इंटरनेट की दुनिया में इन दिनों एक अजीब और खतरनाक ट्रेंड चल रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन कोई न कोई Viral MMS Video चर्चा का विषय बन जाता है। कभी किसी सेलिब्रिटी के नाम पर तो कभी किसी आम इंसान के नाम पर, लीक वीडियो के दावे किए जाते हैं। 12 दिसंबर की तारीख भी इससे अछूती नहीं है। आज सुबह से ही कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर “New Viral MMS” के नाम से लिंक शेयर किए जा रहे हैं।
यूजर्स की उत्सुकता का फायदा उठाने के लिए साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। वे जानते हैं कि लोग ऐसे वीडियो को खोजने के लिए गूगल और सोशल मीडिया पर सर्च जरूर करेंगे। इसी का फायदा उठाकर वे मैलवेयर और वायरस वाले लिंक फैला रहे हैं। पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स ने इसको लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। अगर आप भी ऐसे वीडियो की तलाश में हैं, तो यह खबर आपको एक बड़े नुकसान से बचा सकती है।
हकीकत यह है कि इंटरनेट पर वायरल हो रहे 90% से ज्यादा एमएमएस वीडियो या तो फेक हैं या फिर बहुत पुराने। कई मामलों में तो डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके नकली वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इनका एकमात्र मकसद आपकी निजी जानकारी चुराना है। एक छोटी सी गलती आपको आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की मुसीबत में डाल सकती है।
पिछले कुछ समय में ‘क्लिकबेट’ का चलन बहुत बढ़ गया है। साइबर ठग वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर ऐसे मैसेज भेजते हैं जिनमें लिखा होता है “Full HD Viral MMS Video Download”। जैसे ही कोई यूजर लालच में आकर उस लिंक पर क्लिक करता है, उसके फोन में एक स्पाईवेयर इंस्टॉल हो जाता है।
यह स्पाईवेयर आपके फोन के कैमरा, माइक्रोफोन और गैलरी का एक्सेस ले लेता है। इसके बाद ठग आपको ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं। कई बार ये लिंक आपको ऐसी वेबसाइट पर ले जाते हैं जो हूबहू फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसी दिखती है, लेकिन असल में वह एक फिशिंग पेज होता है। वहां लॉगइन करते ही आपका पासवर्ड चोरी हो जाता है।
हाल ही में सामने आए “19 मिनट” और “40 मिनट” वाले वीडियो स्कैम भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं। लोग वीडियो के चक्कर में अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। साइबर सेल के मुताबिक, ऐसे लिंक्स के जरिए हर रोज हजारों लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं।
डीपफेक का खतरा और असली-नकली की पहचान
आज के दौर में Viral MMS Video की सच्चाई जानना बहुत मुश्किल हो गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किसी के भी चेहरे को किसी अश्लील वीडियो में लगाया जा सकता है। इसे डीपफेक कहा जाता है। हाल ही में कई मशहूर हस्तियों को इसका शिकार बनाया गया है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी आंखों पर भरोसा करने से पहले थोड़ा दिमाग लगाएं। अगर वीडियो में आवाज और होठों की मूवमेंट मैच नहीं कर रही, या चेहरे के आसपास ब्लरनेस है, तो यह डीपफेक हो सकता है। ऐसे वीडियो को शेयर करना किसी निर्दोष की इज्जत उछालने जैसा है।
समाज में इस तरह के कंटेंट का प्रसार न केवल अनैतिक है बल्कि यह किसी को डिप्रेशन में भी धकेल सकता है। हमें एक जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए और ऐसे वीडियो को रिपोर्ट करना चाहिए।
आईटी एक्ट के तहत हो सकती है जेल
भारत में किसी भी तरह के अश्लील या आपत्तिजनक Viral MMS Video को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करना दंडनीय अपराध है। आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 और 67A के तहत, ऐसा करने वाले को 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है।
कानून केवल वीडियो बनाने वाले पर ही नहीं, बल्कि उसे शेयर करने वाले पर भी लागू होता है। अगर आप वॉट्सऐप ग्रुप में ऐसा कोई वीडियो फॉरवर्ड करते हैं, तो आप भी अपराध में बराबर के भागीदार माने जाएंगे। ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी और भी ज्यादा होती है।
पुलिस अब सोशल मीडिया की निगरानी के लिए एडवांस टूल्स का इस्तेमाल कर रही है। वे कीवर्ड्स के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि वीडियो कहां से शुरू हुआ और किसने-किसने शेयर किया। इसलिए, “सिर्फ देखने” के लिए भी ऐसे वीडियो को अपने फोन में न रखें।
बच्चों और युवाओं पर बुरा असर
इस तरह के Viral MMS Video का सबसे बुरा असर हमारी युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। टीनएजर्स अक्सर जिज्ञासावश ऐसे कंटेंट को सर्च करते हैं और गलत संगत में पड़ जाते हैं। कई बार वे खुद भी ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाते हैं।
माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखें। उन्हें साइबर सुरक्षा और ‘गुड टच-बैड टच’ के डिजिटल वर्जन के बारे में समझाएं। बच्चों के फोन में पैरेंटल कंट्रोल ऐप्स का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा विकल्प है।
स्कूलों और कॉलेजों में भी साइबर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। युवाओं को यह समझना होगा कि इंटरनेट पर उनकी एक गलती उनके करियर को बर्बाद कर सकती है। डिजिटल फुटप्रिंट कभी मिटते नहीं हैं।
अगर आपके पास आए लिंक तो क्या करें?
सबसे पहले, अगर आपके पास किसी अनजान नंबर से Viral MMS Video का लिंक आता है, तो उसे बिल्कुल न खोलें। उसे तुरंत डिलीट कर दें और नंबर को ब्लॉक करें। अगर लिंक किसी जानने वाले ने भेजा है, तो उसे भी मना करें और खतरे के बारे में बताएं।
अगर आप गलती से लिंक पर क्लिक कर चुके हैं, तो तुरंत अपना इंटरनेट डेटा बंद कर दें। अपने फोन को फैक्ट्री रीसेट करें या किसी एक्सपर्ट को दिखाएं। अपने सभी बैंकिंग और सोशल मीडिया पासवर्ड बदल लें।
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।
आप साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है। अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षित इंटरनेट का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष
अंत में, यह याद रखना जरूरी है कि Viral MMS Video केवल एक जाल है। इसमें फंसकर आप अपना पैसा, प्रतिष्ठा और मानसिक शांति खो सकते हैं। पुलिस और प्रशासन अपना काम कर रहे हैं, लेकिन हमें भी जागरूक होना होगा।
इंटरनेट का इस्तेमाल ज्ञान और मनोरंजन के लिए करें, न कि गंदगी फैलाने के लिए। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।
Related Disclaimer – यह लेख केवल जनहित में साइबर सुरक्षा जागरूकता के लिए प्रकाशित किया गया है। हम किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री या Viral MMS Video के दावों का समर्थन नहीं करते। पाठकों से अनुरोध है कि वे भारतीय कानूनों का पालन करें और प्रतिबंधित सामग्री को शेयर न करें।