नई दिल्ली | 25 मार्च 2026: चीनी टेक दिग्गज OnePlus की भारतीय यूनिट में एक बड़े बदलाव ने स्मार्टफोन बाजार में हलचल मचा दी है। OnePlus India के सीईओ Robin Liu ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कंपनी ने आधिकारिक तौर पर उनके इस्तीफे की पुष्टि कर दी है। यह अहम घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ग्लोबल लेवल पर वनप्लस के बिजनेस ऑपरेशंस में बड़े पुनर्गठन (Restructuring) की खबरें जोरों पर हैं।
इस्तीफे के पीछे क्या है ओप्पो ग्रुप का कनेक्शन?
वनप्लस की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि रॉबिन लियू साल 2018 में कंपनी से जुड़े थे और अब वह अपने “पर्सनल पैशन” (Personal Passions) को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
लेकिन, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है। ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ओप्पो (Oppo) ग्रुप के अंदर हुए बड़े बदलावों के बाद रॉबिन लियू को रियलमी (Realme) के सीईओ स्काई ली (Sky Li) को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले तक रॉबिन लियू और स्काई ली दोनों को ही सब-ब्रांड्स के संचालन में समान (Equals) दर्जा प्राप्त था।
क्या भारत से कारोबार समेट रहा है वनप्लस?
रॉबिन लियू के इस्तीफे के बाद टेक जगत में फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या OnePlus India अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में है? इसी साल जनवरी 2026 में खुद रॉबिन लियू ने एक्स (X) पर इन अफवाहों का खंडन करते हुए कहा था कि वनप्लस के भारत छोड़ने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।
अब उनके जाने के बाद, कंपनी ने एक बार फिर डैमेज कंट्रोल करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है। वनप्लस ने आश्वस्त किया है कि “भारत में कंपनी का बिजनेस ऑपरेशन पहले की ही तरह लोकल स्ट्रेटेजी और मजबूती के साथ जारी रहेगा।”
‘फ्लैगशिप किलर’ की सेल्स में आई भारी गिरावट
वनप्लस ने कभी ‘फ्लैगशिप किलर’ (Flagship Killer) बनकर भारतीय बाजार में एकतरफा राज किया था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
हालिया डेटा के मुताबिक, साल 2025 में OnePlus India की शिपमेंट में 32% (साइबरमीडिया रिसर्च) से लेकर 38.8% (IDC) तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। खासकर इसके नॉर्ड (Nord) सीरीज वाले मिड-प्रीमियम सेगमेंट में इसे वीवो (Vivo), ओप्पो और मोटोरोला से बेहद कड़ी टक्कर मिल रही है।
हमारा निष्कर्ष (Expert Verdict)
‘खबर आंगन’ की टेक डेस्क का मानना है कि रॉबिन लियू का यूं अचानक पद छोड़ना, विशेष रूप से ओप्पो ग्रुप में उनके कथित डिमोशन की खबरों के बीच, यह साफ दर्शाता है कि कंपनी के इंटरनल स्ट्रक्चर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भारत जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण मार्केट में 38% से ज्यादा की सेल्स गिरना एक खतरे की घंटी है।
नए सीईओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती वनप्लस की खोई हुई चमक को वापस लाना और मिड-रेंज मार्केट में मोटोरोला व वीवो के बढ़ते दबदबे को तोड़ना होगा। फिलहाल, ग्राहकों को कंपनी के ऑपरेशंस बंद होने से डरने की जरूरत नहीं है।
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