वाशिंगटन/इस्लामाबाद | 13 अप्रैल 2026: वैश्विक शांति की आखिरी उम्मीद भी अब टूटती नजर आ रही है। Pakistan की राजधानी इस्लामाबाद में US और ईरान के बीच चली 21 घंटे की मैराथन शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है। इस विफलता के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने Strait of Hormuz की ‘तत्काल’ और ‘पूर्ण’ समुद्री घेराबंदी का आदेश जारी कर दिया है। Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि चूंकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, इसलिए अब अमेरिका उसकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर पूरी तरह कब्जा करेगा।
J.D. Vance के खाली हाथ लौटने के बाद और भी बिगड़े हालात
शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद भेजे गए अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने आज सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वार्ता की विफलता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपना सर्वश्रेष्ठ और अंतिम प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने परमाणु हथियारों के त्याग और कड़े अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों की शर्तों को मानने से साफ इनकार कर दिया।
जैसे ही अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना हुआ, Donald Trump ने अपनी नौसेना को आदेश दिया कि हॉर्मुज से होकर गुजरने वाले किसी भी जहाज को न तो अंदर आने दिया जाए और न ही बाहर जाने दिया जाए। राष्ट्रपति ने यह भी निर्देश दिया है कि जो भी जहाज ईरान को ‘टोल’ या टैक्स देंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसेना द्वारा रोका जाएगा और उनकी तलाशी ली जाएगी।
Strait of Hormuz की घेराबंदी से क्यों डरी हुई है पूरी दुनिया?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। Donald Trump के इस कड़े फैसले का मतलब है कि अब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस घेराबंदी के कारण आने वाले कुछ ही घंटों में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
भारत, चीन और जापान जैसे देशों के लिए यह खबर किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है, क्योंकि उनकी ऊर्जा सुरक्षा का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है। Donald Trump ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान उनकी शर्तों पर नहीं झुकता, यह घेराबंदी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिन देशों के पास इस काम को करने की हिम्मत नहीं थी, अमेरिका अब उनके हक के लिए यह काम कर रहा है।
