
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 25 बीपीएस (Basic Point) की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला मुंबई में 3-5 दिसंबर को चली तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की। कम रेपो रेट से होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की ईएमआई में कमी आएगी, जिससे आम आदमी की जेब ढीली होगी और आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
क्या है Repo Rate?
Repo rate वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई व्यावसायिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। इसकी कटौती से बैंकों का उधार सस्ता होता है, जो आगे ग्राहकों तक पहुंचता है। 2025 में यह चौथा रेट कट है, पहले फरवरी, अप्रैल और जून में कुल 100 बीपीएस की कमी हुई थी। अगस्त और अक्टूबर में रेट स्थिर रखा गया था। अब कुल 125 बीपीएस की कटौती से अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ेगी।
Repo rate कट के पीछे प्रमुख कारण
आरबीआई ने यह कदम रिकॉर्ड कम महंगाई और मजबूत जीडीपी ग्रोथ के बीच उठाया। अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) 0.3 प्रतिशत तक गिर गई, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से काफी नीचे है। गवर्नर मल्होत्रा ने इसे ‘गोल्डीलॉक्स’ स्थिति बताया, जहां विकास तेज है लेकिन महंगाई नियंत्रित।
दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में जीडीपी ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही, जो छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। ग्रामीण मांग मजबूत और शहरी मांग रिकवर कर रही है। वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे अमेरिकी टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था लचीली दिखी।
रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के नीचे गिर गया था, जो आयातित महंगाई बढ़ा सकता था, लेकिन कम ब्रेंट क्रूड कीमतें और अच्छे जलाशय स्तर ने इसे संभाला। MPC ने एकमत से यह फैसला लिया, साथ ही 1 लाख करोड़ का ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) और डॉलर-रुपया स्वैप की घोषणा की।
अर्थव्यवस्था पर Repo rate कट का व्यापक प्रभाव
रेपो रेट घटने से बैंक लोन रेट कम करेंगे, खासकर रेपो-लिंक्ड लोन पर। होम लोन, ऑटो लोन और छोटे व्यवसाय ऋण सस्ते होंगे, जिससे निवेश और खपत बढ़ेगी। ईएमआई में 5-10 प्रतिशत की कमी संभव है, जो मध्यम वर्ग के लिए राहत है।
जीडीपी फोरकास्ट को 6.8 से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत और चौथी में 6.5 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान है। महंगाई अनुमान 2.6 से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया। यह कदम निजी निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
स्टॉक मार्केट में उत्साह है, बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर चमकेंगे। लेकिन जमा दरें भी घट सकती हैं, जो सीनियर सिटिजन और निवेशकों के लिए चुनौती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आगे फरवरी 2026 तक रेट स्थिर रह सकते हैं।
विभिन्न सेक्टरों पर असर
•रियल एस्टेट: सस्ते होम लोन से डिमांड बढ़ेगी, प्रॉपर्टी बिक्री में उछाल।•ऑटो सेक्टर: कार और टू-व्हीलर लोन सस्ते, त्योहारों के बाद बिक्री रिकवर।
•MSME: छोटे कारोबारों को सस्ता क्रेडिट, रोजगार सृजन।
•शेयर बाजार: लिक्विडिटी बढ़ने से सेंसेक्स-निफ्टी ऊंचाई पर।
उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यदि आपका लोन रेपो से जुड़ा है, तो ईएमआई रीसेट पर कम हो जाएगी। बैंक एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) भी घटाएंगे, लेकिन ट्रांसमिशन धीमा हो सकता है। पुराने लोन वाले ग्राहक बैंक से संपर्क करें।
निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट रेट घटने का इंतजार करें। लैडरिंग स्ट्रैटेजी अपनाएं या म्यूचुअल फंड में शिफ्ट करें। इक्विटी और डेब्ट फंड आकर्षक होंगे। गोल्ड और रियल एसेट में भी रुचि बढ़ेगी।
सरकार के जीएसटी रेट कट और निवेश से समर्थन मिला है। आरबीआई का न्यूट्रल स्टांस आगे अनिश्चितताओं पर नजर रखेगा।
EMI पर क्या पड़ेगा असर?
Repo Rate कटने का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देगा।उदाहरण के लिए,यदि आपने 30 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए 9% ब्याज दर पर लिया है तो आपकी मासिक EMI लगभग
👉 26,995 रुपये आती है।
अगर बैंक ब्याज दर घटाकर 8.75% कर देता है, तो EMI
👉 घटकर 26,070 रुपये हो जाएगी।
यानी हर महीने लगभग 925 रुपये की बचत।
20 साल में यह बचत 2 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है।
किन-किन लोन पर राहत?
Repo Rate में कटौती का असर इन सभी लोन पर पड़ेगा:
✅ Home Loan
✅ Car Loan
✅ Personal Loan
✅ Education Loan
✅ Business Loan
✅ MSME Loan
क्या सभी को EMI में तुरंत राहत मिलेगी?
नहीं, सभी को तुरंत फायदा नहीं मिलेगा।जिनका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, उनकी EMI जल्द घटेगी।जिनका लोन फिक्स्ड रेट पर है, उन्हें नए समझौते या री-फाइनेंस के बाद ही राहत मिलेगी।
महंगाई और Repo Rate का रिश्ता
पिछले कुछ महीनों से देश में महंगाई दर में नरमी देखी जा रही है:सब्ज़ियों के दाम नियंत्रण में,कच्चे तेल की कीमत स्थिर,खाद्यान्न आपूर्ति बेहतर।इस वजह से RBI को ब्याज दर घटाने की गुंजाइश मिली।
महंगाई नियंत्रण में रहने से आगे भी Repo Rate में और कटौती की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
2025 में रेपो रेट का सफर: इतिहास और भविष्य
2025 में आरबीआई ने महंगाई नियंत्रण के साथ ग्रोथ पर फोकस किया। फरवरी में 25 बीपीएस, अप्रैल में 25 बीपीएस, जून में 50 बीपीएस कट के बाद दिसंबर में 25 बीपीएस। कुल 125 बीपीएस कमी से अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिला।
भविष्य में 2026 की पहली तिमाही में ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान। वैश्विक जोखिमों जैसे यूएस टैरिफ से सतर्कता बरतनी होगी। एक्सपर्ट्स जैसे क्रिसिल और आईसीआरए का मानना है कि रेट कट का सिलसिला रुकेगा।
यह फैसला भारत को 7-8 प्रतिशत ग्रोथ ट्रैक पर लाएगा। उभरती अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत।
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