गांधीनगर, 2 अप्रैल 2026: भारत ने आज सतत शहरी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के ढोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) में देश के पहले पूर्ण कार्बन-तटस्थ स्मार्ट शहर, ‘धोलेरा हरित नगर’ की आधारशिला रखी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना 2035 तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखती है और भारत को वैश्विक पटल पर हरित और स्मार्ट शहरीकरण के एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है।
एक भव्य समारोह में, प्रधानमंत्री ने ‘धोलेरा हरित नगर’ को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के स्वप्न का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक शहर नहीं है, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विरासत है, एक ऐसा उदाहरण है कि कैसे विकास और पर्यावरण एक साथ चल सकते हैं।
‘धोलेरा हरित नगर’ हमें दिखाएगा कि आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी संभव है।” इस परियोजना में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश अनुमानित है, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी होगी।
‘धोलेरा हरित नगर’ को 8,000 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिसमें 100% नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता सुनिश्चित की जाएगी। शहर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक वृहद सौर ऊर्जा पार्क और पवन ऊर्जा फार्म स्थापित किए जाएंगे।
एक उन्नत स्मार्ट ग्रिड प्रणाली ऊर्जा के कुशल वितरण और उपभोग की निगरानी करेगी। शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा लक्ष्य इस शहर में शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करना है। इसके लिए, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा, और एक अत्याधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित की जाएगी, जो पूरी तरह से स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित होगी।”
परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसका एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल है। ‘धोलेरा हरित नगर’ में ‘शून्य अपशिष्ट लैंडफिल’ (zero waste to landfill) का लक्ष्य रखा गया है, जहां सभी अपशिष्ट को ऊर्जा में परिवर्तित किया जाएगा या पुनर्चक्रित किया जाएगा।
जल प्रबंधन के लिए वर्षा जल संचयन, ग्रेवाटर रीसाइक्लिंग और उन्नत जल शोधन संयंत्रों का उपयोग किया जाएगा, जिससे शहर की पानी की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा आंतरिक रूप से पूरा हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक वृक्षारोपण अभियान और हरे-भरे गलियारों का विकास शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
आर्थिक मोर्चे पर, ‘धोलेरा हरित नगर’ को एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि यह परियोजना निर्माण और परिचालन चरणों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी। विशेष रूप से, हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, और स्मार्ट विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
औद्योगिक घरानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि यह उन्हें पर्यावरण-अनुकूल निवेश के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा। एक प्रमुख उद्यमी ने कहा, “यह सिर्फ एक नया शहर नहीं, बल्कि हरित अर्थव्यवस्था के लिए एक नया प्रवेश द्वार है।”
तकनीकी नवाचार इस स्मार्ट शहर की रीढ़ होगा। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग शहर के हर पहलू – यातायात प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, उपयोगिता सेवाओं और नागरिक सुविधाओं – को अनुकूलित करने के लिए किया जाएगा। निवासियों को स्मार्ट मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से शहर की सेवाओं तक निर्बाध पहुंच मिलेगी, जिससे शहरी जीवन अधिक सुविधाजनक और कुशल बनेगा।
हालांकि, कुछ शहरी योजनाकारों और पर्यावरणविदों ने इस विशाल परियोजना की व्यवहार्यता और दीर्घकालिक प्रभावों पर चिंताएं भी व्यक्त की हैं। प्रख्यात शहरी योजनाकार डॉ. सुनीता शर्मा ने टिप्पणी की, “अवधारणा बहुत महत्वाकांक्षी और सराहनीय है, लेकिन चुनौती इसके क्रियान्वयन और निरंतरता में निहित है।
यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रौद्योगिकी और अवसंरचना केवल शोकेस न हों, बल्कि वास्तव में नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखें।” उन्होंने सार्वजनिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों को विकास प्रक्रिया में शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सरकार ने इन चिंताओं को स्वीकार करते हुए एक मजबूत निगरानी तंत्र और विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की है, जो परियोजना की प्रगति और पर्यावरणीय अनुपालन की नियमित समीक्षा करेगी। ‘धोलेरा हरित नगर’ भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
यह परियोजना न केवल भारत के शहरी परिदृश्य को नया आकार देगी, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए एक प्रेरणा भी बनेगी कि कैसे एक विकसित राष्ट्र अपनी आर्थिक आकांक्षाओं को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित कर सकता है। आने वाले दशक में, दुनिया की निगाहें इस नए हरित नगर पर होंगी, यह देखने के लिए कि क्या यह भारत के ‘नया भारत’ के दृष्टिकोण को सफलतापूर्वक साकार कर पाता है।
Source: https://www.thehindu.com
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