देशभर में इन दिनों केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं। लाखों छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
परीक्षा के इस भारी दबाव और तनाव के बीच, सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार भी पूरी तरह से गर्म हो गया है। व्हाट्सएप (WhatsApp) से लेकर यूट्यूब तक कई तरह की भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं।
पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर एक दावा आग की तरह फैल रहा है। इस वायरल मैसेज में यह कहा जा रहा है कि सीबीएसई ने इस साल से जातियों के आधार पर पासिंग नंबरों में बड़ा बदलाव कर दिया है।
‘खबर आंगन’ की फैक्ट-चेक टीम ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को देखते हुए इस दावे की गहराई से पड़ताल की है। आइए जानते हैं क्या है इस वायरल खबर का 100% सच।
वायरल हो रहे इन संदेशों और कुछ यूट्यूब वीडियोज में खुलेआम यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि बोर्ड परीक्षाओं में भी आरक्षण (Reservation) की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
इन फर्जी पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जनरल (सामान्य) कैटेगरी के छात्रों को पास होने के लिए 33 प्रतिशत अंक लाने होंगे। वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए पासिंग मार्क्स 23 या 28 प्रतिशत कर दिए गए हैं।
यह दावा इतना भ्रामक है कि परीक्षा की तैयारी कर रहे कई आरक्षित वर्ग के छात्रों ने इसे सच मान लिया है। इससे उनकी पढ़ाई की रफ्तार और एकाग्रता पर बुरा असर पड़ रहा है।
वहीं, सामान्य वर्ग के छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच इस झूठी खबर से भारी निराशा और रोष का माहौल पैदा किया जा रहा है।
क्या है इस वायरल खबर की पूरी सच्चाई?
हमारी विस्तृत इन्वेस्टिगेशन में यह बात शीशे की तरह साफ हो गई है कि जातियों के आधार पर अलग-अलग पासिंग नंबर तय करने का यह दावा सौ फीसदी फर्जी (Fake News) है।
सीबीएसई या भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने ऐसा कोई भी नियम कभी लागू नहीं किया है। भविष्य में भी इस तरह का कोई प्रस्ताव शिक्षा बोर्ड के पास विचाराधीन नहीं है।
असल में, इंटरनेट पर बैठे कुछ स्कैमर्स और व्यूज के भूखे क्रिएटर्स प्रतियोगी परीक्षाओं के नियमों को एकेडमिक बोर्ड परीक्षाओं के साथ मिला रहे हैं। यही इस पूरे भ्रम की असली जड़ है।
सीटीईटी (CTET) जैसी शिक्षक पात्रता परीक्षाओं या नवोदय विद्यालय के एंट्रेंस एग्जाम में आरक्षित वर्गों को कटऑफ में कुछ छूट मिलती है। वहां जनरल के लिए 60% और अन्य के लिए 55% का नियम होता है।
इन्ही प्रतियोगी परीक्षाओं के नियमों और स्क्रीनशॉट्स को एडिट करके, शरारती तत्व इसे 10वीं और 12वीं के बोर्ड रिजल्ट का नियम बताकर धड़ल्ले से वायरल कर रहे हैं।
CBSE Passing Marks: 10वीं और 12वीं का असली नियम
अगर हम CBSE Passing Marks के असली और आधिकारिक नियमों की बात करें, तो बोर्ड में ‘एक देश, एक नियम’ का सिद्धांत पूरी तरह से लागू होता है।
सीबीएसई के परीक्षा उपनियमों (Examination Bye-Laws) के अनुसार, परीक्षा कक्ष में बैठने वाला हर छात्र सिर्फ एक विद्यार्थी होता है। उसकी कोई जाति या धर्म बोर्ड के लिए मायने नहीं रखता।
- कक्षा 10 का नियम: दसवीं में छात्रों को थ्योरी (लिखित परीक्षा) और इंटरनल असेसमेंट (प्रैक्टिकल) दोनों के अंकों को मिलाकर कुल 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होते हैं। यह कंबाइंड पासिंग सिस्टम दसवीं के बच्चों को एक बड़ा मनोवैज्ञानिक सहारा देता है।
- कक्षा 12 का नियम: बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए नियम काफी सख्त हैं। यहां कंबाइंड मार्क्स वाला फॉर्मूला काम नहीं करता। बारहवीं में छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों परीक्षाओं में अलग-अलग 33 प्रतिशत अंक लाना 100% अनिवार्य है।
अगर किसी भी छात्र के 33% से एक भी नंबर कम आता है, तो उसे उस विषय में फेल या कम्पार्टमेंट की श्रेणी में ही रखा जाएगा। इसमें किसी भी वर्ग विशेष को कोई रियायत नहीं दी जाती है।
80 नंबर वाले थ्योरी पेपर का क्या है गणित?
अक्सर छात्रों को 80 नंबर और 70 नंबर वाले थ्योरी पेपर्स के पासिंग मार्क्स को लेकर कन्फ्यूजन रहता है। इसे गणित के आसान नजरिए से समझना बेहद जरूरी है।
बारहवीं में जिन विषयों का थ्योरी पेपर 70 अंकों का है (जैसे भौतिक विज्ञान या जीव विज्ञान), वहां छात्र को पास होने के लिए थ्योरी में कम से कम 23 अंक लाने ही होंगे।
वहीं, 80 नंबर वाले विषयों (जैसे गणित, अकाउंटेंसी या कॉमर्स) में 33 प्रतिशत का गणित थोड़ा अलग हो जाता है। 80 का 33 प्रतिशत 26.4 होता है।
इसलिए, ऐसे पेपर्स में पास होने के लिए थ्योरी में कम से कम 27 अंक लाना अनिवार्य होता है। 26 अंक आने पर भी आपकी कम्पार्टमेंट आ सकती है।
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अफवाहों से बचें और अपनी पढ़ाई पर फोकस करें
परीक्षा के इस बेहद तनावपूर्ण माहौल में इस तरह की फेक न्यूज छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालती है। इससे उनका फोकस पढ़ाई से हटकर गैर-जरूरी बातों पर चला जाता है।
ग्रेडिंग प्रणाली की बात करें तो वह भी सभी के लिए एक समान है। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने वालों को सीधे ‘E’ ग्रेड दिया जाता है, जिसका मतलब बोर्ड की भाषा में फेल होना ही है।
हम सभी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से यह सख्त अपील करते हैं कि वे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से आने वाले ऐसे किसी भी मैसेज पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
बोर्ड परीक्षा के नियमों, पासिंग क्राइटेरिया या रिजल्ट से जुड़ी किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी के लिए केवल सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर ही विजिट करें। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।
Disclaimer: यह फैक्ट-चेक रिपोर्ट केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के आधिकारिक परीक्षा उपनियमों (Examination Bye-Laws) और सार्वजनिक दिशा-निर्देशों पर आधारित है। ‘खबर आंगन’ इस तरह के किसी भी वायरल या भ्रामक दावे का सख्ती से खंडन करता है और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी का समर्थन नहीं करता है। बोर्ड परीक्षा के नियमों से जुड़ी किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए छात्रों और अभिभावकों को केवल सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर ही विजिट करने की सलाह दी जाती है। इस लेख का उद्देश्य केवल छात्रों को सही जानकारी देकर जागरूक करना है।