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नेपाल में बाढ़ ने 71 साल के बुजुर्ग से छीना घर और कारोबार, अब करोड़ों का नुकसान और सिर पर सिर्फ कर्ज का बोझ

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने 71 वर्षीय गोविंद प्रसाद दाहाल से घर और करोड़ों का कारोबार छीन लिया। जान बच गई, लेकिन अब उनके सामने कर्ज और जिंदगी दोबारा शुरू करने की चुनौती है।
Ashutosh Kumar Jha Published on: 29 अगस्त 2026
नेपाल में बाढ़ ने 71 साल के बुजुर्ग से छीना घर और कारोबार, अब करोड़ों का नुकसान और सिर पर सिर्फ कर्ज का बोझ
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काठमांडू, 28 अगस्त 2026: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन्हीं पीड़ितों में 71 वर्षीय गोविंद प्रसाद दाहाल भी हैं, जिनका घर और करीब 10 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य का कारोबार कुछ ही मिनटों में मलबे में बदल गया। जान बचाने में सफल रहे दाहाल के पास अब रहने की जगह, कारोबार और भविष्य की सुरक्षा के बजाय सिर्फ कर्ज का बोझ बचा है।

कुछ मिनट की बाढ़ ने जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में मिला दी

26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। भोटे कोशी नदी में अचानक आई तेज धारा ने घरों, कारोबार और बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। दाहाल उस समय देविघाट इलाके में थे और खतरा बढ़ते ही जान बचाने के लिए भागे। उनके बेटे केदार भी उनके साथ भागे, लेकिन जब दोनों वापस लौटे तो सामने उनकी जिंदगी की वर्षों की कमाई का मलबा पड़ा था।

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घर बचा नहीं, कारोबार भी पूरी तरह तबाह

दाहाल का कारोबार लगभग 10 करोड़ नेपाली रुपये की कीमत का बताया गया है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 6.3 करोड़ रुपये के बराबर बैठता है। इतनी बड़ी आर्थिक संपत्ति कुछ ही देर में बाढ़ और मलबे की चपेट में आ गई। उनके घर की दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और कारोबार का भी लगभग पूरा ढांचा खत्म हो गया। इस तबाही के बाद उनके पास सिर्फ वही कपड़े और चप्पलें रह गईं, जो उन्होंने बाढ़ के वक्त पहनी हुई थीं।

दाहाल के लिए सबसे दर्दनाक बात सिर्फ संपत्ति का नुकसान नहीं है। उम्र के इस पड़ाव पर दोबारा कारोबार खड़ा करना और कर्ज का बोझ संभालना बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ आने के समय उन्होंने भविष्य के बारे में सोचने के बजाय सिर्फ अपनी जान बचाने पर ध्यान दिया। जब पानी और मलबे का खतरा कुछ कम हुआ और वह लौटे, तब उन्हें एहसास हुआ कि जिस घर और कारोबार के सहारे आगे की जिंदगी चलनी थी, वह सब खत्म हो चुका है।

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नेपाल में तबाही का दायरा लगातार बढ़ा

नेपाल की इस आपदा का असर सिर्फ कुछ घरों तक सीमित नहीं है। प्रभावित इलाकों में घरों, बाजारों, सड़कों, पुलों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। स्वास्थ्य सेवाएं तक प्रभावित हुई हैं और हजारों परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत बताई गई है। विस्थापन, साफ पानी और स्वच्छता की समस्या के कारण प्रभावित आबादी के सामने आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।

ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 579 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 1,924 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है। हालांकि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में क्षतिग्रस्त सड़कें और संपर्क व्यवस्था राहत एवं बचाव कार्य को मुश्किल बना रही हैं।

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अचानक आई बाढ़ ने नहीं दिया संभलने का मौका

इस आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रभावित क्षेत्रों में पानी बेहद तेजी से बढ़ा। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक रासुवा क्षेत्र में भोटे कोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने की घटना का संबंध ऊपरी क्षेत्र में बर्फ और मलबे के अचानक नदी में आने से हो सकता है। इसकी पूरी वजह और घटनाक्रम को लेकर आकलन अभी जारी है। ऐसे पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए बहुत कम समय देती है।

गोविंद प्रसाद दाहाल की कहानी इसी व्यापक मानवीय त्रासदी का एक चेहरा है। उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 71 साल की उम्र में वह अपनी जिंदगी को दोबारा कैसे खड़ा करेंगे। घर और कारोबार दोनों खोने के बाद कर्ज का बोझ उनके लिए नई चुनौती बन गया है। उनकी स्थिति यह दिखाती है कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ तत्काल मौतों और क्षति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बचे हुए लोगों के लिए वर्षों तक आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा कर सकता है।

राहत के साथ पुनर्वास की चुनौती भी बड़ी

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत के साथ लंबे समय का पुनर्वास भी जरूरी होगा। जिन परिवारों ने घर, दुकान और रोजगार के साधन खो दिए हैं, उनके सामने सिर्फ रहने की जगह की समस्या नहीं है, बल्कि आय का स्रोत दोबारा खड़ा करने की चुनौती भी है। खासकर बुजुर्ग लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए यह नुकसान और ज्यादा गंभीर हो सकता है, क्योंकि उनके पास दोबारा शुरुआत करने के लिए सीमित समय और संसाधन होते हैं।

दाहाल के पास अब उनके पुराने कारोबार की जगह मलबा है और वर्षों की मेहनत के बाद जमा की गई संपत्ति की जगह कर्ज का बोझ। नेपाल की इस त्रासदी में हजारों लोगों की ऐसी ही कहानियां सामने आ रही हैं। बचाव अभियान लोगों की जान बचाने पर केंद्रित है, लेकिन इसके बाद असली चुनौती उन परिवारों को फिर से खड़ा करने की होगी, जिनकी पूरी आर्थिक नींव कुछ मिनटों की बाढ़ में बह गई।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आधिकारिक आपदा संबंधी जानकारी और घटनाक्रम पर आधारित है। नुकसान और मृतकों से जुड़े आंकड़े राहत एवं बचाव अभियान के साथ बदल सकते हैं। पीड़ित परिवार की संपत्ति और नुकसान से जुड़े आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों में बताए गए अनुमान पर आधारित हैं।

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Ashutosh Kumar Jha

Ashutosh Kumar Jha Admin

Ashutosh Kumar Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो भारत की राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। वे तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचार लिखने के लिए जाने जाते हैं।डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए Ashutosh Jha ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख और समाचार प्रकाशित किए हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक निष्पक्ष, प्रमाणिक और जनहित से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सरकारी नीतियों, सामाजिक बदलाव और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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