भारत के सबसे मशहूर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर (Paranormal Investigator) और ‘इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी’ के संस्थापक गौरव तिवारी की मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है। साल 2016 में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
क्या वह आत्महत्या थी, हत्या, या वाकई किसी ‘नकारात्मक शक्ति’ (Negative Force) ने देश के सबसे निडर घोस्ट हंटर की जान ले ली? आइए, इस रिपोर्ट में जानते हैं उस रहस्यमयी घटना की पूरी कहानी।
घटना 7 जुलाई 2016 की है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर-19 स्थित गौरव तिवारी का फ्लैट उस दिन सामान्य था। परिवार के मुताबिक, गौरव बिल्कुल ठीक थे और अपने काम में व्यस्त थे।
लेकिन देर रात, अचानक बाथरूम से एक जोर की आवाज आई। जब घरवाले दौड़कर वहां पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी मशक्कत के बाद जब दरवाजा तोड़ा गया, तो जो मंजर सामने था, उसने सबके होश उड़ा दिए।
गौरव तिवारी बेहोशी की हालत में जमीन पर पड़े थे। उनकी गर्दन पर एक गहरा काला निशान था, मानो किसी ने अदृश्य हाथों से उनका गला घोंट दिया हो। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत से पहले पत्नी से कही थी ‘खौफनाक बात’
गौरव की मौत के बाद सबसे चौंकाने वाला खुलासा उनकी पत्नी ने किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना से कुछ दिन पहले गौरव ने अपनी पत्नी से कहा था कि “एक नकारात्मक शक्ति मुझे अपनी ओर खींच रही है, और मैं उसे कंट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ।”
गौरव ने यह भी कहा था कि वह उस शक्ति से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह उन पर हावी होती जा रही है। एक ऐसा शख्स जो हजारों भूतों से रूबरू हो चुका था, उसका यह कहना कि वह ‘कंट्रोल’ खो रहा है—यही बात इस केस को सबसे ज्यादा डरावना बनाती है।
पुलिस की थ्योरी: सुसाइड या हादसा?
दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या (Suicide) का मामला माना। पुलिस का तर्क था कि गौरव की गर्दन पर जो निशान था, वह फाँसी लगाने या किसी कपड़े से गला घोंटने जैसा लग रहा था। हालांकि, घर में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ‘एस्फिक्सिया’ (दम घुटने) को बताया गया। पुलिस ने यह भी एंगल जांचा कि क्या गौरव किसी पारिवारिक या आर्थिक तनाव से गुजर रहे थे। लेकिन गौरव के पिता और उनके फैंस ने सुसाइड की थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि गौरव बेहद सकारात्मक इंसान थे और आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे।
कमर्शियल पायलट से ‘घोस्ट हंटर’ बनने का सफर
गौरव तिवारी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी। वह पेशे से एक कमर्शियल पायलट थे। एक बार फ्लोरिडा (USA) में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने जिस अपार्टमेंट में रहने का फैसला किया, वहां उन्हें कुछ अजीबोगरीब अनुभव हुए।
यहीं से उनकी रुचि ‘दूसरी दुनिया’ में जागी। उन्होंने पायलट की नौकरी छोड़ दी और पैरानॉर्मल साइंस की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने 6,000 से ज्यादा हॉन्टेड लोकेशंस (Haunted Locations) की जांच की थी। वह ‘एमटीवी गर्ल्स नाइट आउट’ और ‘भूत आया’ जैसे टीवी शोज के जरिए घर-घर में मशहूर हो गए थे।
क्या ‘के-2 मीटर’ ने दिया था संकेत?
गौरव तिवारी हमेशा अपने साथ हाई-टेक गैजेट्स रखते थे, जैसे K2 मीटर, घोस्ट बॉक्स और इन्फ्रारेड कैमरे। उनके साथियों का दावा है कि मौत से पहले जिस आखिरी केस पर गौरव काम कर रहे थे, वह दिल्ली के जनकपुरी का एक कथित भुतहा घर था।
कहा जाता है कि वहां से लौटने के बाद ही गौरव का व्यवहार बदलने लगा था। क्या वह कोई ऐसी शक्ति अपने साथ ले आए थे जो उनकी मौत का कारण बनी? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
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2025 में फिर क्यों उठी चर्चा?
दिसंबर 2025 में आई वेब सीरीज ने इस केस की फाइलों पर जमी धूल को हटा दिया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForGaurav और #GauravTiwariMystery जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे हैं।
लोग अब मांग कर रहे हैं कि पुलिस या किसी बड़ी एजेंसी को इस केस की दोबारा जांच (Re-investigation) करनी चाहिए। विज्ञान और अंधविश्वास के बीच उलझी गौरव तिवारी की मौत की गुत्थी शायद कभी न सुलझे, लेकिन उनकी विरासत आज भी कायम है।
Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस बयानों और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। हम किसी भी तरह के अंधविश्वास या पैरानॉर्मल दावों की पुष्टि नहीं करते हैं।