मारे गए चारों अपराधियों की पहचान हो गई है। ये सभी बिहार के सीतामढ़ी जिले से जुड़े कुख्यात ‘रंजन पाठक-मनीष पाठक गैंग’ के सदस्य थे, जिसे स्थानीय तौर पर ‘सिग्मा गैंग’ के नाम से भी जाना जाता है।
पुलिस के मुताबिक, ये अपराधी बिहार में कई जघन्य अपराधों के लिए जिम्मेदार थे, जिनमें ‘ब्रह्मर्षि सेना’ जिला प्रमुख गणेश शर्मा, मदन शर्मा और आदित्य सिंह की हत्याएं शामिल हैं। ये सभी सीतामढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में आतंक का पर्याय बने हुए थे।
चुनाव में अशांति फैलाने की गहरी साजिश
इस encounter को राजनीतिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पुलिस के पास पुख्ता खुफिया जानकारी थी कि यह गैंग दिल्ली में छिपकर बिहार चुनाव के दौरान बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहा था। बिहार में चुनावी माहौल को बिगाड़ने, बूथ कैप्चरिंग में सहायता करने, या फिर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को धमकाने और निशाना बनाने की इनकी योजना थी।
बिहार पुलिस के सूत्रों के अनुसार, गैंग के सदस्यों के बीच कुछ ऑडियो कॉल इंटरसेप्ट हुए थे, जिनसे पता चला कि वे बिहार में चुनाव से पहले बड़े हथियारों की खेप जुटा रहे थे और दहशत फैलाने की फिराक में थे। दिल्ली में छिपना उनकी रणनीति का हिस्सा था, ताकि वे बिहार पुलिस की निगरानी से बच सकें और सही समय पर राज्य में घुसपैठ कर सकें। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस के बीच सटीक समन्वय ने इस खतरनाक मंसूबे को समय रहते विफल कर दिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हमें विशिष्ट इनपुट मिला था कि ये चारों अपराधी दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक सुनसान जगह पर इकट्ठा हो रहे हैं। इन्हें घेरने के लिए जाल बिछाया गया। जब इन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, तो इन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। यह एक आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई थी, जिसके परिणामस्वरूप चारों अपराधी मौके पर ही ढेर हो गए।”
Encounter स्थल से हथियार बरामद
Encounter स्थल से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद किए हैं। इनमें सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल और अन्य घातक हथियार शामिल हैं। इन हथियारों की बरामदगी से यह पुष्टि होती है कि ये अपराधी किसी बड़ी और हिंसक घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। फॉरेंसिक और क्राइम सीन एग्जामिनेशन टीमें तुरंत मौके पर बुलाई गईं, जिन्होंने आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं।
मारे गए अपराधियों के शवों को रोहिणी स्थित डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और आगे की जांच के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट पेश की जाएगी।
बिहार पुलिस के लिए बड़ी राहत
बिहार विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही, राज्य पुलिस के लिए अपराध और अपराधियों पर नियंत्रण रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। सीतामढ़ी जैसे सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों में इस गैंग का खात्मा, बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है।
बिहार के डीजीपी (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह संयुक्त ऑपरेशन चुनाव के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने की पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डीजीपी ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की त्वरित और सटीक कार्रवाई की सराहना की है और कहा है कि राज्य पुलिस हर हाल में यह सुनिश्चित करेगी कि अपराधी तत्त्व चुनाव प्रक्रिया को बाधित न कर सकें।
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
बिहार चुनाव के बीच इस बड़े encounter की खबर ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एनडीए नेताओं ने इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था की जीत बताया है और कहा है कि अपराधियों के लिए बिहार या देश में कहीं भी कोई जगह नहीं है। वहीं, महागठबंधन की ओर से इस घटना पर आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है, लेकिन उनकी मुख्य चिंता भी चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में हुई इस पुलिस encounter ने एक तरफ जहां एक खूंखार गैंग का सफाया कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी राहत दी है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की आपराधिक साजिश या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।