मदुरै | 23 मार्च 2026: Tamil Nadu के सांतनकुलम में साल 2020 में पुलिस हिरासत के दौरान पिता-पुत्र (जयराज और बेनिक्स) की बर्बर हत्या के मामले में आखिरकार छह साल बाद न्याय की जीत हुई है। मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने सोमवार को इस खौफनाक कस्टोडियल डेथ केस में सभी 9 आरोपी पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी करार दिया है।
इस फैसले ने पूरे देश का ध्यान एक बार फिर से पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर खींच लिया है। अदालत अब 30 मार्च 2026 को इन सभी दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।
जज ने खारिज की बचाव पक्ष की दलीलें
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन ने सोमवार शाम अपना फैसला सुनाया। फैसले को पढ़ते हुए जज ने स्पष्ट किया कि जयराज और बेनिक्स के शरीर पर पाई गई चोटें अप्राकृतिक थीं और उन्हीं चोटों के कारण अंततः उनकी जान गई।
अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पिता-पुत्र ने खुद को चोट पहुंचाई थी। कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट से यह पूरी तरह साबित होता है कि उनके साथ पुलिस स्टेशन में बार-बार और लगातार मारपीट की गई थी। इसके अलावा, अदालत ने यह भी माना कि हालांकि जयराज को पहले से हृदय रोग था, लेकिन उनकी मौत का कारण बीमारी नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा दी गई अमानवीय यातनाएं ही थीं।
सजा के ऐलान से पहले अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे सभी नौ दोषियों के स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति, उनके वेतन विवरण और उनकी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा अदालत में जमा करें।
क्या था पूरा मामला?
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना 19 जून 2020 की है। Tamil Nadu के सांतनकुलम में कोविड-19 लॉकडाउन के नियम लागू थे। पुलिस ने जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को रात 9 बजे के बाद भी अपनी मोबाइल की दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
दोनों को सांतनकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां पूरी रात पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमानवीय और क्रूर तरीके से मारपीट की। इसके बाद उन्हें गंभीर चोटों के साथ न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यातनाओं के कारण 22 जून को बेटे बेनिक्स और 23 जून को पिता जयराज ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
सीबीआई ने की थी मामले की जांच
इस घटना के बाद पूरे Tamil Nadu और देश भर में भारी जनाक्रोश देखने को मिला था। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। हाई कोर्ट ने उसी समय टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया यह पुलिस द्वारा की गई हत्या का मामला लगता है। कोर्ट ने यह भी पाया था कि स्थानीय पुलिस सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रही थी।
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया था। सीबीआई ने अपनी जांच के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश, के. बालकृष्णन और अन्य कांस्टेबल सहित कुल 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में आरोप पत्र दायर किया था।
ट्रायल के दौरान एक आरोपी (पॉलदुरई) की कोविड-19 संक्रमण के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद बाकी 9 आरोपियों पर मुकदमा चला और अब उन्हें दोषी ठहराया गया है।
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