रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का दो दिवसीय भारत दौरा जोर-शोर से जारी है, जो 4 और 5 दिसंबर को आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता आज होगी, जिसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और परमाणु सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है। पीएम मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में अनुवादित भगवद्गीता की प्रति भेंट की, जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों की मिसाल बन गई।
यह दौरा रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है, जो चार साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। वैश्विक तनाव के बीच भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने का यह सुनहरा मौका है। पुतिन गुरुवार शाम पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने खुद उनका स्वागत किया।
पुतिन का दौरा बेहद व्यस्त और सुनियोजित है, जिसमें सांस्कृतिक, राजनयिक और व्यावसायिक कार्यक्रम शामिल हैं। पहले दिन 4 दिसंबर को शाम करीब 6:35 बजे दिल्ली पहुंचने के बाद पीएम मोदी के साथ निजी डिनर और द्विपक्षीय चर्चा हुई।
•11:50 बजे हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक।
•दोपहर 1:50 बजे संयुक्त प्रेस स्टेटमेंट।
•भारत-रूस बिजनेस फोरम में हिस्सा।
•शाम को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में भोज।
•रात 9 बजे मॉस्को रवानगी।
इस शेड्यूल में रूसी आरटी इंडिया चैनल का उद्घाटन भी शामिल है, जो मीडिया सहयोग को बढ़ावा देगा। पुतिन के साथ रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव, स्बेरबैंक प्रमुख और रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के अधिकारी जैसे बड़े प्रतिनिधिमंडल हैं।
मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक: अपेक्षित समझौते और डील्स
आज की मुख्य द्विपक्षीय बैठक में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन पर फोकस रहेगा, जो दोनों देशों के बीच 25 वर्षों की रणनीतिक साझेदारी का जश्न मनाएगा। रक्षा क्षेत्र में S-400 मिसाइल सिस्टम, लड़ाकू विमान और मिसाइल तकनीक पर नए सौदे की उम्मीद है। ऊर्जा क्षेत्र में रूसी तेल आपूर्ति बढ़ाने और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग होगा।
व्यापार को बाहरी दबावों से बचाने, कृषि, शिपिंग, मुक्त व्यापार समझौते और नागरिक परमाणु ऊर्जा पर चर्चा होगी। पिछले साल पीएम मोदी के मॉस्को दौरे के बाद यह यात्रा रिश्तों को और गहरा करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत रूस से हथियार और तकनीक ट्रांसफर जारी रखेगा।
पीएम मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में गीता भेंट कर सांस्कृतिक डिप्लोमेसी का शानदार उदाहरण पेश किया। यह भेंट दोनों नेताओं के निजी रिश्तों को दर्शाती है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है।
भारत-रूस संबंधों का ऐतिहासिक महत्व
भारत और रूस के बीच हर साल शिखर वार्ता होती है, जिसमें अब तक 22 सम्मेलन हो चुके हैं। सोवियत काल से चली आ रही दोस्ती आज रक्षा निर्यात, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर टिकी है। रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है, जो 60% से अधिक हथियार सप्लाई करता है।।यूक्रेन संकट के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीद बढ़ाकर ऊर्जा संकट टाला। व्यापार लक्ष्य 100 बिलियन डॉलर का है, जो इस दौरे से गति पकड़ेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा और मीडिया में नए MoU साइन होंगे।
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।
पुतिन का 2021 का छोटा दौरा कोविड के कारण सीमित था, लेकिन इस बार दो पूरे दिन हैं। वैश्विक मंच पर भारत की गुट-निरपेक्ष नीति रूस के साथ संतुलन बनाए रखती है।वैश्विक संदर्भ में पुतिन का भारत दौरायह दौरा अमेरिका-रूस तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक ताकत दिखाता है। पुतिन के साथ कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भारत में निवेश बढ़ाएगा। बिजनेस फोरम में प्रमुख उद्योगपति शामिल होंगे।
दुनिया की नजर इस दौरे पर है क्योंकि यह बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगा। भारत रूस से BRICS और SCO जैसे मंचों पर समर्थन लेता है। ऊर्जा और रक्षा में स्वदेशीकरण पर भी फोकस रहेगा।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस दौरे से भारत को सस्ता रूसी तेल मिलेगा, जो महंगाई पर नियंत्रण रखेगा। रक्षा सौदों से सेना मजबूत होगी। व्यापार बाधाओं को हटाने से निर्यात बढ़ेगा।परमाणु ऊर्जा में सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य पूरे होंगे। छोटे रिएक्टर प्रोजेक्ट ग्रामीण विद्युतीकरण में मदद करेंगे। कुल मिलाकर, यह दौरा भारत की आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देगा।पुतिन के दौरे से भारत-रूस दोस्ती नई ऊंचाइयों को छुएगी। वैश्विक अनिश्चितताओं में यह स्थिरता का प्रतीक बनेगा।
निष्कर्ष
रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का यह दौरा यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत और रूस का संबंध अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद स्थिर और मजबूत है। रूस हमेशा से भारत का एक ऐसा विश्वसनीय मित्र (Reliable Ally) रहा है जो हर कठिन समय में साथ खड़ा रहा है।
यह शिखर वार्ता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जहां दोनों देश एक-दूसरे के हितों का सम्मान करते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देंगे।