
राष्ट्रीय राजधानी की कड़ाके की ठंड के बीच, लोकतंत्र के मंदिर – संसद भवन – में सोमवार (दिसंबर 1, 2025) को शीतकालीन सत्र की शुरुआत अत्यंत गर्मजोशी और हंगामेदार रही। राजनीतिक गहमागहमी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच, सत्र के पहले दिन की कार्यवाही मुख्य रूप से विपक्षी दलों के जोरदार विरोध-प्रदर्शन और लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों सदनों में हुए कई बार के स्थगन (Adjournments) की भेंट चढ़ गई।
लोकसभा में विपक्ष का भारी हंगामा: ‘SIR’ बना मुख्य मुद्दा
संसद के निचले सदन, लोकसभा, में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सांसदों ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) ऑफ इलेक्टोरल रोल्स को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि देश भर में चल रहे मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण अभ्यास में बड़े पैमाने पर ‘चुनावी धोखाधड़ी’ हुई है।
•नारेबाजी और स्थगन: जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद आसन के पास आ गए और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाने लगे। वे SIR मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे।
•पहले केवल 15-20 मिनट के विधायी कामकाज के बाद सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
•12 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी स्थिति नहीं सुधरी, और सांसदों के लगातार नारेबाजी के बीच सदन को फिर से दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
•लगातार विरोध और हंगामे के कारण, विधायी कार्य मुश्किल से हो पाया। अंततः, अध्यक्ष पीठ पर बैठे सांसद ने सदन को मंगलवार, 2 दिसंबर तक के लिए दिन भर के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
•स्पीकर की अपील: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे के बीच कई बार सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन को बाधित करना ‘लोकतांत्रिक परंपरा’ के लिए सही नहीं है।
•विधेयक पारित (हंगामे के बीच): हंगामे के बावजूद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मणिपुर माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025 सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए। रिपोर्टों के अनुसार, मणिपुर से संबंधित GST संशोधन विधेयक को शोर-शराबे के बीच ही संक्षिप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया गया।
•पीएम मोदी का तंज और विपक्ष का पलटवार: सत्र शुरू होने से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘ड्रामा और नारेबाजी’ के लिए कई जगहें हैं, लेकिन संसद को ‘डिलीवरी’ (परिणाम) का स्थान होना चाहिए, ‘ड्रामा’ का नहीं। इस पर विपक्ष के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाना ‘ड्रामा’ नहीं है, बल्कि यह सरकार की ‘नकारात्मकता’ है।
राज्यसभा में नए सभापति का स्वागत और गतिरोध
उच्च सदन, राज्यसभा, में भी पहले दिन की शुरुआत तो हुई, लेकिन जल्द ही यह ‘SIR’ और नए नेतृत्व के मुद्दों के बीच अटक गई।
•नए सभापति का औपचारिक स्वागत: राज्यसभा में कार्यवाही की शुरुआत उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का सदन के नए सभापति के रूप में औपचारिक स्वागत करने के साथ हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभापति का स्वागत करते हुए उनके साधारण पृष्ठभूमि और सामाजिक सेवा के प्रति उनके आजीवन समर्पण की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि उनका इस पद तक पहुंचना भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत को दर्शाता है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सभापति का स्वागत किया, लेकिन साथ ही उनसे अपने कार्यकाल के दौरान ‘गैर-पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ बनाए रखने का आग्रह किया।
•हंगामे के कारण स्थगन: नए सभापति के स्वागत के बाद, विपक्ष ने तुरंत SIR मुद्दे पर बहस की मांग शुरू कर दी।
विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन ने सभापति से अनुरोध किया कि वे चुनाव सुधारों से जुड़े इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा की अनुमति दें।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जोर देकर कहा कि सरकार SIR या चुनाव सुधारों पर चर्चा के खिलाफ नहीं है, लेकिन सदन को सूचीबद्ध (Listed) मामलों को पहले लेना चाहिए।
लगातार शोरगुल और नारेबाजी के कारण, राज्यसभा को भी दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित किया गया, और बाद में भी गतिरोध जारी रहा, जिसके बाद सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।
महत्वपूर्ण विधायी एजेंडा: 13 विधेयक लाइन में
सरकार ने इस शीतकालीन सत्र के लिए कुल 13 विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिन्हें सदन में विचार और पारित करने के लिए रखा जाना है। इनमें से कई महत्वपूर्ण विधेयक हैं जिन पर गहन चर्चा की आवश्यकता है:
1.जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025: जिसका उद्देश्य ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को बढ़ावा देना है।
2.दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025
3.निरसन और संशोधन विधेयक, 2025।
4.परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025: जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
5.राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2025
हालांकि, सत्र के पहले दिन की कार्यवाही के हंगामे की भेंट चढ़ जाने से, इन विधेयकों पर अपेक्षित चर्चा हो पाएगी या नहीं, इस पर अब संशय बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण: आने वाले दिनों के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शीतकालीन सत्र का पहला दिन आने वाले दिनों के लिए एक स्पष्ट संकेत है। विपक्ष ने अपनी एकजुटता और SIR (मतदाता पुनरीक्षण) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा (दिल्ली विस्फोट) जैसे मुद्दों पर अपनी आक्रामकता का प्रदर्शन किया है।
•टकराव तय: विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव अगले 19 दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिससे सदन की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
•’वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा: सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष चर्चा का प्रस्ताव भी रखा है, जिसके लिए 10 घंटे आवंटित किए गए हैं। यह चर्चा इस सप्ताह के अंत में हो सकती है।
•मृत्युलेख संदर्भ: कार्यवाही शुरू होने से पहले, लोकसभा में पूर्व सांसदों, जिनमें अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र भी शामिल थे, के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।
निष्कर्ष: कार्यवाही पर प्रश्नचिह्न
संसद का शीतकालीन सत्र, जो कुल 19 दिनों की अवधि में 15 बैठकों के लिए निर्धारित है, पहले ही दिन से एक तूफानी सत्र होने के संकेत दे चुका है। जहां एक ओर सरकार सत्र को उत्पादक बनाने की अपील कर रही है, वहीं विपक्ष चुनावी सुधारों और जनहित के मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।
अब सबकी निगाहें मंगलवार (2 दिसंबर) की कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या सदन के नेता कोई आम सहमति बनाकर गतिरोध को तोड़ पाएंगे, या फिर देश की सबसे बड़ी विधायी संस्था एक बार फिर राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बनी रहेगी। देश की जनता अपेक्षा रखती है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि हंगामा छोड़कर, उन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और आर्थिक विधेयकों पर चर्चा करें जो देश के भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
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