सोशल मीडिया की दुनिया में अफवाहें और स्कैम रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर कोहराम मचा रहे 19 Minute Viral Video के मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। हरियाणा पुलिस और साइबर सेल ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट साझा करते हुए एक नई एडवाइजरी जारी की है।
13 दिसंबर की ताजा अपडेट के मुताबिक, पुलिस ने पुष्टि कर दी है कि वायरल हो रहा यह वीडियो पूरी तरह से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और ‘डीपफेक’ तकनीक का नतीजा है।
लेकिन खतरा यहीं खत्म नहीं होता। पुलिस ने खुलासा किया है कि स्कैमर्स ने अब एक नई चाल चली है। “19 मिनट” के वीडियो के बाद अब सोशल मीडिया पर “Part 2” और “Part 3” के नाम से नए लिंक फैलाए जा रहे हैं। ये लिंक पहले वाले से भी ज्यादा खतरनाक हैं।
जांच अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जो भी यूजर इन लिंक्स को फॉरवर्ड कर रहा है या डाउनलोड करने की कोशिश कर रहा है, वह अनजाने में एक बड़े अपराध का हिस्सा बन रहा है।
आज की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको इस वायरल वीडियो का सबसे लेटेस्ट अपडेट, पुलिस की नई चेतावनी और ‘पार्ट 2’ के नाम पर चल रहे नए सिंडिकेट के बारे में सब कुछ बताएंगे। अगर आप या आपके परिचित इस वीडियो को ढूंढ रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए एक ‘रेड अलर्ट’ है।
हरियाणा एनसीबी साइबर सेल के अधिकारी अमित यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर “19 मिनट 34 सेकंड” के नाम से जो वीडियो वायरल है, वह किसी वास्तविक घटना का नहीं है। फॉरेंसिक जांच में पाया गया है कि वीडियो में दिख रहे चेहरे और आवाज एआई टूल्स की मदद से बनाए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि यह एक ‘सिंथेटिक मीडिया’ है। इसका मकसद सिर्फ सनसनी फैलाना और लोगों को ठगना है। अधिकारी ने लोगों को सलाह दी है कि वे ‘Sightengine’ जैसी वेबसाइट्स का इस्तेमाल करके किसी भी संदिग्ध वीडियो की सत्यता की जांच कर सकते हैं। पुलिस के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि यह कोई असली लीक एमएमएस है।
‘Part 2’ और ‘Part 3’ का नया स्कैम
जब साइबर अपराधियों ने देखा कि लोग 19 मिनट वाले वीडियो में दिलचस्पी ले रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत अपनी रणनीति बदल दी। पिछले 24 घंटों में टेलीग्राम और ट्विटर (X) पर “Watch Part 2” और “Leaked Part 3” के हजारों लिंक बाढ़ की तरह आ गए हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये नए लिंक ‘मैलवेयर बम’ की तरह हैं। जैसे ही कोई यूजर इन पर क्लिक करता है, उसके फोन में एक रैनसमवेयर (Ransomware) डाउनलोड हो सकता है। यह वायरस आपके फोन को लॉक कर सकता है और उसे खोलने के बदले में पैसे मांग सकता है।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि “पार्ट 2” जैसा कोई वीडियो अस्तित्व में ही नहीं है। यह सिर्फ यूजर्स की उत्सुकता (Curiosity) का फायदा उठाने के लिए बनाया गया एक भ्रम है। इन लिंक्स के साथ अक्सर “अनसीन फुटेज” या “डिलीट होने से पहले देखें” जैसे लुभावने कैप्शन लिखे होते हैं, जिनसे बचकर रहना बेहद जरूरी है।
निर्दोष इन्फ्लुएंसर्स बन रहे निशाना
इस पूरे प्रकरण का सबसे दुखद पहलू यह है कि कई निर्दोष सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इसका शिकार बनाया जा रहा है। ‘स्वीट जन्नत’ (Sweet Zannat) और ‘सोफिक एसके’ (Sofik SK) जैसे कंटेंट क्रिएटर्स के नाम इस वीडियो के साथ जबरदस्ती जोड़े जा रहे हैं।
हाल ही में स्वीट जन्नत ने एक वीडियो जारी कर अपना दर्द बयां किया। उन्होंने रोते हुए कहा कि लोग बिना सच्चाई जाने उनके कमेंट सेक्शन में “19 मिनट” लिख रहे हैं, जबकि वीडियो में दिख रही लड़की से उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह साइबर बुलिंग का एक भद्दा उदाहरण है।
पुलिस ने ऐसे कमेंट्स करने वालों को भी चेतावनी दी है। किसी की पहचान को गलत तरीके से वायरल वीडियो से जोड़ना मानहानि और आईटी एक्ट के तहत अपराध है। पुलिस अब ऐसे ट्रोल्स की पहचान कर रही है जो इन्फ्लुएंसर्स को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
आईटी एक्ट की धाराओं में सीधे जेल
हरियाणा पुलिस ने अपनी लेटेस्ट एडवाइजरी में कानूनी परिणामों को और सख्ती से लागू करने की बात कही है। पुलिस के मुताबिक, 19 Minute Viral Video या उसके किसी भी कथित पार्ट को शेयर करना आईटी एक्ट की धारा 67 और 67A का उल्लंघन है।
- धारा 67: अश्लील सामग्री प्रसारित करने पर 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 67A: यौन कृत्य वाली सामग्री प्रसारित करने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माना।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि “फॉरवर्ड” करना भी “प्रसारित” करने की श्रेणी में आता है। भले ही आपने वीडियो नहीं बनाया, लेकिन अगर आप उसे एक ग्रुप से दूसरे ग्रुप में भेज रहे हैं, तो आप अपराधी हैं। कई वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन्स को नोटिस भेजे जा चुके हैं।
डेटा चोरी का नया तरीका: ‘कैमरा हैकिंग’
साइबर सुरक्षा फर्मों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। “पार्ट 2” के नाम पर जो ऐप्स डाउनलोड करवाए जा रहे हैं, वे यूजर के फोन का कैमरा और माइक्रोफोन हैक कर रहे हैं। इसका मतलब है कि आप वीडियो देखने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरी तरफ हैकर्स आपको देख रहे हैं।
वे आपके निजी पलों को रिकॉर्ड कर सकते हैं और बाद में आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं। इसे ‘सेक्सटोर्शन’ (Sextortion) कहा जाता है। पिछले एक हफ्ते में ऐसे मामलों में 40% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह स्कैम अब सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित अपराध बन चुका है।
कैसे करें अपनी और अपनों की सुरक्षा?
इस डिजिटल महामारी से बचने का एकमात्र उपाय जागरूकता है। अगर आपके पास ऐसा कोई लिंक आता है, तो उसे तुरंत डिलीट करें (Delete for Everyone नहीं, बल्कि अपने लिए डिलीट करें और रिपोर्ट करें)।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। अगर आप किसी ग्रुप में हैं जहां ऐसे वीडियो शेयर हो रहे हैं, तो तुरंत उस ग्रुप से बाहर निकल जाएं (Exit Group) और एडमिन को रिपोर्ट करें।
आपका छोटा सा सहयोग हमारी पत्रकारिता को नई मजबूती देता है।
अपने घर के बच्चों और युवाओं पर खास नजर रखें। यह ट्रेंड टीनएजर्स के बीच तेजी से फैल रहा है। उन्हें समझाएं कि इंटरनेट पर एक गलत क्लिक उनके भविष्य को कैसे अंधकारमय कर सकता है।
निष्कर्ष: अफवाहों का अंत जरूरी
अंत में, 19 Minute Viral Video का सच अब सबके सामने है। यह एक एआई जनरेटेड फेक वीडियो है जिसका इस्तेमाल डेटा चोरी और ठगी के लिए किया जा रहा है। पुलिस की सक्रियता और हमारी जागरूकता ही इस चेन को तोड़ सकती है।
जिज्ञासा इंसान का स्वभाव है, लेकिन जब जिज्ञासा अपराध और खतरे की सीमा पार कर जाए, तो उसे रोकना ही समझदारी है। सुरक्षित इंटरनेट का उपयोग करें और जिम्मेदार नागरिक बनें।
Related Disclaimer : यह समाचार रिपोर्ट 13 दिसंबर 2025 तक की नवीनतम पुलिस एडवाइजरी और साइबर सेल की जांच पर आधारित है। हमारा उद्देश्य पाठकों को ऑनलाइन स्कैम और डीपफेक के खतरों से बचाना है। हम किसी भी प्रकार की अश्लील या भ्रामक सामग्री के प्रसार का कड़ा विरोध करते हैं।