EVM Rigging : लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल ? पुष्पम प्रिया चौधरी ने चुनाव आयोग पर फोड़ा ठीकरा, कोर्ट जाने की तैयारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम आने के बाद, जहाँ एक ओर NDA की प्रचंड जीत का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ सीटों पर परिणाम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस चुनाव में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में उतरीं ‘प्लूरल्स पार्टी’ की प्रमुख पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपनी हार के लिए सीधे तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को जिम्मेदार ठहराया है। दरभंगा सीट पर चुनाव लड़ने वाली पुष्पम प्रिया ने एक बेहद ही चौंकाने वाला और भावनात्मक बयान दिया है कि उन्हें उनकी “मां तक का वोट भी नहीं मिला।”
यह बयान EVM Rigging के आरोपों को एक व्यक्तिगत और गंभीर आयाम देता है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं और वह इस मामले को लेकर कोर्ट का रुख करेंगी। यह आरोप चुनाव आयोग की प्रक्रिया और बिहार के जनादेश की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
भावनात्मक और विस्फोटक दावा: “माँ का वोट भी नहीं मिला”
पुष्पम प्रिया चौधरी का यह बयान केवल एक हारने वाले उम्मीदवार का गुस्सा नहीं है, बल्कि यह EVM Rigging के आरोप को एक भावनात्मक आधार प्रदान करता है।
- दावे का संदर्भ: किसी भी उम्मीदवार को कम से कम अपना, अपने परिवार का, और अपने पोलिंग एजेंटों का वोट मिलने की अपेक्षा होती है। ऐसे में, यह दावा कि उन्हें उनकी सगी माँ का वोट भी नहीं मिला, दर्शाता है कि परिणाम और दर्ज किए गए वोटों की संख्या में भारी विसंगति है।
- मीडिया पर प्रभाव: उनका यह बयान मीडिया में तुरंत वायरल हो गया, क्योंकि यह सीधे तौर पर EVM Rigging के आरोपों को बल देता है। उनका मानना है कि यदि उनके निकटतम परिवार का वोट भी दर्ज नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट तौर पर तकनीकी हेरफेर की ओर इशारा करता है।
- लोकतंत्र पर विश्वास: इस तरह के दावे से उन लाखों मतदाताओं के मन में संदेह पैदा होता है जो इस उम्मीद में वोट डालते हैं कि उनका मत सही ढंग से दर्ज होगा।
पुष्पम प्रिया: एक महत्वाकांक्षी राजनीतिक सफर
पुष्पम प्रिया चौधरी, जो एक जाने-माने राजनेता की बेटी हैं, ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत एक बुद्धिजीवी और प्रशासनिक सुधार के एजेंडे के साथ की थी।
- ‘बदलाव की राजनीति’ का वादा: उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और अपनी पार्टी को जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर रखने का दावा किया था। उनकी पार्टी का उद्देश्य बिहार को विकास के नए मॉडल पर ले जाना था।
- दरभंगा की हार: Darbhanga को उन्होंने अपने अभियान का केंद्र बनाया था, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए। उनकी हार ने बिहार में बुद्धिजीवी और ‘नई पीढ़ी’ की राजनीति के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। EVM Rigging का आरोप अब उनकी पूरी राजनीतिक परियोजना का केंद्र बिंदु बन गया है।
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EVM Rigging के सबूत और कानूनी प्रक्रिया की मांग
पुष्पम प्रिया ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि उनके पास EVM Rigging से संबंधित गड़बड़ी के दस्तावेजी सबूत हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक करेंगी और कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।