नई दिल्ली | 06 जनवरी 2026:
आज देशभर में सकट चौथ (Sakat Chauth) का पावन पर्व मनाया जा रहा है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस त्योहार को तिलकुटा चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी और माघी चौथ भी कहा जाता है।
यह व्रत माताओं के लिए सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उज्ज्वल भविष्य के लिए आज के दिन निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, Sakat Chauth Vrat Katha सुने या पढ़े बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।
‘खबर आंगन’ के पाठकों के लिए हम लेकर आए हैं सकट चौथ की वह पौराणिक और प्रचलित कथाएं, जिन्हें पढ़ने मात्र से विघ्नहर्ता गणेश सभी संकट हर लेते हैं।
पहली कथा: कुम्हार और बुढ़िया की कहानी (सबसे प्रचलित)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन पकाने के लिए आंवा (भट्टा) लगाया, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद आंवा नहीं पका। परेशान होकर वह राजा के पास गया।
