
बॉलीवुड के ‘खलनायक’ और अपनी दरियादिली के लिए मशहूर अभिनेता संजय दत्त (Sanjay Dutt) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि उनके अपने ही घर में छिड़ा गृहयुद्ध है। दत्त परिवार, जिसे सुनील दत्त और नर्गिस के संस्कारों के लिए जाना जाता है, आज संपत्ति विवाद (Property Dispute) के चलते बिखरने की कगार पर खड़ा है।
ताज़ा मिली जानकारी के मुताबिक, संजय दत्त की बहनों और उनकी पत्नी मान्यता दत्त (Manyata Dutt) के बीच का शीतयुद्ध अब खुलकर सामने आ गया है। बहनों ने मान्यता पर न केवल संपत्ति को अपने नाम करने का, बल्कि भाई संजय दत्त को परिवार से पूरी तरह काट देने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
खबरों के मुताबिक, विवाद की जड़ मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल (Pali Hill) स्थित दत्त परिवार की पैतृक संपत्ति और संजय दत्त का प्रोडक्शन हाउस है। सूत्रों का कहना है कि संजय दत्त की बहन (प्रिया दत्त/नम्रता दत्त) ने आरोप लगाया है कि मान्यता दत्त पिछले कुछ वर्षों से धीरे-धीरे परिवार की संपत्तियों का ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ (Power of Attorney) अपने नाम करवा रही हैं।
20 नवंबर को सामने आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संजय दत्त की बहन ने एक पारिवारिक बैठक के दौरान मान्यता दत्त पर तीखे हमले किए। उनका कहना है कि, “संजय भाई की बीमारी (कैंसर सर्वाइवर) और उनकी भावनाओं का फायदा उठाकर संपत्तियों का मालिकाना हक बदला जा रहा है।”
मान्यता दत्त पर लगे 5 बड़े आरोप
इस विवाद में जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। परिवार के करीबी सूत्रों ने मीडिया को बताया कि विवाद के मुख्य बिंदु ये हैं:
1.आर्थिक घेराबंदी: आरोप है कि संजय दत्त के बैंक खातों और प्रोडक्शन हाउस (Sanjay Dutt Productions) के पूरे फाइनेंस का कंट्रोल मान्यता ने अपने हाथ में ले लिया है, जिससे बहनों और अन्य रिश्तेदारों की दखलंदाजी खत्म हो गई है।
2.पैतृक संपत्ति का रिनोवेशन: पाली हिल वाले घर के रिनोवेशन के नाम पर पुराने दस्तावेजों में बदलाव करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
3.परिवार से दूरी: बहनों का कहना है कि मान्यता ने जानबूझकर संजय को उनके पुराने दोस्तों और परिवार के सदस्यों से दूर कर दिया है ताकि कोई उन्हें सलाह न दे सके।
4.पुरानी पहचान का मुद्दा: रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि विवाद के दौरान मान्यता की पुरानी पहचान (प्रिया सचदेव/दिलनवाज शेख) और अतीत को लेकर भी तंज कसे गए, जिससे मामला और बिगड़ गया।
5.बच्चों का भविष्य: दत्त परिवार की तीसरी पीढ़ी के भविष्य और ट्रस्ट फंड को लेकर भी असहमति जताई गई है।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है?
यह पहली बार नहीं है जब दत्त परिवार में मान्यता को लेकर कलह हुई हो। आपको याद दिला दें कि जब 2008 में संजय दत्त ने मान्यता से शादी की थी, तब भी उनकी बहनें प्रिया और नम्रता इस शादी से खुश नहीं थीं। उस समय भी मीडिया में काफी बयानबाजी हुई थी।
हालांकि, समय के साथ चीजें सामान्य हो गई थीं और अक्सर त्योहारों पर पूरा परिवार एक साथ दिखता था। लेकिन 2025 के अंत में आए इस भूचाल ने साबित कर दिया है कि वह शांति महज एक दिखावा थी। अंदर ही अंदर जो लावा धधक रहा था, वह अब ज्वालामुखी बनकर फट चुका है।
संजय दत्त की खामोशी और धर्मसंकट
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा पिस रहे हैं खुद ‘संजू बाबा’। एक तरफ उनकी पत्नी और बच्चे (इकरा और शहरान) हैं, तो दूसरी तरफ उनकी बहनें, जिन्होंने हर मुश्किल वक्त में—चाहे वह टाडा का केस हो या जेल की सजा—उनका साये की तरह साथ दिया है।
संजय दत्त ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान (Official Statement) जारी नहीं किया है। उनके करीबी दोस्त बताते हैं कि बाबा इस विवाद से बेहद दुखी हैं और इसे घर की चारदीवारी के भीतर ही सुलझाना चाहते थे, लेकिन अब बात मीडिया तक पहुंच चुकी है।
कानूनी पेंच और भविष्य
लीगल एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर यह मामला कोर्ट तक पहुंचता है, तो यह एक लंबी लड़ाई साबित हो सकती है।
•हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम: चूंकि यह पैतृक संपत्ति का मामला हो सकता है, इसलिए बहनों का भी इसमें हिस्सा बनता है।
•वसीयत (Will): अगर सुनील दत्त या नर्गिस दत्त ने कोई वसीयत छोड़ी है, तो फैसला उसी आधार पर होगा।
•मान्यता का पक्ष: कानूनी तौर पर मान्यता, संजय दत्त की कानूनी पत्नी हैं, इसलिए पति की अर्जित संपत्ति पर उनका और उनके बच्चों का पहला हक बनता है।
बॉलीवुड का रिएक्शन
बॉलीवुड के गलियारों में इस खबर से सन्नाटा पसरा है। कोई भी खुलकर इस पर बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि, दबी जुबान में लोग इसे ‘दत्त साम्राज्य’ के पतन की शुरुआत बता रहे हैं। एक वरिष्ठ फिल्म निर्माता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “संजय बहुत भावुक इंसान हैं, और अक्सर भावुक लोग ही अपनों की राजनीति का शिकार हो जाते हैं।”
निष्कर्ष
संजय दत्त की जिंदगी हमेशा एक खुली किताब रही है। ड्रग्स, हथियार, जेल, कैंसर—उन्होंने हर जंग जीती है। लेकिन क्या वह अपने ही घर में छिड़ी इस ‘महाभारत’ को जीत पाएंगे? क्या भाई-बहन का पवित्र रिश्ता दौलत की दीवार के आगे घुटने टेक देगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल दत्त परिवार के आंगन में खुशियों की जगह वकीलों और दस्तावेजों ने ले ली है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सूत्रों और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल अपने पाठकों को अद्यतन (Update) रखना है। हम इस खबर में किए गए किसी भी दावे की सत्यता या पुष्टि नहीं करते हैं और न ही हम किसी व्यक्ति विशेष या पक्ष का समर्थन करते हैं। यह सामग्री केवल सूचनात्मक और मनोरंजन के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। किसी भी कानूनी कार्रवाई या निष्कर्ष के लिए आधिकारिक बयानों की प्रतीक्षा करें।
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