काठमांडू | 12 मार्च 2026: नेपाल के इतिहास में जब भी सबसे अमीर और सफल उद्योगपतियों का नाम लिया जाएगा, तो उसमें सबसे ऊपर Binod Chaudhary का नाम आएगा। वह नेपाल के इकलौते अरबपति (Billionaire) हैं, जिनकी सफलता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से बिल्कुल कम नहीं है।
काठमांडू के एक मध्यमवर्गीय मारवाड़ी परिवार में जन्मे इस बिजनेस टाइकून की जड़ें भारत के राजस्थान से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उनके दादा भूरमल दास चौधरी 19वीं सदी में रोजगार की तलाश में नेपाल गए थे और वहां कपड़े का एक छोटा सा कारोबार शुरू किया था।
आज उसी परिवार का पोता दुनिया के कई देशों में अपना बिजनेस फैला चुका है और ‘नूडल किंग’ (Noodle King) के नाम से पूरे दक्षिण एशिया में मशहूर है। उनकी यह बेमिसाल यात्रा हर उस युवा के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो अपने छोटे से आइडिया के दम पर दुनिया जीतना चाहता है।
CA की पढ़ाई अधूरी छूटी, कम उम्र में संभाला बिजनेस
Binod Chaudhary बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार छात्र थे और उनका सबसे बड़ा सपना भारत आकर चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई पूरी करने का था। वह अपनी सीए की तैयारी के लिए भारत आने ही वाले थे, लेकिन अचानक उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए।
परिवार के सबसे बड़े बेटे होने के नाते, उन पर घर और पिता के उस छोटे से व्यापार को संभालने की भारी जिम्मेदारी अचानक से आ गई। इस पारिवारिक मजबूरी ने उनकी जिंदगी की दिशा को पूरी तरह से बदल दिया और उन्होंने किताबों की दुनिया छोड़कर व्यापार की कठिन दुनिया में कदम रख दिया।
‘कॉपर फ्लोर’ से रखा खुद के बिजनेस में पहला कदम
पिता के व्यापार की बारीकियां सीखते हुए, साल 1973 में उन्होंने अपना पहला स्वतंत्र और एकदम नया बिजनेस शुरू करने का एक बड़ा फैसला किया। उन्होंने नेपाल की राजधानी काठमांडू में ‘कॉपर फ्लोर’ (Copper Floor) नाम से एक डिस्कोथेक (Nightclub) खोला, जो उस समय वहां के लिए काफी नया कॉन्सेप्ट था।
उनका यह पहला प्रयोग काफी सफल रहा और इसने उन्हें बाजार के ट्रेंड्स और ग्राहकों की नब्ज को समझने का एक बहुत बड़ा मौका दिया। हालांकि, उनके मन में यह बात अच्छी तरह बैठ गई थी कि अगर उन्हें दुनिया पर राज करना है, तो कुछ ऐसा प्रोडक्ट बनाना होगा जो हर घर और हर इंसान की रोजमर्रा की जरूरत हो।
थाईलैंड का वह सफर जिसने बदल दी पूरी तकदीर
उनके बिजनेस करियर का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ तब आया जब वह एक व्यापारिक यात्रा के सिलसिले में थाईलैंड गए हुए थे। थाईलैंड के बाजारों में घूमते हुए उन्होंने देखा कि वहां के लोग इंस्टेंट नूडल्स के काफी दीवाने हैं और यह उत्पाद हर छोटी-बड़ी दुकान पर आसानी से उपलब्ध है।
इसी एक छोटे से आइडिया ने उनके दिमाग में हलचल मचा दी और उन्होंने नेपाल वापस लौटकर तुरंत इंस्टेंट नूडल्स के बाजार में उतरने का साहसिक फैसला लिया। उन्होंने अपनी कंपनी के तहत ‘वाई-वाई’ (Wai Wai) ब्रांड नाम से नूडल्स बाजार में उतारे, जिसका खास स्वाद लोगों को तुरंत अपना दीवाना बना गया।
Wai Wai नूडल्स की ऐतिहासिक सफलता के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
- यूनिक स्वाद: इसमें पहले से ही मसाले मिले होते थे, जिसे बिना गैस पर पकाए सीधे पैकेट खोलकर स्नैक्स की तरह भी खाया जा सकता था।
- सस्ती कीमत: इसे आम जनता, मजदूरों और छात्रों के बजट को ध्यान में रखकर बेहद किफायती दाम पर बाजार में उतारा गया।
- जबरदस्त डिस्ट्रीब्यूशन: इसे नेपाल के सुदूर पहाड़ी गांवों से लेकर भारत के सुदूर राज्यों और विदेशों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया।
19 हजार करोड़ का साम्राज्य और फोर्ब्स में दबदबा
आज Binod Chaudhary का वही ‘वाई-वाई’ नूडल्स ब्रांड सिर्फ नेपाल या भारत में नहीं, बल्कि दुनिया के 30 से अधिक देशों में बड़े चाव से खाया जाता है। इंस्टेंट नूडल्स के इस विशाल ग्लोबल मार्केट ने उनकी संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि की और उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोर्ब्स (Forbes) की अरबपतियों की लिस्ट में शामिल कर दिया।
फोर्ब्स की ताजा और आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौजूदा कुल संपत्ति करीब 2.1 अरब डॉलर (लगभग 19 हजार करोड़ रुपये) के पार पहुंच चुकी है। उनका ‘चौधरी ग्रुप’ (CG Corp Global) आज फूड, बैंकिंग, रियल एस्टेट, एजुकेशन, टेलीकॉम और हॉस्पिटैलिटी जैसे दर्जनों सेक्टर्स में पूरी तरह छाया हुआ है।
भारत के ताज ग्रुप (Taj Hotels) के साथ बड़ी साझेदारी
भारत के साथ उनका नाता सिर्फ उनके पूर्वजों के जन्मस्थान राजस्थान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक रूप से भी यह रिश्ता काफी गहरा है। ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में विस्तार करते हुए उन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित ‘ताज ग्रुप ऑफ होटल्स’ (Taj Hotels) के साथ एक बहुत बड़ी रणनीतिक साझेदारी की है।
सीजी कॉर्प ग्लोबल और ताज होटल्स ने मिलकर कई लग्जरी वन्यजीव सफारी लॉज (Wildlife Safari Lodges) और शानदार प्रीमियम रिसॉर्ट्स का निर्माण किया है। यह शानदार साझेदारी आज भारत के साथ-साथ मालदीव, श्रीलंका और दुबई जैसे देशों में भी एक सफल हॉस्पिटैलिटी ब्रांड बन चुकी है।
2015 के भीषण भूकंप में दिखाई दरियादिली
जब साल 2015 में नेपाल में एक बेहद विनाशकारी भूकंप आया था, तब उनके ‘चौधरी ग्रुप’ ने राहत और बचाव कार्य में अपनी पूरी ताकत और खजाना झोंक दिया था। उन्होंने अपने खुद के खर्च पर नेपाल के बेघर हो चुके हजारों परिवारों के लिए पक्के ‘ट्रांजिट होम्स’ और दर्जनों स्कूलों का निर्माण करवाया।
व्यापार के साथ-साथ अपनी इस शानदार और संघर्षपूर्ण यात्रा को उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मेकिंग इट बिग’ (Making it Big) में बेहद बारीकी और ईमानदारी से पिरोया है। उनकी यह दरियादिली और उनका संघर्ष साबित करता है कि वे न सिर्फ एक चतुर बिजनेसमैन हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने वाले एक संवेदनशील इंसान भी हैं।
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