मुंबई, 29 अगस्त 2026: बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत का महिलाओं के पहनावे को लेकर दिया गया एक पुराना बयान इन दिनों फिर चर्चा में है। कुछ साल पहले अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कंगना ने महिलाओं के कपड़ों और व्यक्तिगत पसंद को लेकर कहा था कि कोई महिला क्या पहनती है या क्या नहीं पहनती, यह उसका निजी मामला है। उनका यह पुराना बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कृति सेनन के एक रक्षाबंधन विज्ञापन में पहने कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।
कंगना ने तब महिलाओं की पसंद को बताया था निजी मामला
कंगना ने कुछ वर्ष पहले सफेद रंग के आउटफिट में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने महिलाओं के कपड़ों को लेकर अपनी बात रखी थी और जोर दिया था कि किसी महिला के पहनावे का फैसला उसके अपने अधिकार क्षेत्र में होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि महिला क्या पहनती है या क्या पहनना भूल जाती है, यह दूसरों के दखल का विषय नहीं होना चाहिए।
उनका वह बयान उस समय महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पहनावे को लेकर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में सामने आया था। कंगना ने अपनी तस्वीरों के साथ यह संदेश दिया था कि महिलाओं के कपड़ों को लेकर समाज की अनावश्यक निगरानी और टिप्पणी को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। यही वजह है कि उनका पुराना बयान अब एक अलग विवाद के बीच दोबारा ध्यान खींच रहा है और सोशल मीडिया पर लोग उनके पुराने रुख को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं।
कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुआ नया विवाद
मौजूदा विवाद कृति सेनन के एक रक्षाबंधन ज्वेलरी विज्ञापन से जुड़ा है। विज्ञापन में कृति इंडो-वेस्टर्न परिधान में नजर आई थीं, जिसमें ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थे। विज्ञापन में वह रक्षाबंधन के मौके पर राखी बांधती दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया के एक वर्ग ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई और यह बहस महिलाओं के कपड़ों, त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं तक पहुंच गई।
कृति ने आलोचना का जवाब देते हुए सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं को यह बताने की कोशिश कब बंद होगी कि उन्हें क्या पहनना चाहिए। उन्होंने अपने पक्ष में कहा कि त्योहारों और परंपराओं की भावना सिर्फ कपड़ों से तय नहीं होती, बल्कि उनके पीछे मौजूद भावनाओं और रिश्तों से जुड़ी होती है। कृति ने यह भी कहा कि उनके लिए रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच सुरक्षा, प्यार और शुभकामनाओं का रिश्ता है, जिसे वह अपने परिवार में अलग तरीके से देखती हैं।
कंगना ने कृति के लुक पर क्यों उठाया सवाल
इस विवाद के बीच कंगना ने कृति के विज्ञापन वाले लुक पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल किया कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार के दौरान भाई को राखी बांधते समय ऐसे कपड़ों का चुनाव क्यों किया गया, जबकि महिलाओं के पास पहनावे के कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं। कंगना की इस टिप्पणी ने पहले से चल रही सोशल मीडिया बहस को और तेज कर दिया और चर्चा सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं रही।
यहीं से कंगना का पुराना बयान भी दोबारा चर्चा में आया। एक तरफ उनका पुराना रुख महिलाओं के कपड़ों को उनकी व्यक्तिगत पसंद से जोड़ता था, जबकि मौजूदा विवाद में उन्होंने एक खास विज्ञापन के संदर्भ में कृति के पहनावे पर सवाल उठाया। हालांकि दोनों परिस्थितियों का संदर्भ अलग है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों ने पुराने और नए बयानों के बीच इसी अंतर को चर्चा का केंद्र बना दिया है।
कृति ने भी दिया सीधा जवाब
कृति सेनन ने अपने जवाब में कपड़ों के आधार पर महिलाओं के चरित्र या संस्कृति को परिभाषित करने की सोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और त्योहारों का अर्थ सिर्फ किसी महिला की पोशाक देखकर तय नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार समय के साथ फैशन और पहनावे में बदलाव आया है, लेकिन महिलाओं के कपड़ों को लेकर सामाजिक निगरानी अब भी बनी हुई है।
कृति की प्रतिक्रिया के बाद विवाद ने एक व्यापक सामाजिक बहस का रूप ले लिया। मुद्दा अब केवल यह नहीं रहा कि किसी विज्ञापन में अभिनेत्री ने क्या पहना था, बल्कि यह सवाल भी उठने लगा कि महिलाओं के पहनावे को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी की सीमा क्या होनी चाहिए। इसी बहस में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और विज्ञापन में त्योहारों की प्रस्तुति जैसे कई अलग-अलग पहलू जुड़ गए हैं।
विज्ञापन हटाए जाने के बाद भी बहस जारी
विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वेलरी ब्रांड ने विज्ञापन अभियान वापस लेने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और भारतीय संस्कृति, परंपराओं तथा त्योहारों के प्रति उसके सम्मान को दोहराया। विज्ञापन हटने के बावजूद सोशल मीडिया पर कृति के पहनावे, कंगना की टिप्पणी और महिलाओं की पसंद को लेकर बहस जारी रही।
इसी बीच राहुल गांधी ने भी कृति के समर्थन में महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात कही और कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है, यह उसकी पसंद है। उनके बयान ने विवाद को राजनीतिक रंग भी दे दिया। इसके बाद कंगना ने उनके रुख पर भी प्रतिक्रिया दी, जिससे पहले से चल रही बहस में एक नया राजनीतिक मोड़ जुड़ गया।
पुराना बयान और नया विवाद क्यों हो रहा है वायरल
कंगना रनौत का पुराना बयान इसलिए खास तौर पर चर्चा में आया है क्योंकि वह महिलाओं के पहनावे पर व्यक्तिगत अधिकार की बात करता था। मौजूदा विवाद में उनकी कृति के कपड़ों पर की गई टिप्पणी ने इस पुराने रुख को फिर सामने ला दिया। सोशल मीडिया पर लोग अब यह तुलना कर रहे हैं कि व्यक्तिगत पहनावे की स्वतंत्रता और किसी खास सामाजिक या धार्मिक संदर्भ में कपड़ों की उपयुक्तता के बीच सीमा आखिर कहां तय होनी चाहिए।
फिलहाल यह विवाद बॉलीवुड की दो अभिनेत्रियों के बीच कपड़ों को लेकर मतभेद से आगे बढ़ चुका है। इसमें महिलाओं की पसंद, सामाजिक अपेक्षाएं, त्योहारों की प्रस्तुति और सार्वजनिक हस्तियों की जिम्मेदारी जैसे कई सवाल शामिल हो गए हैं। कंगना का पुराना बयान और कृति का मौजूदा जवाब इसी बड़ी बहस के दो अलग-अलग संदर्भ बनकर सामने आए हैं, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार बनी हुई है।
Disclaimer: यह खबर सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध घटनाक्रम के आधार पर तैयार की गई है। इसमें संबंधित व्यक्तियों के पुराने और मौजूदा बयानों को उनके संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है। किसी पक्ष की राय को स्वतंत्र तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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