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Darbhanga Sadar: सरकारी फाइलों में दबा 8 साल पुराना आदेश, रानीपुर में सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण बरकरार

दरभंगा के रानीपुर में सरकारी रास्ते पर कब्जा! Darbhanga Sadar अंचल प्रशासन की बड़ी लापरवाही आई सामने। 8 साल पहले मिला था आदेश, पर आज भी बाधित है आम रास्ता।
Khabar Aangan Saturday, 28 February 2026, 05:42 PM
Darbhanga Sadar: सरकारी फाइलों में दबा 8 साल पुराना आदेश, रानीपुर में सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण बरकरार
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दरभंगा | 28 फरवरी 2026:

बिहार के दरभंगा जिले में सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों पर भू-माफियाओं का कब्जा कोई नई बात नहीं है, लेकिन दरभंगा सदर अंचल की कार्यशैली ने एक बार फिर ‘सुशासन’ के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मामला सदर अंचल के रानीपुर मौजा का है, जहाँ एक सार्वजनिक रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश पिछले 8 सालों से अंचल कार्यालय की फाइलों में धूल फांक रहा है।

राजस्व अभिलेखों में जिसे “अनाबाद सर्वसाधारण” यानी आम जनता का रास्ता दर्ज किया गया है, उसे दबंगों के चंगुल से छुड़ाने में प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं। ‘खबर आंगन’ की विशेष पड़ताल में यह बात सामने आई है कि द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा साल 2017 में ही सख्त आदेश पारित किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।

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रानीपुर का मामला: क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद दरभंगा सदर अंचल के अंतर्गत आने वाले मौजा रानीपुर (थाना संख्या 515) से संबंधित है। विवादित भूमि का विवरण खाता संख्या 258, खेसरा संख्या 683 (नया) और 398 (पुराना) है। सरकारी कागजों के अनुसार, यह भूमि पूरी तरह से सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज है, जिसका उपयोग पूरे समुदाय के लिए अनिवार्य है।

साल 2016-17 में इसे लेकर अतिक्रमण वाद संख्या 06/16-17 दायर किया गया था। मामला जब द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी, दरभंगा के पास पहुँचा, तो उन्होंने 2017 में ही अंचल अधिकारी (CO) को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मूल अभिलेखों का सत्यापन कर इस भूमि को तुरंत अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। लेकिन आदेश के 9 साल बीत जाने के बाद भी अंचल प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है।

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अंचल प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों के बीच अब अंचल कार्यालय की साख को लेकर कई तीखे सवाल तैर रहे हैं। लोग यह पूछने पर मजबूर हैं कि आखिर उच्च अधिकारियों के आदेश का पालन करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

  1. फाइलों में कैद रिपोर्ट: क्या अतिक्रमण वाद का पूर्ण निष्पादन (Execution) कभी हुआ भी या सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई?
  2. स्थल निरीक्षण का सच: क्या अंचल अमीन या राजस्व कर्मचारी ने कभी मौके पर जाकर वास्तविक रिपोर्ट तैयार की?
  3. दबंगों का रसूख: क्या किसी खास दबाव या रसूख के कारण “सर्वसाधारण रास्ता” आज भी बाधित है?

इन सवालों का कोई भी स्पष्ट उत्तर अंचल प्रशासन की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश और निराशा का माहौल है।

लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम का मजाक

बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत अंचल अधिकारी को यह वैधानिक जिम्मेदारी दी गई है कि वे किसी भी सार्वजनिक भूमि या रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करें। रानीपुर का यह मामला दिखाता है कि कैसे एक सरकारी तंत्र खुद अपने ही कानूनों और उच्चादेशों का मजाक उड़वा रहा है।

जब एक सार्वजनिक रास्ता बाधित होता है, तो उसका नुकसान केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। बुजुर्गों का टहलना, बच्चों का स्कूल जाना और आपातकाल में एम्बुलेंस का पहुँचना तक दूभर हो जाता है। अंचल प्रशासन की इस ढिलाई ने न केवल कानून की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के मौलिक अधिकारों का भी हनन किया है।

जवाब दे प्रशासन

जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्रवाई चाहती है। Darbhanga Sadar अंचल प्रशासन से हमारी और रानीपुर की जनता की कुछ सीधी अपेक्षाएं हैं:

  • संबंधित विवादित भूमि की वर्तमान स्थिति पर तुरंत एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
  • यदि अतिक्रमण अभी भी शेष है, तो बिना किसी देरी के ‘बुलडोजर’ की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
  • 2017 के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अब सबकी निगाहें सदर अंचल के वर्तमान अंचल अधिकारी पर टिकी हैं। क्या वे 15 साल पुराने इस विवाद का अंत करेंगे या जनता को और कितने साल इंतजार करना होगा?

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट राजस्व अभिलेखों, द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी के 2017 के आदेश और स्थानीय शिकायतों पर आधारित है। ‘खबर आंगन’ सार्वजनिक भूमि के संरक्षण का समर्थन करता है। अंचल प्रशासन का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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