हैदराबाद | 11 मार्च 2026: पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे भीषण युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर अब भारत के आम आदमी और मजदूर वर्ग पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन बाधित होने के कारण देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) और सीएनजी (CNG) की भारी किल्लत होने की आशंका पैदा हो गई है।
इस संभावित ईंधन संकट ने Telangana सहित पूरे देश के ‘गिग वर्कर्स’ (Gig Workers) यानी ऐप-आधारित कैब ड्राइवर्स और डिलीवरी बॉयज की रातों की नींद उड़ा दी है। अगर अगले एक-दो दिनों में गैस की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इन लाखों युवाओं के सामने रोजी-रोटी का एक बहुत बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
कैब ड्राइवर्स की बढ़ी धड़कनें: सीएनजी स्टेशनों पर लंबी कतारें
वर्तमान में ओला, उबर और रैपिडो (Ola, Uber, Rapido) जैसे बड़े ऐप-आधारित प्लेटफार्म्स पर काम करने वाले हजारों ड्राइवर्स सीएनजी और एलपीजी वाहनों पर ही निर्भर हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सीएनजी ही उनके लिए किफायती और मुनाफे का एकमात्र सहारा बनी हुई है।
लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स में आई रुकावट के कारण ईंधन स्टेशनों पर गैस की सप्लाई अनियमित होने का डर सताने लगा है। अगर गैस की किल्लत होती है, तो ड्राइवर्स को अपना कीमती समय गैस भरवाने के लिए लंबी कतारों में बर्बाद करना पड़ेगा।
गैस स्टेशनों पर घंटों इंतजार करने का सीधा मतलब है कि उन्हें दिन भर में कम ट्रिप्स मिलेंगी और उनकी दैनिक आय में भारी गिरावट आएगी। पहले से ही महंगाई और कंपनियों के बढ़ते कमीशन की मार झेल रहे इन ड्राइवर्स के लिए यह स्थिति एक ‘डबल अटैक’ (Double Attack) जैसी है।
