उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप और अपनी टीम का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा कि यह एक ‘अल्पविराम’ है, पूर्णविराम नहीं। उनके इस ट्वीट के बाद से ही सोशल मीडिया पर #SaurabhDwivedi और #Lallantop ट्रेंड कर रहा है।
क्यों छोड़ा अपना ही बनाया ‘लल्लनटॉप’?
सूत्रों के मुताबिक, सौरभ द्विवेदी पिछले 12 सालों से इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े थे। इस्तीफे की कोई एक ठोस वजह आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई है, लेकिन कली पुरी के मेल में संकेत मिले हैं।
कली पुरी ने लिखा, “सौरभ अपनी रचनात्मक ऊर्जा (Creative Energy) का इस्तेमाल अब उन माध्यमों में करना चाहते हैं जो फिलहाल इंडिया टुडे के पोर्टफोलियो से बाहर हैं।”
बाजार में चर्चा है कि सौरभ अब:
- फिल्म स्क्रिप्ट राइटिंग या बॉलीवुड में कदम रख सकते हैं।
- अपना खुद का इंडिपेंडेंट मीडिया वेंचर शुरू कर सकते हैं (जैसे रवीश कुमार या अभिसार शर्मा)।
- किसी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए डॉक्यूमेंट्री सीरीज बना सकते हैं।
अब कौन संभालेगा ‘लल्लनटॉप’ की कमान?
सौरभ के जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि लल्लनटॉप का चेहरा कौन होगा? इंडिया टुडे ग्रुप ने तुरंत नई लीडरशिप की घोषणा कर दी है।
लल्लनटॉप की जिम्मेदारी अब दो पुराने साथियों के कंधों पर होगी:
- कुलदीप मिश्रा (Kuldeep Mishra): इन्हें संपादकीय (Editorial) जिम्मेदारी दी गई है। कुलदीप शुरू से ही लल्लनटॉप की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं और ‘नेतानीगरी’ शो के लिए जाने जाते हैं।
- रजत सेन (Rajat Sain): ये प्रोडक्शन और ऑपरेशन्स की कमान संभालेंगे।
आखिरी शो और विवाद
दिलचस्प बात यह है कि सौरभ का आखिरी शो (2 जनवरी 2026) काफी आक्रामक था। उन्होंने मध्य प्रदेश (इंदौर) में दूषित पानी से हुई मौतों पर सरकार से तीखे सवाल पूछे थे।
कुछ आलोचक उनके इस्तीफे को राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है। सौरभ ने अपने फेयरवेल नोट में सिर्फ ‘मान, पहचान और ज्ञान’ के लिए आभार जताया है।
ओराई से दिल्ली तक का सफर: एक फ्लैशबैक
Saurabh Dwivedi का सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा रहा है:
- शुरुआत: यूपी के जालौन (ओराई) से निकले। जेएनयू (JNU) और आईआईएमसी (IIMC) से पढ़ाई की।
- करियर: दैनिक भास्कर, स्टार न्यूज और आज तक में काम किया।
- द लल्लनटॉप: 2016 में इंडिया टुडे के तहत इसे शुरू किया। ‘किताबवाला’, ‘नेतानीगरी’ और ‘बैठकी’ जैसे शोज ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया।
आज जब वे जा रहे हैं, तो लल्लनटॉप के पास 3.5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स और एक वफादार ऑडियंस बेस है।
हमारा निष्कर्ष (Editor’s Take)
सौरभ द्विवेदी का जाना यह साबित करता है कि व्यक्ति संस्था से बड़ा नहीं होता, लेकिन यह भी सच है कि कुछ व्यक्ति संस्था की पहचान बन जाते हैं। ‘लल्लनटॉप’ अब सौरभ के बिना कैसा होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
क्या कुलदीप मिश्रा दर्शकों के साथ वही ‘कनेक्ट’ बना पाएंगे जो सौरभ का था? या फिर सौरभ द्विवेदी जल्द ही किसी नए अवतार में हमें “नमस्ते, मैं सौरभ हूं…” कहते हुए मिलेंगे? इसका जवाब 2026 के गर्भ में छिपा है।
Disclaimer: इस खबर की पुष्टि ‘खबर आंगन’ की फैक्ट-चेक टीम ने सौरभ द्विवेदी के आधिकारिक ट्वीट (5 जनवरी 2026) और इंडिया टुडे ग्रुप के इंटरनल सर्कुलर के आधार पर की है।