पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने वरिष्ठ नेता Humayun Kabir को पार्टी से निलंबित (Suspend) कर दिया। यह फैसला उनके हालिया विवादित सार्वजनिक बयानों और पार्टी अनुशासन के उल्लंघन को लेकर लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, Humayun Kabir लगातार पार्टी लाइन से अलग बयान दे रहे थे, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा था। कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद, जब उन्होंने अपने तेवर नहीं बदले तो अंततः पार्टी नेतृत्व ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें सस्पेंड करने का निर्णय लिया।
हुमायूं कबीर कौन हैं?राजनीतिक सफर की झलक
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से टीएमसी के विधायक हैं, जो भरतपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे लंबे समय से स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहने के लिए जाने जाते हैं। उनकी राजनीति मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों के विकास और सामाजिक न्याय पर केंद्रित रही है। हालांकि, हाल के वर्षों में वे पार्टी नेतृत्व से कई बार भिड़ चुके हैं, जिसके कारण उन पर पहले भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात उठ चुकी है।
कबीर का राजनीतिक सफर टीएमसी के साथ ही शुरू हुआ, लेकिन वे अक्सर विवादों से घिरे रहते हैं। बाबरी मस्जिद वाले बयान से पहले भी उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह रुख पार्टी के लिए चुनौती बन चुका था, क्योंकि मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील जिले में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता था।
बाबरी मस्जिद बयान: विवाद की जड़ क्या है?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब हुमायूं कबीर ने घोषणा की कि वे 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने की नींव रखेंगे। यह तारीख 1992 के बाबरी विध्वंस की याद दिलाती है, जिससे पूरे देश में तनाव फैल गया था। कबीर ने दावा किया कि लाखों लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो एनएच-12 राजमार्ग को ब्लॉक कर सकता था।
टीएमसी ने इसे बीजेपी समर्थित साजिश करार दिया, आरोप लगाया कि कबीर विपक्ष की मदद से राज्य में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। कोलकत्ता हाईकोर्ट में इस बयान से जुड़ी एक जनहित याचिका दायर हो चुकी है, जिसकी सुनवाई कल होगी। चीफ जस्टिस की बेंच इस मामले पर फैसला लेगी, जो राजनीतिक घमासान को और तेज कर सकती है।

