Suchna Se Sacchai Tak
CATEGORIES
IN FOCUS
Advertisement
  1. Home
  2. Politics
  3. बंगाल में Mamata Banerjee का सियासी मार्च — संविधान हाथ में, निशाने पर केंद्र और चुनाव आयोग

बंगाल में Mamata Banerjee का सियासी मार्च — संविधान हाथ में, निशाने पर केंद्र और चुनाव आयोग

बंगाल में Mamata Banerjee का सियासी मार्च — संविधान हाथ में, निशाने पर केंद्र और चुनाव आयोग

Khabar Aangan Published on: 5 नवम्बर 2025
Advertisement

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद गर्म रहा। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee एक बार फिर सड़क पर उतरीं — लेकिन इस बार किसी चुनाव प्रचार के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर।
हाथ में भारतीय संविधान की प्रति लेकर ममता ने कोलकाता की सड़कों पर रैली निकाली और चुनाव आयोग की नई प्रक्रिया Special Summary Revision (SIR) पर खुलकर हमला बोला।

उन्होंने इसे “Silent Invisible Rigging (SIR)” करार दिया — यानी शांत लेकिन अदृश्य धांधली। ममता का आरोप है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची में हेरफेर करने का एक “चालाक और योजनाबद्ध तरीका” है, जिससे बंगाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।


क्या है SIR (Special Summary Revision)?

SIR यानी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण — चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसमें हर साल मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है।
इस प्रक्रिया में नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है, मृत या डुप्लिकेट वोटरों को हटाया जाता है और किसी भी त्रुटि को सुधारा जाता है।

Advertisement

लेकिन Mamata Banerjee का कहना है कि इस बार SIR प्रक्रिया के नाम पर “ट्रांसपेरेंसी खत्म की जा रही है।”
उन्होंने दावा किया कि आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को हटा कर बाहर के लोगों को जिम्मेदारी दी है, जिससे “BJP का दबाव बढ़ गया है”।


“यह SIR नहीं, Silent Invisible Rigging है” — Mamata Banerjee

रैली के दौरान ममता बनर्जी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा —

“यह SIR नहीं है, यह ‘Silent Invisible Rigging’ है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सिर्फ उनकी पसंद के मतदाता सूची में रहें।”

उन्होंने कहा कि संविधान देश की आत्मा है और इसी आत्मा की रक्षा के लिए वे संविधान को हाथ में लेकर निकली हैं।

“जब लोकतंत्र खतरे में हो, तब संविधान ही जनता की सबसे बड़ी ताकत है। मैं संविधान की कसम खाती हूं कि बंगाल में लोकतंत्र को झुकने नहीं दूंगी।”


रैली का माहौल — भीड़, नारों और संविधान की शपथ

कोलकाता की सड़कों पर रैली के दौरान हजारों TMC कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।
सभी के हाथों में संविधान की छोटी-छोटी प्रतियां थीं और नारे गूंज रहे थे —
“Save Democracy, Save Constitution”, “No to SIR Rigging”, “BJP हटाओ, देश बचाओ।”

RECOMMEND FOR YOU SPONSORED

रैली शांतिपूर्ण थी लेकिन बेहद प्रतीकात्मक — Mamata Banerjee व्हीलचेयर पर बैठी दिखीं, उनके हाथ में संविधान था, और चेहरे पर गुस्सा नहीं बल्कि दृढ़ता थी।


केंद्र और चुनाव आयोग पर Mamata Banerjee का सीधा हमला

ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि केंद्र सरकार “लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही” कर रही है।
उन्होंने कहा —

“वे एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने में कर रहे हैं। अब चुनाव आयोग को भी एक सियासी हथियार बना दिया गया है। लेकिन बंगाल झुकेगा नहीं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने “SIR की आड़ में वोटरों को हटाने या जोड़ने में पक्षपात किया”, तो TMC पूरे राज्य में धरना आंदोलन करेगी।


भाजपा का पलटवार

भाजपा नेताओं ने Mamata Banerjee के आरोपों को “बेसिरपैर का” बताया।
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने कहा —

“Mamata Banerjee को डर है कि अगर साफ और पारदर्शी मतदाता सूची बनी, तो उनकी पार्टी का भ्रष्ट तंत्र उजागर हो जाएगा। इसलिए वे पहले से ही ‘रिगिंग’ का रोना रो रही हैं।”

भाजपा का कहना है कि SIR एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होती।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम भावनात्मक और प्रतीकात्मक दोनों है।
संविधान लेकर रैली निकालना एक ऐसा संदेश है जो जनता के मन में “लोकतंत्र बनाम तानाशाही” का चित्र बनाता है।

आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।

GPay UPI Paytm AmazonPay Razorpay

कोलकाता विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर अरिंदम मुखर्जी के अनुसार —

“यह Mamata Banerjee की राजनीतिक समझदारी का हिस्सा है। वे जानती हैं कि आने वाले लोकसभा चुनाव में ‘संविधान की रक्षा’ जैसा मुद्दा जनता के बीच भावनात्मक असर डालेगा।”


क्यों खास है यह रैली

  1. संविधान का प्रतीकात्मक इस्तेमाल – यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने संविधान की प्रति लेकर सड़क पर रैली की।
  2. लोकतंत्र बनाम सत्ता का विमर्श – ममता बनर्जी ने रैली को केवल राज्यीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा बनाया।
  3. जनभावना पर असर – बंगाल में ममता की यह छवि और मजबूत हुई कि वे “लड़ाकू नेता” हैं जो लोकतंत्र के लिए लड़ती हैं।

TMC का अगला कदम क्या होगा?

TMC ने घोषणा की है कि अगर चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं करता, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।
पार्टी की योजना है कि हर जिले में “Constitution March” निकाला जाए ताकि जनता को जागरूक किया जा सके।


निष्कर्ष

Mamata Banerjee की यह रैली केवल एक विरोध नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश है।
संविधान को प्रतीक बनाकर उन्होंने यह जताया कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई अब सड़कों पर लड़ी जाएगी।
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने भले ही इसे “राजनीतिक ड्रामा” कहा हो, लेकिन जनता के बीच ममता की यह छवि —
“संविधान की रखवाली करने वाली नेता” — और मजबूत होती दिख रही है।

Amazon Prime

State – Khabar Aangan

इस खबर को शेयर करें
Khabar Aangan

Khabar Aangan Admin

Khabar Aangan एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो सूचना से सच्चाई तक की यात्रा को समर्पित है। हमारा उद्देश्य है—स्थानीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय घटनाओं तक, हर खबर को गहराई, संदर्भ और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करना। हम परंपरागत पत्रकारिता को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, ताकि पाठकों को मिले स्पष्ट, विश्वसनीय और प्रभावशाली जानकारी। चाहे बात हो प्रशासनिक विफलता की, या सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की, या सामाजिक बदलाव की—Khabar Aangan हर विषय को संवेदनशीलता और साहस के साथ उठाता है।

Leave a Comment

Read More

Join our WhatsApp Channel
व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें
Breaking News ताज़ा ख़बरें Viral Updates
WELCOME TO KHABAR AANGANSuchna Se Sacchai Tak