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Dhanbad Kaali Pooja 2025: ईको-फ्रेंडली थीम और भव्य तैयारियों के बीच उमड़ा श्रद्धा और संस्कृति का संगम

धनबाद की काली पूजा 2025 इस बार सिर्फ भव्य नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सांस्कृतिक रंगों का अनोखा संगम बन गई। क्या इस बार की थीम ने बदल दी परंपरा की परिभाषा? जानिए पूरी रिपोर्ट में।
Ravi Prakash Jha Monday, 20 October 2025, 04:23 PM
Dhanbad Kaali Pooja 2025: ईको-फ्रेंडली थीम और भव्य तैयारियों के बीच उमड़ा श्रद्धा और संस्कृति का संगम
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धनबाद में इस बार काली पूजा को लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। दीपावली की रात को मनाई जाने वाली यह पूजा न केवल धार्मिक उत्सव है,बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की मिसाल भी बन गई है। इस वर्ष 20 अक्टूबर को काली पूजा मनाई जाएगी, जिसकी निशीथ काल पूजा रात 11:55 बजे से 12:44 बजे तक निर्धारित है।

Dhanbad kaali pooja

हीरापुर में इको-फ्रेंडली पंडाल आकर्षण का केंद्र

धनबाद के हीरापुर क्षेत्र में श्री श्यामा पूजा समिति अपनी 46वीं वर्षगांठ पर “प्रकृति की रचना” (Creation of Nature) थीम पर भव्य काली पूजा आयोजित कर रही है। यह पूजा इस बार विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण संदेश के साथ इको-फ्रेंडली थीम में की जा रही है। पंडाल की सजावट प्राकृतिक सामग्री जैसे नारियल के छिलके, बांस की लकड़ी, बेल फल, जूट की चटाई, केले के पत्ते और आमला के बीज से की जा रही है। इस पंडाल की अनुमानित लागत लगभग 12 लाख रुपये है जबकि पूरे आयोजन का कुल बजट 20 लाख रुपये तक का है।समिति इस बार पूजा प्रसाद योजना भी चल रही है जिसमें 100 रुपये की सहयोग राशि से भक्त भाग ले सकते हैं और पुरस्कार जीत सकते हैं।

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बंगाल के कारीगर और पारंपरिक आकर्षण

इस वर्ष बंगाल के नदियापुर से आए कारीगर पंडाल निर्माण में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं पूजा के सभी वैदिक अनुष्ठानों के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष पुरोहित बुलाए गए हैं। ढोल-ढाक की पारंपरिक धुनों के लिए रामगढ़ से कलाकारों को आमंत्रित किया गया है, जो पूजा का माहौल और भी भक्ति-मय बनाएंगे।

पूजा की परंपरा और भक्ति का उत्साह

हीरापुर चिल्ड्रन पार्क में यह पूजा 1980 से लगातार हो रही है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु मां काली की आराधना के लिए यहां जुटते हैं। इस बार पूजा की रात मां काली की आरती, पुष्पांजलि और भोग वितरण का आयोजन होगा। अगली सुबह भक्तों के लिए भंडारा रखा जाएगा, जिसमें खीर और खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाएगा। 23 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन खोखना तालाब में किया जाएगा।

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Dhanbad kaali pooja

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन

शहर प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं। धनबाद पुलिस ने पूजा स्थलों और मेला क्षेत्रों में भीड़ नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त पेट्रोलिंग की व्यवस्था की है। ट्रैफिक पुलिस ने धनबाद स्टेशन रोड, बैंक मोड़ और पार्क मार्केट के आसपास यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष योजना बनाई है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेला

हीरापुर झरनापाड़ा मैदान में इस बार चार दिवसीय मेला 20 से 23 अक्टूबर तक लगेगा, जिसमें झारखंड और बंगाल के स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। यहां खिलौने, झूले, सजावटी वस्तुएं, और स्थानीय उत्पादों की दुकानों के साथ मनोरंजन और भक्ति का शानदार संगम देखने को मिलेगा।

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पर्यावरण के प्रति जागरूक पहल

इस वर्ष का थीम न केवल सौंदर्य और आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता को भी प्रोत्साहित करता है। आयोजकों ने घोषणा की है कि पूजा के बाद प्रयुक्त वस्तुएं जैसे बांस, पत्ते और जूट को पुनः उपयोग या रीसायकल किया जाएगा। इससे “ग्रीन पूजा” की दिशा में धनबाद एक प्रेरणादायक संदेश दे रहा है।

अन्य प्रमुख स्थलों की तैयारियां

धनबाद के बेहराकुदर काली मंदिर में भी इस वर्ष पूजा अत्यंत भव्य रूप में मनाने की घोषणा की गई है। समिति की बैठक में सर्वसम्मति से इस बार मंदिर परिसर की विशेष सजावट, भक्ति जागरण और लाइट शो आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह मंदिर पूजा के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करेगा।

शहर में उत्साह और धार्मिक ऊर्जा

पूरे धनबाद शहर में दीपावली और काली पूजा का उत्साह चरम पर है। हर गली-मोहल्ले में झिलमिलाती रोशनी, धूप-बाती की खुशबू और देवी आराधना की ध्वनियां एक नई ऊर्जा भर रही हैं। बंगाली समुदाय विशेष रूप से अपनी परंपरा के अनुसार माता काली की पूजा में खोइंचा (श्रद्धा भेंट) चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना करने की तैयारी में है।

आर्थिक और सामाजिक महत्व

काली पूजा का धनबाद में आर्थिक प्रभाव भी बड़ा है। इस अवधि में फूल, बिजली सजावट, चढ़ावे की सामग्री और मिठाइयों की मांग में कई गुना वृद्धि होती है। इससे स्थानीय कारीगरों, विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को अच्छा लाभ होता है। इसके साथ ही यह पर्व समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द की भावना को मजबूत करता है।

Dhanbad kaali pooja

निष्कर्ष

Dhanbad Kaali Pooja इस वर्ष भव्यता, आस्था और पर्यावरण के मेल का अद्वितीय उदाहरण बन रही है। इको-फ्रेंडली थीम से सजे पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इस त्योहार को और भी विशेष बना दिया है। भक्तजन मां काली से शांति, समृद्धि और शक्ति की कामना के साथ दीपों के इस महापर्व में सहभागी बन रहे हैं — जिससे न केवल धनबाद बल्कि पूरा झारखंड देवी मय वातावरण में डूबा हुआ है।

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Ravi Prakash Jha Editor

Ravi Prakash Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो राजनीति, सरकारी नीतियों, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों पर रिपोर्टिंग करते हैं। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता और विश्वसनीय स्रोतों की पुष्टि के बाद समाचार प्रकाशित करने के लिए जाने जाते हैं।समसामयिक घटनाओं की गहरी समझ के साथ Ravi Prakash Jha महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं, जिनका उद्देश्य पाठकों तक स्पष्ट, सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हुए हैं और देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सार्वजनिक नीति, सामाजिक बदलाव और डिजिटल ट्रेंड्स से संबंधित विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग करते हैं।

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