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Galgotias University : क्या है AI Summit 2026 ‘रोबोटिक डॉग’ (Robodog) विवाद?

गलगोटिया यूनिवर्सिटी क्यों है विवादों में? Galgotias University के वायरल रोबोट वीडियो की सच्चाई और 2026 के प्लेसमेंट-फीस की पूरी रिपोर्ट। क्या यहाँ एडमिशन लेना सही है?
Khabar Aangan Published on: 18 फ़रवरी 2026
Galgotias University : क्या है AI Summit 2026 ‘रोबोटिक डॉग’ (Robodog) विवाद?
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नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026:

ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) इस वक्त पूरे देश में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह कोई नई शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक बेहद शर्मनाक विवाद है।

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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘India AI Impact Summit 2026’ में यूनिवर्सिटी ने कुछ ऐसा किया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। “मेक इन इंडिया” के मंच पर एक विदेशी प्रोडक्ट को अपना बताने का आरोप लगा है।

एक तरफ जहां यूनिवर्सिटी हर साल अपने 100% प्लेसमेंट के शानदार दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ‘चाइनीज रोबोट’ को अपना इनोवेशन बताने पर उसकी भारी फजीहत हो रही है।

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‘खबर आंगन’ की एजुकेशन और टेक डेस्क आपके लिए इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट लेकर आई है। जानिए क्या है इस वायरल वीडियो का सच, और 2026 में यहाँ एडमिशन लेना आपके भविष्य के लिए कितना सही है।

AI Summit 2026: क्या है ‘रोबोटिक डॉग’ (Robodog) विवाद?

भारत सरकार द्वारा दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में देश-विदेश की कई टेक कंपनियों और यूनिवर्सिटीज ने हिस्सा लिया था। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भी यहाँ अपना एक हाई-टेक स्टॉल लगाया था।

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यहां उन्होंने एक रोबोटिक डॉग (Robodog) प्रदर्शित किया और इसका नाम ‘ओरियन’ (Orion) बताया। विवाद तब शुरू हुआ जब टेक-सैवी इंटरनेट यूजर्स ने इसकी असलियत पल भर में पकड़ ली।

वायरल वीडियो और प्रोफेसर का दावा

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में यूनिवर्सिटी की एक प्रतिनिधि (प्रोफेसर नेहा सिंह) मीडिया को इस रोबोट के फीचर्स के बारे में पूरे आत्मविश्वास से बता रही थीं।

वीडियो में उन्होंने स्पष्ट रूप से दावा किया कि इस रोबोट को गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (Centre of Excellence) में छात्रों द्वारा विकसित (Develop) किया गया है।

लेकिन हकीकत में, यह चीन की मशहूर रोबोटिक्स कंपनी ‘Unitree’ का ‘Go2’ मॉडल निकला। भारत में इसे ऑनलाइन 2 से 3 लाख रुपये में आसानी से खरीदा जा सकता है।

एक्सपो से स्टॉल हटाने का अल्टीमेटम

इस बड़े खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर “Make in India” की जगह “Make believe in India” लिखकर मीम्स की बाढ़ आ गई।

सूत्रों के मुताबिक, इस भारी फजीहत और एकेडमिक चोरी के आरोपों के बाद सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को तुरंत प्रभाव से एआई समिट का एक्सपो एरिया खाली करने (Vacate) का निर्देश दे दिया।

रोबोट डॉग के विवाद की आग अभी बुझी भी नहीं थी कि यूनिवर्सिटी के एक ड्रोन (Drone) का वीडियो भी वायरल हो गया। इसे ‘स्क्रैच से बनाया हुआ’ बताया गया था, लेकिन वह भी एक रेडीमेड कमर्शियल प्रोडक्ट निकला।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी और प्रोफेसर की सफाई

विवाद को बेकाबू होता देख यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने एक्स (Twitter) पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है।

यूनिवर्सिटी ने कहा कि उन्होंने ‘यूनिट्री’ (Unitree) का रोबोट सिर्फ छात्रों को पढ़ाने, लैब टेस्टिंग और सिखाने (Educational Tool) के लिए खरीदा था।

उन्होंने दावा किया कि “हमने कभी इसे अपना इनोवेशन नहीं बताया, यह सिर्फ एक चलता-फिरता क्लासरूम है।” हालांकि, यह सफाई वायरल वीडियो में उन्हीं की प्रोफेसर द्वारा किए गए दावों से बिल्कुल उलट है।

प्रोफेसर नेहा सिंह ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनकी बातों को “गलत समझा गया” (Misinterpreted) और वह एआई की नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट की फैकल्टी हैं।

गलगोटिया प्लेसमेंट 2025-2026: विवादों के बीच कैसी है नौकरी की स्थिति?

इन ताजा पीआर (PR) विवादों से हटकर अगर एकेडमिक्स की बात करें, तो गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट के मामले में उत्तर भारत के प्रमुख संस्थानों में गिनी जाती है।

साल 2025-26 के प्लेसमेंट ड्राइव में 900 से ज्यादा कंपनियों ने कैंपस का दौरा किया। इस दौरान छात्रों को 4000 से ज्यादा बंपर नौकरी के ऑफर दिए गए।

हाईएस्ट और एवरेज पैकेज का गणित

हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 बैच के लिए यूनिवर्सिटी का उच्चतम पैकेज (Highest Package) ₹39 लाख प्रति वर्ष (LPA) रहा है।

वहीं, बी.टेक (B.Tech) और एमबीए (MBA) जैसे कोर कोर्सेज का औसत पैकेज (Average Package) ₹5.25 लाख के आसपास दर्ज किया गया है। स्कूल ऑफ बिजनेस ने 100% प्लेसमेंट का दावा भी किया है।

टॉप रिक्रूटर्स (Top Recruiters) कौन हैं?

कैंपस में टेक और कोर सेक्टर की कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां हर साल टैलेंट हंट के लिए आती हैं।

इनमें अमेज़न (Amazon), कॉग्निजेंट (Cognizant), एक्सेंचर (Accenture), विप्रो (Wipro), इंफोसिस (Infosys), और डेलॉयट (Deloitte) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

एडमिशन 2026 और फीस स्ट्रक्चर (Fees & Admission Procedure)

अगर आप 2026 के नए सत्र में गलगोटिया यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने का मन बना रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

यहाँ एडमिशन मुख्य रूप से नेशनल लेवल एग्जाम्स (CUET, JEE Main, CAT) और यूनिवर्सिटी के अपने एंट्रेंस टेस्ट (GUEE) के आधार पर होते हैं।

प्रमुख कोर्सेज की सालाना फीस

  • B.Tech (CSE, AI/ML, Data Science): 4 साल के बी.टेक कोर्स की ट्यूशन फीस लगभग ₹1.15 लाख से ₹1.5 लाख प्रति वर्ष के बीच है।
  • MBA: 2 साल के एमबीए प्रोग्राम की सालाना फीस भी लगभग ₹1.15 लाख से ₹1.5 लाख के बीच बैठती है।
  • MCA & BCA: इन कंप्यूटर एप्लीकेशन कोर्सेज के लिए आपको सालाना ₹80,000 से ₹1.15 लाख तक चुकाने पड़ सकते हैं।
  • लॉ (BA LLB/BBA LLB): 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्सेज की फीस करीब ₹1 लाख से ₹1.5 लाख प्रति वर्ष है।

हॉस्टल की बात करें, तो एसी (AC) और नॉन-एसी (Non-AC) कमरों के आधार पर इन-कैंपस हॉस्टल की सालाना फीस ₹1.26 लाख से ₹1.71 लाख के बीच है।

हमारा निष्कर्ष (Expert Verdict)

गलगोटिया यूनिवर्सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, कोर्स डायवर्सिटी और प्लेसमेंट के लिहाज से एक बहुत मजबूत प्राइवेट यूनिवर्सिटी है। यहाँ की कंपनियों की लाइन-अप छात्रों को एक सुरक्षित करियर का मौका देती है।

हालांकि, ‘चाइनीज रोबोट’ जैसे विवाद संस्थान की ब्रांड वैल्यू (Brand Value) को गहरा धक्का पहुंचाते हैं। एकेडमिक सत्यनिष्ठा (Academic Integrity) पर उठे ये सवाल लंबे समय में छात्रों की डिग्री की विश्वसनीयता पर असर डाल सकते हैं।

अगर आप यहाँ एडमिशन लेना चाहते हैं, तो प्लेसमेंट रिकॉर्ड्स और आरओआई (ROI) निश्चित रूप से आपके पक्ष में हैं। लेकिन आपको इस तरह के मार्केटिंग गिमिक्स और पीआर (PR) विवादों से सतर्क रहना चाहिए।

Disclaimer: इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी (विवाद, प्लेसमेंट और फीस) 18 फरवरी 2026 तक की मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक यूनिवर्सिटी डेटा पर आधारित है। ‘खबर आंगन’ वायरल वीडियो के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। एडमिशन से पहले छात्रों को अपनी रिसर्च स्वयं करने की सलाह दी जाती है।

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