कोलकाता | 23 मार्च 2026:West Bengal में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रही भारी राजनीतिक और प्रशासनिक रस्साकशी के बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ा अपडेट दिया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोग्राम के तहत दूसरी और अंतिम मतदाता सूची आज (सोमवार) रात 9 बजे तक जारी कर दी जाएगी।
हालांकि, इस अंतिम सूची के जारी होने से ठीक पहले राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उनके एक बयान ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राज्य में लगभग 60 लाख ‘संदिग्ध’ या ‘विचाराधीन’ वोटरों के डेटा की जांच चल रही है, लेकिन जब सीईओ से पूछा गया कि इनमें से कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, तो उनका सीधा जवाब था- “मुझे नहीं पता कि कितने नाम বাদ (रद्द) हुए हैं।”
इस बयान के बाद West Bengal के राजनीतिक गलियारों में हलचल और तेज हो गई है, क्योंकि राजनीतिक दल लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदाता सूची संशोधन की पूरी प्रक्रिया का खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया काफी जटिल है और इसमें सिस्टम को 6 से 8 घंटे का समय लगता है।
आंकड़े देते हुए उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई पहली सूची में 60 लाख 6 हजार 675 वोटरों के नाम विचाराधीन थे। इन मामलों की जांच और निपटारे के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।
वर्तमान स्थिति: सीईओ के अनुसार, अब तक इन 60 लाख मामलों में से केवल 29 लाख मामलों की ही जांच और निपटारा हो सका है।
अधिकारियों की फौज: इस विशाल डेटाबेस को खंगालने और निपटारे के लिए पूरे राज्य में 705 न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं।
अग्रवाल ने कहा कि ‘ई-साइन’ होकर अंत में कितने नाम फाइनल सूची में आएंगे, इसका सटीक आंकड़ा उनके पास फिलहाल नहीं है, लेकिन जितनी भी फाइलों का निपटारा हुआ है, उनकी पूरी सूची आज रात तक सार्वजनिक कर दी जाएगी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने बनाए 19 ट्रिब्यूनल
वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर उठने वाले संभावित विवादों और कानूनी अड़चनों से निपटने के लिए न्यायपालिका ने पहले ही तैयारी कर ली है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एक बड़ा कदम उठाया है।
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जिन भी लोगों के नाम इस अंतिम सूची से कटेंगे, उन्हें अपनी नागरिकता और वोटिंग अधिकार साबित करने का पूरा मौका मिलेगा। इसके लिए हाई कोर्ट ने राज्य के 23 जिलों के लिए 19 विशेष ट्रिब्यूनल का गठन किया है। इन ट्रिब्यूनलों की कमान 19 पूर्व न्यायाधीशों को सौंपी गई है। पीड़ित नागरिक सीधे इन ट्रिब्यूनलों में अपील कर सकेंगे और सही पाए जाने पर उनका नाम वापस सूची में जोड़ा जा सकता है।
कानून व्यवस्था और राजनीतिक बयानबाजी
West Bengal का चुनाव हमेशा से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में लाखों वोटरों के नाम कटने की आशंका के बीच कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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सीईओ मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और सभी पुलिस अधीक्षकों को चुनाव के मद्देनजर पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद रहने के निर्देश दे दिए हैं।
इस बीच, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर है। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए दावा किया था कि चुनाव आयोग द्वारा निपटाए गए मामलों में से करीब 10 लाख लोगों के नाम काटे जा सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया था कि एक विशेष समुदाय के साथ-साथ कई अन्य समुदायों के लोगों को इसमें निशाना बनाया जा रहा है। मालदा, मुर्शिदाबाद और दोनों दिनाजपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा नाम होने की बात भी कही गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में और पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से चल रही है।
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