंधन बदल चुके हैं।
स्थिति के अनुसार राजनीतिक निर्णय लेने में माहिर हैं।
NDA और महागठबंधन दोनों के साथ सरकार चला चुके हैं।
इस वजह से कई विशेषज्ञ मानते हैं कि नीतीश कुमार को हल्के में लेना BJP जैसी बड़ी पार्टी भी नहीं चाहेगी।
इस बयानबाज़ी का असली मतलब क्या है?
JDU और BJP के अलग-अलग बयान यह दिखाते हैं कि गठबंधन में सबकुछ उतना सरल नहीं जितना दिखाया जा रहा है।
यह भी संभव है कि—
•दोनों दल अपने-अपने समर्थकों को संदेश दे रहे हों,
•भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के लिए दबाव बना रहे हों,
•मुख्यमंत्री पद पर एक-दूसरे की स्थिति को परख रहे हों।
राजनीति में बयानबाज़ी का अपना महत्व होता है और बिहार में तो यह कई बार बड़े बदलाव का संकेत भी देती रही है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद जेडीयू स्पष्ट रूप से कह रही है कि नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे।बीजेपी “विधायकों का निर्णय” कहकर सामूहिक सहमति की बात कर रही है, लेकिन भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और अधिकांश सहयोगी दलों का समर्थन फिलहाल नीतीश कुमार को ही मिलता नजर आ रहा है।नए मुख्यमंत्री की घोषणा, विधायकों की बैठक के तुरंत बाद की जाएगी, लेकिन तमाम सियासी इशारे अभी भी नीतीश कुमार के पक्ष में ही जा रहे हैं।
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