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नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! Balendra Shah के कड़े फैसलों से बदल रही है देश की विदेश नीति, कूटनीतिक हलकों में मची हलचल

नेपाल की राजनीति में अब सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि काठमांडू के मेयर भी विदेश नीति को प्रभावित कर रहे हैं। उनके कड़े फैसलों और विदेशी कूटनीतिज्ञों से सीधी बातचीत ने नए समीकरण पैदा कर दिए हैं।
Ashutosh Kumar Jha Published on: 12 अप्रैल 2026
नेपाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! Balendra Shah के कड़े फैसलों से बदल रही है देश की विदेश नीति, कूटनीतिक हलकों में मची हलचल
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काठमांडू | 12 अप्रैल 2026: नेपाल की राजनीति और उसके कूटनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है। काठमांडू के बेहद लोकप्रिय और स्वतंत्र मेयर Balendra Shah ने अपने कड़े और बेबाक फैसलों से सबको चौंका दिया है।

आमतौर पर किसी भी देश की विदेश नीति सिर्फ वहाँ की केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय तय करते हैं, लेकिन नेपाल में एक स्थानीय मेयर के फैसलों का सीधा असर अब अंतरराष्ट्रीय रिश्तों और पड़ोसी देशों की नीतियों पर पड़ रहा है।

‘खबर आंगन’ की इंटरनेशनल डेस्क ने नेपाल की इस बदलती राजनीतिक तस्वीर और कूटनीतिक रणनीतियों का गहराई से विश्लेषण किया है। एक सिविल इंजीनियर से राजनेता बने इस युवा नेता ने पारंपरिक राजनीतिक दलों के दशकों पुराने दबदबे को पूरी तरह से चुनौती दी है। उनके काम करने का अनूठा तरीका और राष्ट्रीय संप्रभुता को लेकर उनका स्पष्ट रुख विदेशी दूतावासों के लिए भी सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।

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पारंपरिक कूटनीति को कैसे चुनौती दे रहे हैं Balendra Shah?

काठमांडू महानगरपालिका के मुखिया के तौर पर Balendra Shah ने कई बार विदेशी कूटनीतिज्ञों और राजदूतों के साथ सीधे तौर पर बातचीत की है। यह नेपाल की उस पारंपरिक कूटनीति से बिल्कुल अलग है, जहां स्थानीय नेता विदेशी मामलों में ज्यादा दखल नहीं देते थे और सब कुछ केंद्र के इशारे पर होता था।

उन्होंने शहर के बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए जो सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है, उसने भारत और चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी देशों के रणनीतिकारों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।

बीते कुछ समय में स्पष्ट रूप से देखा गया है कि उन्होंने सांस्कृतिक पहचान और नेपाल के इतिहास के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने से साफ इनकार कर दिया है। जब भी सांस्कृतिक पहलों में नेपाल के स्वाभिमान को लेकर कोई विवादित बात सामने आई, तो उन्होंने सबसे पहले और सबसे कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

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