नई दिल्ली | 3 अप्रैल 2026: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा सैन्य तनाव अब पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़े और गहरे संकट में बदलता जा रहा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हालिया हवाई और मिसाइल हमलों के जवाब में, ईरान ने भी अब सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली शहरों पर अपना भीषण पलटवार करते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। इस अप्रत्याशित और खौफनाक हमले ने वैश्विक शेयर बाजारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों तक में भारी दहशत फैला दी है।
रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि अगर इस भयंकर सैन्य टकराव को कूटनीति के जरिए जल्द से जल्द शांत नहीं किया गया, तो यह संघर्ष एक विनाशकारी World War का रूप ले सकता है। इस संभावित महायुद्ध की आहट का सीधा असर केवल उन युद्धग्रस्त देशों पर ही नहीं, बल्कि भारत जैसे विशाल और शांतिप्रिय देश की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत गहराई से पड़ने वाला है।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान का सीधा और आक्रामक पलटवार
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पेंटागन की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की सेना ने सीरिया, इराक और खाड़ी देशों में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों अत्याधुनिक ड्रोन्स और मिसाइलों से बड़ा हमला किया है। यह कठोर कदम अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को निशाना बनाकर किए गए ‘सरप्राइज अटैक’ का एक सीधा और बेहद आक्रामक जवाब है।
इन ताज़ा हमलों के बाद अमेरिका ने भी अपनी सुरक्षात्मक और पलटवार की सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं, जिससे लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास का पूरा समुद्री क्षेत्र एक खतरनाक ‘वॉर ज़ोन’ में तब्दील हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री व्यापार का वही अहम रास्ता है, जहां से दुनिया भर का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इस भारी तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से बाधित कर दिया है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध का सीधा और खतरनाक असर
अगर यह युद्ध और ज्यादा भड़कता है, तो भारत को इसके सबसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ‘खबर आंगन’ की फाइनेंस डेस्क की विस्तृत पड़ताल के मुताबिक, इस तनाव का सबसे पहला और सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। युद्ध की आहट मात्र से ही ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 110-115 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गई हैं।
कच्चे तेल के महंगा होने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ेगा, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर (लगभग 92 रुपये) तक गिर सकता है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा है, जहां निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये कुछ ही दिनों में डूब गए हैं। इसके अलावा, माल ढुलाई महंगी होने से देश में दाल, सब्जियां, हवाई सफर और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, जिससे आम आदमी पर महंगाई की एक बहुत बड़ी मार पड़ेगी।
