नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो यानी IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। कड़कड़डूमा कोर्ट से मिली उम्रकैद की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए ताहिर हुसैन ने अपनी अपील दाखिल की है। निचली अदालत ने जुलाई 2026 में ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह की अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 31 जुलाई को ताहिर हुसैन, जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। अब ताहिर हुसैन ने इसी दोषसिद्धि और सजा को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
सजा सुनाते समय ट्रायल कोर्ट ने घटना की गंभीरता पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत के मुताबिक हत्या उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान की गई और घटना को बेहद क्रूर तरीके से अंजाम दिया गया। अदालत ने यह भी कहा था कि अंकित शर्मा के शव को चांदबाग पुलिया तक घसीटकर ले जाया गया और बाद में नाले में फेंक दिया गया। हालांकि मौत की सजा की मांग पर अदालत ने अभियोजन के सामने मौजूद तथ्यों का भी परीक्षण किया था।
ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ऐसा ठोस तथ्य रिकॉर्ड पर नहीं ला सका, जिससे यह साबित हो कि पांचों दोषियों में पहले से हिंसक अपराध करने की प्रवृत्ति थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उनके खिलाफ पहले किसी आपराधिक मामले में शामिल होने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इसी आधार पर मौत की सजा के बजाय उम्रकैद को उचित माना गया।
मामले की FIR अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दर्ज हुई थी। दंगों के दौरान अंकित शर्मा के घर नहीं लौटने पर परिवार ने उनकी तलाश शुरू की थी। इसके बाद उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ और GTB अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अभियोजन के अनुसार, घटना वाले दिन अंकित शाम करीब पांच बजे घरेलू जरूरत का सामान खरीदने के लिए घर से निकले थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार सिर, चेहरे, सीने, पीठ और कमर समेत शरीर के कई हिस्सों पर चोटें थीं। इनमें धारदार हथियार और किसी भारी या कुंद वस्तु से लगी चोटों का भी उल्लेख किया गया। अंकित के पिता ने FIR में ताहिर हुसैन और उसके साथियों पर हत्या का संदेह जताया था। जांच के बाद पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया।
मार्च 2023 में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147, 148, 153ए, 302, 365, 120बी, 149 और 188 समेत कई धाराएं लगाई गई थीं। ताहिर हुसैन के खिलाफ IPC की धाराओं 505, 109 और 114 के तहत अतिरिक्त आरोप भी लगाए गए थे। आरोपी नाजिम के खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत भी अतिरिक्त आरोप तय हुआ था।
ताहिर हुसैन की अपील में निचली अदालत के फैसले की वैधता और उनके खिलाफ दर्ज निष्कर्षों को चुनौती दी गई है। फिलहाल हाईकोर्ट के सामने यही अपील है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर पुनर्विचार किया जाए। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हाईकोर्ट ने सजा रद्द कर दी है या ताहिर हुसैन को राहत मिल गई है। फिलहाल उन्होंने केवल निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कानूनी चुनौती दी है।
इस मामले में आगे हाईकोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। निचली अदालत के फैसले में दर्ज निष्कर्षों, उपलब्ध साक्ष्यों और ताहिर हुसैन की अपील में उठाई गई दलीलों के आधार पर अदालत आगे मामले पर विचार करेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार ताहिर हुसैन की उम्रकैद बरकरार है और उन्होंने उसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है।
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