Suchna Se Sacchai Tak
ADVERTISEMENT

IN FOCUS

Advertisement
  1. Home
  2. International News
  3. Iran में तख्तापलट जैसे हालात: राष्ट्रपति दरकिनार, क्या अब IRGC के हाथों में है पूरी कमान?

Iran में तख्तापलट जैसे हालात: राष्ट्रपति दरकिनार, क्या अब IRGC के हाथों में है पूरी कमान?

ईरान में सत्ता का बड़ा फेरबदल हुआ है। सेना (IRGC) ने सरकारी कामकाज पर कब्जा कर लिया है और राष्ट्रपति को दरकिनार कर दिया है। सर्वोच्च नेता खामेनेई की स्थिति को लेकर भी सस्पेंस बरकरार है।
Khabar Aangan Wednesday, 1 April 2026, 11:03 PM
Iran में तख्तापलट जैसे हालात: राष्ट्रपति दरकिनार, क्या अब IRGC के हाथों में है पूरी कमान?
ADVERTISEMENT

तेहरान | 1 अप्रैल 2026: मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच Iran से एक बहुत बड़ी और वैश्विक हड़कंप मचा देने वाली खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Iran की शक्तिशाली सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के महत्वपूर्ण सरकारी कामकाज और शासन व्यवस्था पर अपना सीधा नियंत्रण (De facto control) बना लिया है।

इस नाटकीय घटनाक्रम ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को पूरी तरह से कूटनीतिक और राजनीतिक गतिरोध में धकेल दिया है। बताया जा रहा है कि पेजेश्कियान प्रशासन और सैन्य नेतृत्व के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव चरम पर था, जो अब एक खुली ‘पावर शिफ्ट’ के रूप में दुनिया के सामने आ गया है। ‘खबर आंगन’ की इंटरनेशनल डेस्क के मुताबिक, ईरान में अब चुनी हुई सरकार के बजाय सैन्य परिषद के फैसलों का दबदबा बढ़ता जा रहा है।

ADVERTISEMENT

राष्ट्रपति के फैसलों पर सेना की रोक और सियासी डेडलॉक

Iran इंटरनेशनल की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के हवाले से यह बात सामने आई है कि IRGC ने राष्ट्रपति के कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों और प्रशासनिक फैसलों को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हाल ही में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान द्वारा नए खुफिया मंत्री की नियुक्ति के प्रयास को IRGC के कमांडर अहमद वाहिदी ने सीधे हस्तक्षेप कर विफल कर दिया।

अहमद वाहिदी ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि युद्ध की मौजूदा नाजुक स्थिति को देखते हुए, सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियां सीधे सेना की निगरानी में होनी चाहिए। इस हस्तक्षेप के बाद राष्ट्रपति की स्थिति केवल एक औपचारिक प्रमुख जैसी बनकर रह गई है। सैन्य नेतृत्व का मानना है कि युद्ध के समय नागरिक सरकार के फैसले सेना की रणनीतियों में बाधा डाल सकते हैं, इसलिए अब कमान उनके हाथ में होनी चाहिए।

ADVERTISEMENT

सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई की रहस्यमयी चुप्पी और अटकलें

Iran के इस गहरे होते राजनीतिक संकट के पीछे एक और बड़ी वजह देश के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) का सार्वजनिक रूप से सामने न आना है। पिछले कुछ हफ्तों से मोज्तबा खामेनेई कहां हैं और किस स्थिति में हैं, इसे लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। उनके सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने के कारण तेहरान के सत्ता गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।

IRGC ने सर्वोच्च नेता के चारों ओर एक बेहद सख्त सुरक्षा घेरा बना दिया है, जिससे राष्ट्रपति और नागरिक सरकार के अधिकारियों का उन तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पिछले कुछ दिनों में कई बार सर्वोच्च नेता से मुलाकात का समय मांगा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सेना इसी ‘लीडरशिप वैक्यूम’ का फायदा उठाकर सत्ता के केंद्रों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

ADVERTISEMENT

युद्ध के बीच बदला Iran का सत्ता समीकरण

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच एक बड़ा युद्ध छिड़ा हुआ है। फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष ने ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है और देश की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। युद्ध की इस विभीषिका के बीच सेना का सत्ता पर काबिज होना पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

सैन्य परिषद, जिसमें IRGC के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं, अब देश की विदेश नीति और रक्षा मामलों के साथ-साथ घरेलू प्रशासन में भी अंतिम फैसला ले रही है। स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Iran में सुधारवादी ताकतों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है और अब देश एक सख्त सैन्य विचारधारा के तहत काम कर रहा है। यह बदलाव न केवल ईरान के भीतर, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आने वाले समय में बड़ी कूटनीतिक चुनौतियां पेश कर सकता है।

हमारा निष्कर्ष

‘खबर आंगन’ की ग्लोबल अफेयर्स डेस्क का यह स्पष्ट मानना है कि Iran में नागरिक सरकार और सेना के बीच का यह संघर्ष किसी बड़े गृहयुद्ध या स्थायी सैन्य शासन की आहट हो सकता है। किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे में सेना का इस तरह से प्रशासन पर हावी होना देश की आंतरिक स्थिरता को कमजोर करता है।

Iran की यह ‘पावर शिफ्ट’ वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी है, क्योंकि सेना का रुख हमेशा नागरिक सरकार के मुकाबले अधिक आक्रामक होता है। अगर सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी रही, तो ईरान के भीतर सत्ता की यह जंग और भी हिंसक मोड़ ले सकती है। दुनिया भर की नजरें अब तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मध्य पूर्व का यह युद्ध किस दिशा में मुड़ेगा।

Disclaimer: यह खबर ‘Khabar Aangan’ की ग्लोबल अफेयर्स डेस्क द्वारा अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों, तेहरान के विश्वसनीय सूत्रों और मध्य पूर्व के हालिया कूटनीतिक घटनाक्रमों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर प्रमाणिकता के साथ तैयार की गई है।

इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan

Khabar Aangan Admin

Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।

आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।

GPay UPI Paytm AmazonPay Razorpay

WELCOME TO KHABAR AANGAN Suchna Se Sacchai Tak