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“Fatty Liver : छुपी बीमारी जो बन सकती है अगली महामारी!”

“Fatty Liver : छुपी बीमारी जो बन सकती है अगली महामारी!”

Ravi Prakash Published on: 18 अक्टूबर 2025
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Fatty Liver की समस्या भारत में अब एक तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले वर्षों में यह “नई महामारी” (modern epidemic) का रूप ले सकती है।

फैटी लिवर क्या है?

फैटी लिवर वह स्थिति है जिसमें शरीर की अतिरिक्त वसा यकृत (liver) में जमा हो जाती है। अगर यह शराब के सेवन के बिना होती है, तो इसे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है, और हाल में इसका नया नाम “मेटाबोलिक डिसफंक्शन-असोसिएटेड स्टीटोॉटिक लिवर डिजीज” (MASLD) रखा गया है।NAFLD की दो प्रमुख अवस्थाएँ हैं — सरल स्टेटोसिस (Simple Steatosis), जिसमें सिर्फ वसा जमा होती है, और नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), जिसमें लिवर में सूजन होकर कोशिकाओं को नुकसान होता है। आगे चलकर यह सिरोसिस या लिवर कैंसर तक पहुँच सकती है।

भारत में संक्रमण की भयावह स्थिति:-

ताजा रिपोर्टों के अनुसार भारत की करीब 40% जनसंख्या यानी हर 10 में से 4 भारतीय इस रोग से प्रभावित हैं, जिसमें शराब न पीने वाले (teetotallers) भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। दुर्भाग्य से यह रोग अक्सर वर्षों तक बिना लक्षण के रहता है जिसे विशेषज्ञ “साइलेंट किलर” कहते हैं।मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु में बैठे-बैठे काम करने की आदत, फास्ट फूड संस्कृति और शारीरिक निष्क्रियता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अब यह समस्या बच्चों और किशोरों में भी देखने को मिल रही है, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।

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क्यों बढ़ रहा है भारत में खतरा?

भारत में फैटी लिवर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं:-
•मोटापा और उच्च कैलोरी वाला आहार (तले खाद्य पदार्थ, मीठे पेय, प्रोसेस्ड फूड)
•डायबिटीज़ और इंसुलिन रेजिस्टेंस
•शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना •अनियमित खान-पान और देर रात का भोजन
•आनुवंशिक प्रवृत्ति (genetic predisposition)
विशेष रूप से भारतीयों में “लीन फैटी लिवर” नामक स्थिति आम है, जिसमें सामान्य वजन वाले लोग भी इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं क्योंकि उनके शरीर में आंतरिक वसा (visceral fat) अधिक होती है।

स्वास्थ्य पर इसके विनाशकारी प्रभाव:-

लिवर शरीर का सबसे बड़ा मेटाबोलिक अंग है, और उस पर वसा का दबाव बढ़ने से कई जटिल समस्याएँ जन्म लेती हैं —टाइप-2 डायबिटीज़ और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।लिवर सिरोसिस या लिवर फेल्योर तक स्थिति पहुँच सकती है।उन्नत अवस्था में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2030 तक दुनिया की लगभग 30% जनसंख्या किसी-न-किसी रूप में फैटी लिवर डिजीज से ग्रस्त हो सकती है।

सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों की चेतावनी:-

भारत सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीजेज (NP-NCD) के अंतर्गत फैटी लिवर जागरूकता और स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है। इसमें स्वस्थ भोजन, शारीरिक गतिविधि, और वजन नियंत्रण पर जोर दिया गया है।इसके अलावा, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने सोशल मीडिया पर “Eat Right India” अभियान के जरिए तेल, मिठाइयों और जंक फूड का उपभोग घटाने की सलाह दी है।

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