दुर्गापुर | 17 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर इस्पात नगरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक बड़े और दर्दनाक हादसे में बदल गई। ए-ज़ोन स्टील टाउनशिप स्थित आशीष मार्केट के पास इस्कॉन की रथ यात्रा के दौरान अचानक बिजली का एक भारी पोल गिरने से 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में मातम पसर गया है।
रथ के ऊंचे ध्वज से टकराकर अचानक उखड़ गया बिजली का पोल
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब एक बजे जब इस्कॉन की भव्य रथ यात्रा आशीष मार्केट से गुजर रही थी, तभी रथ का ऊंचा ध्वज दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (DSP) के एक पुराने बिजली के पोल से बुरी तरह टकरा गया। झटके के कारण पोल अचानक जड़ से उखड़ गया और सीधे भीड़भाड़ वाली सड़क पर आ गिरा।
रथ यात्रा देखने निकली बुजुर्ग महिला के सिर पर गिरा भारी पोल
इसी दौरान 65 वर्षीय आलोकलता पाल सड़क किनारे खड़ी होकर पूरी श्रद्धा के साथ रथ यात्रा के दर्शन कर रही थीं। उखड़ा हुआ वह भारी-भरकम बिजली का पोल सीधे उनके सिर पर आ गिरा। इस अचानक हुए हादसे में वह बुरी तरह कुचलकर गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही भारी चीख-पुकार मच गई।
राजबांध के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और आयोजकों की मदद से गंभीर रूप से घायल महिला को पास के अस्पताल में ले जाया गया। हालत बिगड़ती देख चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत राजबांध के एक बड़े निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां रात भर चले इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने दम तोड़ दिया।
राणाप्रताप रोड की निवासी और सरकारी स्कूल की रिटायर्ड शिक्षिका थीं मृतक
मृतक महिला की पहचान आलोकलता पाल के रूप में हुई है, जो 15/11 राणाप्रताप रोड की स्थायी निवासी थीं। वह एक सरकारी विद्यालय से सेवानिवृत्त शिक्षिका (रिटायर्ड टीचर) थीं और इलाके में काफी पहचानी जाती थीं। उनके मिलनसार स्वभाव और सामाजिक कार्यों के कारण आस-पास के लोग उनका बहुत अधिक सम्मान करते थे।
महिला समिति की सक्रिय कार्यकर्ता के निधन से शोक की लहर
शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन देने के अलावा, आलोकलता पाल ‘सारा भारत गणतांत्रिक महिला समिति’ (AIDWA) की एक बेहद सक्रिय कार्यकर्ता भी थीं। महिलाओं के हक के लिए वह हमेशा आगे रहती थीं। उनके इस तरह अचानक हुए दुखद निधन की खबर सुनते ही समिति के सदस्यों और पूरे दुर्गापुर शहर में भारी शोक की लहर दौड़ गई है।
