बीएमसी चुनाव (BMC Election 2026) के नतीजों से ठीक पहले एक Viral Video ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया पर एक क्लिप जंगल की आग की तरह फैल रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि वोट डालने के बाद उंगली पर लगाई गई ‘अमिट स्याही’ (Indelible Ink) को नेल पॉलिश रिमूवर या थूक से आसानी से मिटाया जा सकता है।
विपक्ष ने इसे ‘वोट की चोरी’ का सबूत बताया है, जबकि चुनाव आयोग (SEC) ने इसे खारिज करते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। ‘खबर आंगन’ की फैक्ट-चेक टीम ने इस वायरल दावे की पड़ताल की है।
15 जनवरी को वोटिंग के दौरान और आज सुबह से एक्स (Twitter) और व्हाट्सएप पर कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं।
दृश्य: एक वोटर अपनी तर्जनी उंगली (Index Finger) पर लगी ताजी स्याही को नेल पॉलिश रिमूवर (Acetone) या सैनिटाइजर से रगड़ता है और कुछ ही सेकंड में स्याही का निशान गायब हो जाता है।
दावा: वीडियो बनाने वाले का कहना है कि यह “फेक इंक” है ताकि लोग दोबारा वोट डाल सकें (Bogus Voting)।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ और शिवसेना (UBT) के नेताओं ने भी ऐसे ही वीडियो शेयर करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
विवाद बढ़ता देख राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी है।
सच्चाई: आयोग का कहना है कि 2011 के आदेश के बाद से अब ब्रश की जगह ‘मार्कर पेन’ का इस्तेमाल होता है। यह स्याही सूखने में 10-15 सेकंड लेती है।
केमिकल लोचा: अगर कोई स्याही लगाने के तुरंत बाद (सूखने से पहले) एसीटोन या थिनर लगाता है, तो वह हल्की पड़ सकती है, लेकिन पूरी तरह नहीं मिटती। त्वचा पर सिल्वर नाइट्रेट का दाग रह ही जाता है।
चेतावनी: आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्याही मिटाने की कोशिश करना भी जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अपराध है और ऐसा करने वालों पर FIR दर्ज की जाएगी।
विपक्ष का आरोप: ‘मार्कर पेन’ क्यों?
उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि पारंपरिक ‘मैसूर पेंट्स’ वाली शीशी और ब्रश की जगह इस बार ‘मार्कर पेन’ का इस्तेमाल क्यों किया गया? उनका दावा है कि मार्कर की गुणवत्ता खराब थी, जिससे बोगस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है।
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हमारा निष्कर्ष (Fact Check Verdict)
हमारी पड़ताल में पाया गया कि स्याही मिटाने के दावे आंशिक रूप से सही हो सकते हैं अगर स्याही गीली हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई दोबारा वोट डाल सकता है। पोलिंग बूथ पर फोटो आईडी, वेबकास्टिंग और ईवीएम का रिकॉर्ड होता है। सिर्फ स्याही मिटाकर दोबारा वोट डालना संभव नहीं है। यह वीडियो राजनीतिक नरेटिव सेट करने के लिए ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है।
Disclaimer: इस खबर में प्रयुक्त तथ्य चुनाव आयोग के आधिकारिक बयान (16 जनवरी 2026) और वायरल वीडियो के विश्लेषण पर आधारित हैं। हम किसी भी तरह की अफवाहों का समर्थन नहीं करते।
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