बिहार के दरभंगा जिले के लिए विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। उत्तर बिहार के ‘एम्स’ (AIIMS) को विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी देने के लिए जिस महा-प्रोजेक्ट का इंतजार वर्षों से हो रहा था, वह अब धरातल पर उतर चुका है। दरभंगा के एकमी-शोभन बाईपास को फोरलेन में तब्दील करने का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है।
इस Darbhanga AIIMS Connectivity प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल अस्पताल पहुंचना आसान होगा, बल्कि दरभंगा शहर को दशकों पुराने ‘जाम’ के कलंक से भी मुक्ति मिलेगी। ₹338 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने मिथिलांचल के विकास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। ‘खबर आंगन’ की विशेष रिपोर्ट में जानिए इस फोरलेन प्रोजेक्ट की हर एक बारीकी और इससे होने वाले बड़े बदलावों के बारे में।
सीएम नीतीश का वादा हुआ पूरा: शोभन में बना बेस कैंप
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समाधान यात्रा’ के दौरान दरभंगा की जनता से यह वादा किया था कि एम्स तक पहुंचने वाला रास्ता किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के हाईवे से कम नहीं होगा। अब वह वादा हकीकत बनता दिख रहा है।
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श्री राम कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने एम्स स्थल से महज एक किलोमीटर दूर शोभन के पास अपना विशाल बेस कैंप स्थापित कर लिया है।
वर्तमान में कैंप की तैयारी और मशीनों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, होली के ठीक बाद निर्माण कार्य पूरी रफ्तार पकड़ लेगा। इस Darbhanga AIIMS Connectivity के तहत एकमी घाट के पास एक नए और आधुनिक पुल का निर्माण कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है, जो इस पूरी परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
11 किलोमीटर का सफर, 93 एकड़ जमीन और ₹338 करोड़ का बजट
यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि दरभंगा के लिए एक आर्थिक गलियारा (Economic Corridor) साबित होने वाली है। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट के मुख्य तकनीकी पहलू:
कुल लंबाई: एकमी चौक से लेकर शोभन तक यह फोरलेन सड़क लगभग 11 किलोमीटर लंबी होगी।
भूमि अधिग्रहण: इस चौड़ीकरण के लिए 14 अलग-अलग मौजों से करीब 93 एकड़ जमीन का सफलतापूर्वक अधिग्रहण किया जा चुका है।
लागत: पूरे प्रोजेक्ट पर बिहार सरकार और सड़क निर्माण विभाग लगभग ₹338 करोड़ खर्च कर रहा है।
प्रशासन ने जमीन मालिकों को मुआवजे की प्रक्रिया भी तेज कर दी है, ताकि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन न आए। इस सड़क के फोरलेन होने से दरभंगा का पश्चिमी छोर सीधे नेशनल हाईवे से जुड़ जाएगा, जिससे बाहरी जिलों से आने वाले मरीजों को शहर की संकरी गलियों में नहीं फंसना पड़ेगा।
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जाम से मिलेगी मुक्ति: दरभंगा शहर लेगा राहत की सांस
दरभंगा शहर की सबसे बड़ी समस्या ‘ट्रैफिक जाम’ है। वर्तमान में लहरियासराय और दरभंगा टाउन की सड़कें वाहनों के बढ़ते दबाव को झेलने में सक्षम नहीं हैं। जब एम्स जैसे बड़े अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचेंगे, तो शहर की स्थिति बदतर हो सकती थी।
लेकिन इस Darbhanga AIIMS Connectivity बाईपास के तैयार हो जाने के बाद, समस्तीपुर, मधुबनी और सहरसा की तरफ से आने वाले वाहन शहर में प्रवेश किए बिना ही सीधे शोभन एम्स तक पहुंच सकेंगे। इससे समय और ईंधन की तो बचत होगी ही, साथ ही शहर के आंतरिक हिस्सों में रहने वाले लोगों को भी खुली सड़कों का अनुभव मिलेगा।
व्यापार और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा उछाल
सड़क के दोनों ओर फोरलेन के निर्माण से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी पंख लगेंगे। जानकारों का मानना है कि एकमी से शोभन के बीच की जमीन की कीमतें रातों-रात आसमान छूने वाली हैं। यहाँ नए अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट और मेडिकल स्टोर्स का जाल बिछेगा, जिससे हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
इस कनेक्टिविटी से मिथिलांचल का मखाना और अन्य स्थानीय उत्पाद भी तेजी से मुख्य बाजारों तक पहुंच सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जब तक एम्स की मुख्य बिल्डिंग बनकर तैयार हो, तब तक यह फोरलेन कनेक्टिविटी भी पूरी तरह से फंक्शनल हो जाए।
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हमारा निष्कर्ष
एकमी-शोभन फोरलेन का निर्माण शुरू होना दरभंगा के लिए एक बड़ी जीत है। बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का यह विकास ही आने वाले समय में दरभंगा को बिहार का दूसरा सबसे बड़ा मेडिकल और कमर्शियल हब बनाएगा।
हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण की गुणवत्ता (Quality Control) के साथ कोई समझौता न हो और प्रोजेक्ट अपनी डेडलाइन के भीतर पूरा हो। ‘खबर आंगन’ इस प्रोजेक्ट की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।
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