रत्नागिरी | 19 मार्च 2026: अंडरवर्ल्ड डॉन और 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों के मास्टरमाइंड Dawood Ibrahim के खिलाफ भारत सरकार का शिकंजा और अधिक कस गया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित दाऊद की चार पुश्तैनी संपत्तियों को आखिरकार एक नया खरीदार मिल गया है।
सालों से चली आ रही कोशिशों और चार बार की नाकाम नीलामियों के बाद, इस बार मुंबई के एक खरीदार ने हिम्मत दिखाते हुए इन सभी भूखंडों (Plots) पर कब्जा जमा लिया है।
4 नाकाम कोशिशों के बाद मिली सफलता
Dawood Ibrahim से जुड़ी संपत्तियों को खरीदना कभी भी आसान नहीं रहा है। डी-कंपनी के खौफ और कानूनी उलझनों के कारण पिछले कई सालों से इन जमीनों के लिए कोई खरीदार सामने नहीं आ रहा था।
सरकार ने इससे पहले 2017, 2020, 2024 और नवंबर 2025 में भी इन संपत्तियों को नीलाम करने की कोशिश की थी, लेकिन तब या तो कोई बोली लगाने वाला नहीं मिला या फिर बोली की रकम जमा नहीं हो सकी।
दिसंबर 2025 की नीलामी में तो पहली बार ऐसा हुआ था कि एक भी व्यक्ति ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन 5 मार्च 2026 को केंद्र सरकार द्वारा आयोजित इस ताज़ा नीलामी में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और सभी चार कृषि भूखंडों (Agricultural Plots) का सफलतापूर्वक सौदा हो गया।
ये सभी चारों संपत्तियां रत्नागिरी जिले के खेड़ तालुका स्थित मुम्बके (Mumbake) गांव में स्थित हैं। यही वह गांव है जहां Dawood Ibrahim और उसकी बहन हसीना पारकर का बचपन बीता था।
1970 के दशक के उत्तरार्ध में मुंबई शिफ्ट होने से पहले दाऊद का परिवार यहीं रहता था। जब्त की गई ये सभी जमीनें सरकारी दस्तावेजों में दाऊद की मां ‘अमीना बी’ और हसीना पारकर के नाम पर दर्ज थीं।
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इन संपत्तियों को 1990 के दशक में ही अपराध और तस्करी के नेटवर्क से जुड़ी होने के कारण ‘स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (फॉरफीचर ऑफ प्रॉपर्टी) एक्ट’ (SAFEMA) के तहत जब्त कर लिया गया था।
मुंबई के खरीदार ने लगाई 10 लाख से ज्यादा की बोली
नीलामी के दौरान सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र सर्वे नंबर 442 (हिस्सा नंबर 13-B) वाला प्लॉट रहा। इस एक अकेले प्लॉट के लिए मुंबई और रत्नागिरी के दो बोलीदाताओं के बीच मुकाबला हुआ।
प्लॉट 442: इसकी रिजर्व कीमत 9.41 लाख रुपये थी, लेकिन मुंबई के एक शख्स ने 10 लाख रुपये से अधिक की बोली लगाकर इसे हासिल कर लिया।
बाकी तीन प्लॉट: सर्वे नंबर 533, 453 और 617 के लिए केवल एक ही खरीदार (मुंबई वाला) सामने आया। उसने इन तीनों को इनकी रिजर्व कीमत (क्रमशः 2.33 लाख, 8.08 लाख और 15,440 रुपये) पर ही खरीद लिया।
विशेष रूप से, सर्वे नंबर 617 (मात्र 171 वर्ग मीटर) के लिए 2024 की नीलामी में दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव ने 2.01 करोड़ की भारी बोली लगाई थी, जिसे बाद में तकनीकी कारणों से रद्द कर दिया गया था। इस बार यह अपने मूल रिजर्व प्राइस पर ही बिका।
पहचान क्यों रखी गई है गुप्त?
भले ही दाऊद इब्राहिम सालों से पाकिस्तान में छिपा बैठा है, लेकिन भारत में उसके नेटवर्क और गुर्गों का डर आज भी कुछ लोगों के मन में बना हुआ है।
इसी सुरक्षा खतरे को देखते हुए, सरकार और SAFEMA अधिकारियों ने फिलहाल मुंबई के उस सफल खरीदार की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया है।
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अतीत में दाऊद की संपत्तियां खरीदने वाले कई लोगों को धमकियां मिल चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा कारणों से यह गोपनीयता बरती जा रही है। सफल बोली लगाने वाले को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी रकम जमा करनी होगी, जिसके बाद उसे जमीन का कब्जा सौंप दिया जाएगा।
कानून का डंडा और जब्त होती संपत्तियां
यह नीलामी भारत सरकार के उस स्पष्ट संदेश का हिस्सा है कि अपराध से बनाई गई किसी भी संपत्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साल 2017 से अब तक दाऊद और हसीना पारकर की लगभग 17 संपत्तियों को नीलाम किया जा चुका है।
इसमें भिंडी बाजार के तीन बड़े अपार्टमेंट्स और पाकमोडिया स्ट्रीट का मशहूर रेस्टोरेंट ‘दिल्ली जायका’ भी शामिल है। अजय श्रीवास्तव जैसे वकीलों ने भी पहले दाऊद का पैतृक बंगला और दुकानें खरीदी थीं, जहां उन्होंने अब सनातन पाठशाला चलाने का संकल्प लिया है।
इन संपत्तियों की बिक्री से होने वाली आय सीधे सरकारी खजाने में जाती है। दाऊद इब्राहिम, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने ‘ग्लोबल टेररिस्ट’ घोषित किया है, उसके प्रभाव को आर्थिक रूप से खत्म करने के लिए सरकार की यह बड़ी जीत मानी जा रही है।
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