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Zubeen Garg Death Case: असम के रॉकस्टार की मौत मामले में सबसे बड़ा खुलासा, मैनेजर समेत 4 पर हत्या का आरोप, SIT ने दाखिल की चार्जशीट

असम के दिग्गज गायक Zubeen Garg की मौत मामले में SIT ने 4 लोगों के खिलाफ हत्या की चार्जशीट दाखिल की है। जिसे हादसा समझा जा रहा था, वह साजिश निकली। पढ़ें आज का सबसे बड़ा खुलासा।
Khabar Aangan Friday, 12 December 2025, 05:42 PM
Zubeen Garg Death Case: असम के रॉकस्टार की मौत मामले में सबसे बड़ा खुलासा, मैनेजर समेत 4 पर हत्या का आरोप, SIT ने दाखिल की चार्जशीट
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असम की संस्कृति और संगीत की दुनिया में आज का दिन बेहद भावुक और महत्वपूर्ण है। Zubeen Garg की रहस्यमयी मौत के मामले में आज वो घड़ी आ गई है जिसका इंतजार उनके लाखों फैंस कर रहे थे। गुवाहाटी में असम पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने आज, यानी 12 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सबको चौंका कर रख दिया है। पुलिस ने इसे महज एक हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश और हत्या करार दिया है।

पिछले तीन महीनों से Zubeen Garg के चाहने वाले इस सवाल का जवाब मांग रहे थे कि आखिर सिंगापुर में उस दिन क्या हुआ था। आज एसआईटी द्वारा दाखिल की गई 3,500 पन्नों की चार्जशीट ने उस काले सच से पर्दा उठा दिया है। जांच एजेंसी ने सिंगापुर इवेंट के आयोजक और जुबीन के मैनेजर समेत चार लोगों पर हत्या का औपचारिक आरोप लगाया है। यह खबर सामने आते ही पूरे पूर्वोत्तर भारत में सनसनी फैल गई है। सोशल मीडिया पर #JusticeForZubeen एक बार फिर ट्रेंड करने लगा है।

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यह मामला केवल एक सेलिब्रिटी की मौत का नहीं, बल्कि विश्वासघात का भी है। जिन लोगों पर Zubeen Garg सबसे ज्यादा भरोसा करते थे, वही अब उनकी मौत के आरोपी बनकर सामने आए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया था और अब पुलिस की जांच ने उनके दावों की पुष्टि कर दी है। आइए जानते हैं कि आज कोर्ट में क्या-क्या हुआ और चार्जशीट में किन लोगों के नाम शामिल हैं।

3500 पन्नों की चार्जशीट और हत्या की धारा 103

असम पुलिस की सीआईडी के नेतृत्व वाली एसआईटी ने आज गुवाहाटी कोर्ट में एक भारी-भरकम चार्जशीट पेश की। सूत्रों के मुताबिक, इस चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत आरोप लगाए गए हैं। पहले इस मामले को लापरवाही से हुई मौत के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर इसे हत्या की धारा में बदल दिया गया।

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एसआईटी ने अपनी जांच में 300 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इसमें सिंगापुर पुलिस की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है। Zubeen Garg की मौत के परिस्थितियों को रिक्रिएट करने के लिए फोरेंसिक टीम ने कड़ी मेहनत की थी। चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपियों ने जुबीन की सुरक्षा में जानबूझकर कोताही बरती और साजिश रची।

पुलिस का कहना है कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और परिस्थितिजन्य सबूत मौजूद हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब ट्रायल शुरू होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह केस असम के इतिहास का सबसे हाई-प्रोफाइल मर्डर ट्रायल साबित होने वाला है।

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कौन हैं वो 4 आरोपी जिन पर लगा हत्या का इल्जाम?

एसआईटी ने जिन चार लोगों को Zubeen Garg की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया है, वे कोई और नहीं बल्कि उनके बेहद करीबी लोग हैं। मुख्य आरोपियों में ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ के आयोजक श्यामकानु महंत (Shyamkanu Mahanta) का नाम सबसे ऊपर है। यह वही फेस्टिवल था जिसमें शामिल होने के लिए जुबीन सिंगापुर गए थे।

दूसरे नंबर पर जुबीन के अपने मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा (Siddhartha Sharma) का नाम है। एक कलाकार के लिए उसका मैनेजर साये की तरह होता है, लेकिन यहां रक्षक ही भक्षक बन गया। इसके अलावा, जुबीन के बैंड के सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृतप्रभा महंत पर भी हत्या के आरोप लगे हैं। ये सभी लोग उस वक्त जुबीन के साथ मौजूद थे जब यह घटना घटी।

इसके अलावा, Zubeen Garg के चचेरे भाई और सस्पेंडेड पुलिस अधिकारी संदीपान गर्ग पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का मानना है कि इन सभी की मिलीभगत से ही असम के इस चमकते सितारे की जान गई।

19 सितंबर की वो काली शाम और सिंगापुर का सच

यह पूरा मामला 19 सितंबर 2025 की उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जब Zubeen Garg सिंगापुर में एक याॉट ट्रिप के दौरान समुद्र में स्विमिंग के लिए उतरे थे। उस समय खबर आई थी कि डूबने से उनकी मौत हो गई। लेकिन परिवार और फैंस को शुरू से ही इस थ्योरी पर शक था।

जांच में सामने आया है कि Zubeen Garg को लाइफ जैकेट पहनने के लिए चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इसे उतार दिया था। हालांकि, एसआईटी की जांच यह इशारा करती है कि उन्हें ऐसी स्थिति में जानबूझकर डाला गया जहां वे बच न सकें। क्या उन्हें नशीला पदार्थ दिया गया था? या फिर मदद करने में देरी की गई? चार्जशीट में इन सभी सवालों के जवाब मौजूद हैं।

सिंगापुर पुलिस ने शुरुआत में इसे हादसा माना था, लेकिन असम सरकार के दबाव और एसआईटी की जांच ने मामले की दिशा बदल दी। आज का दिन यह साबित करता है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, चाहे अपराध देश की सीमा के बाहर ही क्यों न हुआ हो।

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बयान हुआ सच

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान एक चौंकाने वाला बयान दिया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि Zubeen Garg की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि “साफ तौर पर हत्या” (Plain and Simple Murder) है। आज एसआईटी की चार्जशीट ने मुख्यमंत्री के उस दावे पर कानूनी मुहर लगा दी है।

मुख्यमंत्री ने जनता को भरोसा दिलाया था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए स्पेशल डीजीपी मुन्ना प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। सरकार की इस सक्रियता ने ही आज पीड़ित परिवार को इंसाफ की उम्मीद दी है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस चार्जशीट की चर्चा है। विपक्षी दलों ने भी मांग की थी कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। अब जब आरोप तय हो गए हैं, तो सभी की निगाहें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं।

फैंस के दिलों में आज भी जिंदा हैं ‘या अली’ सिंगर

Zubeen Garg सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक इमोशन थे। ‘या अली’ गाने से पूरे देश में छा जाने वाले जुबीन ने असमिया संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई। उनकी मौत के बाद से ही असम में शोक की लहर है। आज भी उनके फैंस मानने को तैयार नहीं हैं कि उनका चहेता स्टार अब उनके बीच नहीं है।

गुवाहाटी कोर्ट के बाहर आज भारी भीड़ जमा थी। फैंस हाथों में पोस्टर लेकर “Justice for Zubeen” के नारे लगा रहे थे। उनका कहना है कि जो भी Zubeen Garg की मौत का जिम्मेदार है, उसे फांसी की सजा होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर भी फैंस अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं।

कॉटन यूनिवर्सिटी ने हाल ही में उन्हें मरणोपरांत ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ (D.Litt) की उपाधि से सम्मानित किया था। उनकी बहन डॉ. पालमी बोरठाकुर ने यह सम्मान ग्रहण किया था। परिवार ने भी आज की कार्रवाई पर संतोष जताया है और न्यायपालिका पर भरोसा दिखाया है।

आगे क्या होगा? कानूनी प्रक्रिया

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब कोर्ट आरोपियों को समन भेजेगा और ट्रायल शुरू होगा। चूंकि आरोपी पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए अब गवाहों की पेशी का दौर शुरू होगा। Zubeen Garg केस में परिस्थितिजन्य साक्ष्य बहुत अहम भूमिका निभाएंगे।

बचाव पक्ष के वकील भी अपनी तैयारी में जुटे हैं। लेकिन पुलिस का दावा है कि उनके पास हत्या साबित करने के लिए ठोस सबूत हैं। आने वाले दिनों में कोर्ट में होने वाली जिरह काफी दिलचस्प होगी।

यह केस हमें यह भी सिखाता है कि सफलता के शिखर पर भी इंसान को अपने आसपास के लोगों से सतर्क रहना चाहिए। Zubeen Garg की आवाज खामोश हो गई है, लेकिन इंसाफ की गूंज अब अदालत में सुनाई देगी।

निष्कर्ष

Zubeen Garg की मौत का रहस्य अब सुलझने की कगार पर है। एसआईटी की चार्जशीट ने यह साफ कर दिया है कि जिसे दुनिया हादसा समझ रही थी, वह असल में एक गहरा षड्यंत्र था। आज का दिन असम के इतिहास में न्याय के दिन के रूप में याद किया जाएगा। हम उम्मीद करते हैं कि अदालत जल्द से जल्द फैसला सुनाएगी और दिवंगत आत्मा को शांति मिलेगी।

Related Disclaimerयह लेख पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। Zubeen Garg की मृत्यु से जुड़ी यह जानकारी 12 दिसंबर 2025 तक की जांच रिपोर्ट के अनुसार है। मामला अभी न्यायालय के अधीन है। हम निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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