दरभंगा | 19 अप्रैल 2026: बिहार के दरभंगा जिले में पुलिस महकमे को और भी ज्यादा चुस्त और आधुनिक बनाने के लिए एक बहुत ही अहम समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। पुलिस उप महानिरीक्षक मिथिला क्षेत्र ने वरीय पुलिस अधीक्षक की विशेष उपस्थिति में प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षकों के साथ सीधा संवाद किया। यह बैठक पुलिस कार्यालय कक्ष में शनिवार को पूरी गंभीरता के साथ संपन्न हुई।
‘खबर आंगन’ की क्राइम डेस्क के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में दो हजार तेईस बैच के सभी नए और युवा प्रशिक्षु दरोगा शामिल हुए थे। आला अधिकारियों ने इन सभी नए पुलिसकर्मियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण की बहुत ही गहराई से समीक्षा की। इसके साथ ही फील्ड में काम करने के दौरान आने वाली हर छोटी बड़ी चुनौतियों से निपटने के कड़े गुर भी सिखाए गए।
गिरफ्तारी के कड़े नियम और फोरेंसिक जांच की अहमियत
गिरफ्तारी के नियमों को लेकर डीआईजी ने सभी नए पुलिस अधिकारियों को बहुत ही स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी का उचित कारण और ठोस आधार होना सबसे ज्यादा जरूरी है। सात साल से कम सजा वाले अपराधों में पुलिस सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय आरोपी को नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने के लिए बुलाएगी।
गंभीर अपराधों की जांच को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कड़ा निर्देश दिया है कि सात साल से अधिक सजा वाले हर गंभीर कांड में फोरेंसिक टीम का दौरा पूरी तरह से अनिवार्य होना चाहिए। इससे शातिर अपराधियों को अदालत में सख्त से सख्त सजा दिलाना बहुत ही आसान हो जाएगा।

पुलिस अधिकारियों के लिए जारी किए गए मुख्य दिशा निर्देश
आधुनिक पुलिसिंग और थानों के सुचारू संचालन को लेकर डीआईजी ने कई अन्य बेहद महत्वपूर्ण दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। प्रशिक्षण के बाद फील्ड में उतरने वाले इन युवा अधिकारियों को अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी के दौरान इन सभी कड़े नियमों का शत प्रतिशत पालन करना होगा:

