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सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है! परिसीमन बिल पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का बड़ा और तीखा हमला

सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है! परिसीमन बिल पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का बड़ा और तीखा हमला

Khabar Aangan Published on: 16 अप्रैल 2026
सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है! परिसीमन बिल पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का बड़ा और तीखा हमला
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नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2026: भारतीय राजनीति में इन दिनों लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर एक बहुत ही बड़ी और तीखी बहस छिड़ गई है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एक बेहद तीखा और आक्रामक राजनीतिक हमला बोला है। यह मुद्दा अब एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का रूप लेता जा रहा है।

‘खबर आंगन’ की पॉलिटिकल डेस्क के अनुसार कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार के नए कदम को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि सरकार की असल मंशा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करना है। वेणुगोपाल का यह बेबाक बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में इस बिल के प्रारूप को लेकर भारी राजनीतिक खींचतान लगातार मची हुई है।

सरकार पर संविधान को हाईजैक करने का बेहद गंभीर आरोप

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा प्रहार किया है। उनका साफ तौर पर कहना है कि वर्तमान सत्ताधारी दल इस नए बिल के बहाने भारत के मूल संविधान को ही पूरी तरह से हाईजैक करना चाहता है। यह लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़े खतरे की घंटी है।

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विपक्षी नेता के अनुसार सरकार बिना किसी आम सहमति और उचित चर्चा के इस बेहद संवेदनशील बिल को जबरन संसद में थोपना चाहती है। उनका मानना है कि संविधान निर्माताओं ने हर राज्य को समान अधिकार दिए थे लेकिन यह नया परिसीमन बिल उस मूल भावना को ही पूरी तरह से खत्म कर देगा और राज्यों के अधिकार पूरी तरह छीन लेगा।

परिसीमन को लेकर विपक्ष की कुछ मुख्य और बड़ी चिंताएं

विपक्ष का स्पष्ट रूप से मानना है कि सीटों के परिसीमन की पूरी प्रक्रिया हमेशा पारदर्शी और सभी राज्यों की सहमति से ही होनी चाहिए। सरकार जिस तरह से इस पूरी प्रक्रिया को अकेले आगे बढ़ा रही है उसे लेकर विपक्ष ने मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर चिंताएं पूरे देश के सामने रखी हैं:

  • जनसंख्या नियंत्रण में शानदार काम करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों को संसद में अपनी सीटों के भारी नुकसान का सबसे ज्यादा और गहरा डर सता रहा है।
  • विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल अपनी राजनीतिक सुविधा और बड़े चुनावी फायदे के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में मनमाना और असंवैधानिक बदलाव कर सकता है।
  • परिसीमन आयोग में सभी राजनीतिक दलों और क्षेत्रीय क्षत्रपों को उचित और समान प्रतिनिधित्व न मिलने से भी विपक्षी खेमे में भारी असंतोष और गुस्सा पनप रहा है।

जल्दबाजी में बिल पास कराने की मंशा पर खड़े हो रहे हैं सवाल

विपक्ष के कई बड़े नेताओं का लगातार कहना है कि इतने महत्वपूर्ण और देश के भविष्य को तय करने वाले बिल को इतनी भारी जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए। इस नए परिसीमन बिल का सीधा और गहरा असर आने वाले कई दशकों तक देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संसद के बुनियादी ढांचे पर बहुत गहराई से पड़ने वाला है।

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