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अब बिना लाइसेंस ब्याज पर पैसा देना होगा जुर्म, 7 साल की जेल का प्रावधान (BULA ACT 2025)

सरकार ने सूदखोरों पर कसा शिकंजा! क्या ब्याज पर पैसा देना अब जेल ले जाएगा? 26 दिसंबर 2025 की ताज़ा रिपोर्ट में जानें BULA एक्ट और अवैध वसूली पर सजा के नए प्रावधान।
Khabar Aangan Published on: 26 दिसम्बर 2025
अब बिना लाइसेंस ब्याज पर पैसा देना होगा जुर्म, 7 साल की जेल का प्रावधान (BULA ACT 2025)
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नई दिल्ली: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गरीबों का शोषण करने वाले अवैध सूदखोरों (Sudkhor) के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकारों ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। आज यानी 26 दिसंबर 2025 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, नए कानूनी प्रावधानों के तहत अब बिना वैध लाइसेंस के ब्याज पर पैसा देना एक गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाएगा।

सरकार ने Banning of Unregulated Lending Activities (BULA) Act 2025 के माध्यम से साहूकारी के नाम पर चल रहे अवैध धंधे पर नकेल कसने की तैयारी पूरी कर ली है। इस कानून के तहत न केवल 7 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है, बल्कि भारी भरकम जुर्माने की भी व्यवस्था की गई है।

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खबर आंगन रिसर्च डेस्क ने देश के विभिन्न राज्यों में सूदखोरों के खिलाफ चल रही पुलिस कार्रवाई और नए केंद्रीय कानूनों का विस्तृत विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि नए नियमों के तहत किसे अपराधी माना जाएगा और यदि कोई अवैध साहूकार आपको परेशान करता है, तो कानून आपकी कैसे रक्षा करेगा।


क्या है BULA एक्ट 2025 और सूदखोरी पर शिकंजा

भारत सरकार ने अनियंत्रित ऋण गतिविधियों को रोकने के लिए Banning of Unregulated Lending Activities (BULA) Bill 2025 को संसद में पेश किया है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य उन सभी वित्तीय लेन-देन को प्रतिबंधित करना है जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या अन्य राज्य नियामक संस्थाओं के दायरे में नहीं आते हैं।

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नए कानून के तहत, रिश्तेदारों को दिए जाने वाले व्यक्तिगत कर्ज को छोड़कर, कोई भी व्यक्ति बिना पंजीकरण के व्यावसायिक तौर पर ब्याज पर पैसा नहीं दे पाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस के यह धंधा करता पकड़ा जाता है, तो उसे ‘अवैध ऋण प्रदाता’ की श्रेणी में रखा जाएगा।

खबर आंगन की पड़ताल में यह सामने आया है कि इस एक्ट के लागू होने के बाद डिजिटल लोन ऐप्स और गली-मोहल्लों में काम करने वाले छोटे सूदखोरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कानून की नज़र में ‘ब्याज का धंधा’ केवल एक वित्तीय मामला नहीं, बल्कि एक फौजदारी अपराध होगा।

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7 साल की जेल और 1 करोड़ तक का जुर्माना

नए कानून में सजा के प्रावधान इतने सख्त रखे गए हैं कि सूदखोरों के लिए अब बच निकलना नामुमकिन होगा। BULA एक्ट 2025 के तहत सजा को अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि कोई भी दोषी कानून के हाथ से न बच सके।

  • अवैध ब्याज का धंधा: यदि कोई व्यक्ति बिना लाइसेंस के ब्याज पर पैसा देता है, तो उसे 2 साल से लेकर 7 साल तक की कड़ी कैद हो सकती है।
  • आर्थिक दंड: जेल के साथ-साथ दोषी पर 2 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • वसूली के लिए प्रताड़ना: यदि सूदखोर कर्ज वसूलने के लिए शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न, धमकी या गुंडागर्दी का सहारा लेता है, तो सजा 10 साल तक बढ़ सकती है।

यह सजा गैर-जमानती धाराओं के तहत दी जाएगी, जिसका अर्थ है कि एक बार गिरफ्तार होने के बाद सूदखोर को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी। सरकार का मानना है कि सख्त सजा के डर से ही इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है।


राज्यों की विशेष मुहिम: हरियाणा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में एक्शन

केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों ने भी अपने स्तर पर सूदखोरी के खिलाफ जंग शुरू कर दी है। हरियाणा पुलिस ने हाल ही में मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत अगले 15 दिनों में सभी जिलों में अवैध सूदखोरों की पहचान की जा रही है।

कर्नाटक सरकार ने भी अपने Money Lenders (Amendment) Bill 2025 में सजा को 6 महीने से बढ़ाकर सीधे 10 साल कर दिया है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारों द्वारा किसानों के शोषण को रोकने के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं जो गाँवों में जाकर शिकायतें दर्ज कर रही हैं।

सोनीपत और रोहतक जैसे क्षेत्रों में पुलिस ने 15 विशेष टीमों का गठन किया है जो अवैध फाइनेंसरों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। इन टीमों का मुख्य काम उन लोगों को बचाना है जो एक बार कर्ज लेने के बाद सूदखोरों के ‘बंधुआ मज़दूर’ बनकर रह जाते हैं।


डिजिटल लोन ऐप्स और ऑनलाइन माफिया पर नकेल

आजकल सूदखोरी का धंधा केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यम से भी फल-फूल रहा था। चीन और अन्य देशों से संचालित होने वाले हज़ारों अवैध लोन ऐप्स भारतीयों को छोटी राशि का लालच देकर उनके मोबाइल डेटा के ज़रिए ब्लैकमेल करते रहे हैं।

नए कानून के तहत, डिजिटल लेंडिंग को भी पूरी तरह विनियमित कर दिया गया है। कोई भी ऐप जो आरबीआई की ‘व्हाइटलिस्ट’ में शामिल नहीं है, वह भारत में संचालन नहीं कर पाएगा। ऐसी ऐप्स को प्रमोट करना या उनका विज्ञापन देना भी अब अपराध की श्रेणी में आएगा।

गूगल और एप्पल जैसे ऐप स्टोर्स को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त वित्तीय संस्थाओं के ऐप्स को ही जगह दें। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि इंटरनेट के माध्यम से ब्याज पर पैसा देकर लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले ‘डिजिटल सूदखोरों’ को बख्शा नहीं जाएगा।


साहूकारी और सूदखोरी के बीच का अंतर समझें

अक्सर लोग साहूकारी और सूदखोरी को एक ही मान लेते हैं, लेकिन कानूनन इनमें बड़ा अंतर है। साहूकारी (Licensed Moneylending) एक वैध व्यवसाय है, बशर्ते वह राज्य सरकार के ‘मनी लेंडर्स एक्ट’ के तहत पंजीकृत हो और नियमों का पालन करता हो।

वैध साहूकारी के नियम:

  • साहूकार के पास राज्य सरकार द्वारा जारी वैध लाइसेंस होना चाहिए।
  • ब्याज दर सरकार द्वारा तय सीमा (आमतौर पर 13% से 18% प्रति वर्ष) से अधिक नहीं हो सकती।
  • हर लेन-देन का उचित रसीद और बही-खाता (Ledger) संधारित करना अनिवार्य है।
  • साहूकार किसी भी सूरत में ऋणी की संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा या प्रताड़ना नहीं कर सकता।

इसके विपरीत, सूदखोरी (Usury) पूरी तरह अवैध है जहाँ 5% से 10% ‘मासिक’ ब्याज वसूला जाता है। अवैध सूदखोर अक्सर कोरे कागजों या चेक पर हस्ताक्षर करवा लेते हैं और बाद में कर्जदार की जमीन या घर हड़पने की कोशिश करते हैं।


यदि आप सूदखोर के चंगुल में फंसे हैं, तो क्या करें?

यदि आपने किसी से ब्याज पर पैसा लिया है और वह व्यक्ति आपको धमका रहा है या आपकी संपत्ति हड़पने की कोशिश कर रहा है, तो डरने के बजाय कानून का सहारा लें। नए नियमों के तहत पुलिस अब ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य है।

शिकायत करने का सही तरीका:

  • अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन में जाकर लिखित शिकायत दें या 112 नंबर पर कॉल करें।
  • सूदखोर के साथ हुए सभी लेन-देन का रिकॉर्ड, जैसे डायरी, चेक की कॉपी या कॉल रिकॉर्डिंग संभाल कर रखें।
  • कई राज्यों में जिला कलेक्टर कार्यालय में ‘ऋण राहत समिति’ होती है, आप वहां भी आवेदन कर सकते हैं।
  • किसी भी कोरे कागज या एग्रीमेंट पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें और यदि पहले किए हैं, तो उसकी जानकारी पुलिस को दें।

खबर आंगन की पड़ताल बताती है कि सरकार अब पुराने अवैध कर्जों को ‘शून्य’ घोषित करने पर भी विचार कर रही है, ताकि पीड़ितों को आर्थिक गुलामी से मुक्त किया जा सके। आपकी जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी ढाल है।


निष्कर्ष: समाज को सूदखोरी के जहर से मुक्त करने का संकल्प

सूदखोरी केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभिशाप है जिसने हज़ारों परिवारों को उजाड़ दिया है। 26 दिसंबर 2025 की हमारी यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि सरकार के इरादे अब मज़बूत हैं और कानून का शिकंजा कस चुका है।

7 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान इस बात का संकेत है कि अब ‘ऊंचे ब्याज का खेल’ खत्म होने वाला है। यदि हम सब मिलकर जागरूक बनें और अवैध लेन-देन का विरोध करें, तो ग्रामीण भारत को इस जाल से पूरी तरह मुक्त किया जा सकता है।

खबर आंगन की टीम बैंकिंग सेक्टर और कानूनी बदलावों की हर अपडेट पर अपनी पैनी नज़र बनाए रखेगी। हम आपको सूचनाओं के उस पार ले जाते हैं जहाँ आपके अधिकारों की रक्षा होती है और सच्चाई सामने आती है। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें और केवल बैंक या लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं से ही कर्ज लें।

Related Disclaimer : यह विशेष रिपोर्ट Khabar Aangan Research Desk द्वारा 26 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध कानूनी ड्राफ्ट, सरकारी अधिसूचनाओं और समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। कानूनी सलाह के लिए कृपया किसी योग्य वकील या संबंधित विभाग से संपर्क करें।

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