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AQI Level Update: देश की हवा हुई जहरीली, कई शहरों में सांस लेना हुआ दूभर, जानें आज आपके शहर में कितना है प्रदूषण का स्तर

देश भर में प्रदूषण का कहर जारी है। 13 दिसंबर को कई शहरों में AQI Level गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। सुबह की सैर करने वालों के लिए डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Khabar Aangan Sunday, 14 December 2025, 12:10 AM
AQI Level Update: देश की हवा हुई जहरीली, कई शहरों में सांस लेना हुआ दूभर, जानें आज आपके शहर में कितना है प्रदूषण का स्तर
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दिसंबर का महीना अपने मध्य पड़ाव पर पहुंच चुका है और उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण ने भी जोरदार दस्तक दी है। आज 13 दिसंबर 2025 को सुबह से ही कई बड़े शहरों में धुंध और स्मॉग की चादर देखने को मिल रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में AQI Level एक बार फिर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है।

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सर्दियों के मौसम में हवा की गति धीमी होने और तापमान गिरने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में नीचे ही रह जाते हैं। यही वजह है कि सुबह और शाम के समय प्रदूषण का स्तर अपने चरम पर होता है।

केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि मुंबई, पुणे, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI Level बिगड़ता जा रहा है। अस्पतालों में सांस और अस्थमा के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है।

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सरकार और प्रशासन द्वारा ग्रैप (GRAP) के तहत कई पाबंदियां लगाई गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। आज के इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको देश के प्रमुख शहरों के प्रदूषण स्तर, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे। अगर आप भी सुबह की सैर पर निकलते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

क्या होता है AQI और इसे कैसे मापा जाता है?

वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) एक पैमाना है जिसका इस्तेमाल हवा की शुद्धता या प्रदूषण को मापने के लिए किया जाता है। यह बताता है कि आज आप जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह कितनी सुरक्षित या खतरनाक है। इसमें 0 से 500 तक की रीडिंग होती है। जितनी ज्यादा रीडिंग, उतना ही ज्यादा खतरा।

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शून्य से 50 के बीच का AQI Level ‘अच्छा’ माना जाता है। 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

जब यह स्तर 400 के पार जाता है, तो स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और बीमार लोगों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।

इस सूचकांक को तय करने में हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 जैसे कणों की मात्रा अहम भूमिका निभाती है। PM 2.5 इतने सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के जरिए सीधे हमारे फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। सर्दियों में इन्हीं कणों की मात्रा सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।

दिल्ली-एनसीआर में हालात ‘गंभीर’, सांसों पर संकट

देश की राजधानी दिल्ली में आज 13 दिसंबर को प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब है। कई इलाकों में AQI Level 400 के आंकड़े को छू रहा है। आनंद विहार, बवाना और आरके पुरम जैसे हॉटस्पॉट्स में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई है। सुबह के समय घने कोहरे और धुएं के मिश्रण (स्मॉग) ने दृश्यता (Visibility) को भी कम कर दिया है।

नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद का हाल भी दिल्ली जैसा ही है। यहां भी AQI Level 300 से 350 के बीच बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। स्कूलों में आउटडोर एक्टिविटीज पर रोक लगा दी गई है। ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू होने के बावजूद प्रदूषण के स्तर में कोई खास गिरावट देखने को नहीं मिल रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक हवा की गति धीमी रहने का अनुमान है, जिससे प्रदूषण से राहत मिलने के आसार कम हैं। पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बावजूद, वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल इस समय प्रदूषण के मुख्य कारण बने हुए हैं।

मुंबई और पुणे की हवा भी हुई खराब

अक्सर माना जाता है कि समुद्र तटीय शहर होने के कारण मुंबई की हवा साफ रहती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह धारणा बदल गई है। आज मुंबई के कई इलाकों में AQI Level ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया है। बीकेसी (BKC), कोलाबा और अंधेरी जैसे क्षेत्रों में धूल और धुएं का गुबार देखा जा सकता है। वहां चल रहे भारी निर्माण कार्यों को इसका मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है।

वहीं, महाराष्ट्र के पुणे शहर में भी स्थिति अच्छी नहीं है। आज 13 दिसंबर को पुणे के शिवाजीनगर, पाषाण और हडपसर इलाकों में AQI Level ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी के बीच झूल रहा है।

शहर में बढ़ रही वाहनों की संख्या और ठंड के कारण प्रदूषकों का जमाव हवा को जहरीला बना रहा है। पुणे में सुबह की सैर करने वालों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें हो रही हैं।

अन्य महानगरों की बात करें तो कोलकाता और चेन्नई में स्थिति मिली-जुली है। कोलकाता में ठंड बढ़ने के साथ प्रदूषण बढ़ा है, जबकि चेन्नई में अभी हालात नियंत्रण में हैं। लखनऊ और कानपुर जैसे उत्तर प्रदेश के शहरों में भी वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार चल रहा है।

स्वास्थ्य पर पड़ता है गहरा असर

बढ़ता हुआ AQI Level हमारे शरीर के लिए धीमे जहर का काम करता है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह दिल और दिमाग पर भी बुरा असर डालता है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक खराब हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को होता है। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषण का उन पर ज्यादा असर पड़ता है। बुजुर्गों में यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है। PM 2.5 कण खून में मिलकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाते हैं और सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं।

आंखों में जलन, गले में संक्रमण, लगातार खांसी आना और सीने में जकड़न महसूस होना प्रदूषण के शुरुआती लक्षण हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और बाहर निकलना बंद कर दें।

प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

मौजूदा हालात को देखते हुए खुद को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। जब AQI Level खराब हो, तो घर से बाहर निकलते समय एन-95 (N-95) मास्क का प्रयोग जरूर करें। साधारण कपड़े का मास्क प्रदूषण के बारीक कणों को रोकने में कारगर नहीं होता। सुबह और शाम के समय, जब प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है, आउटडोर एक्सरसाइज या मॉर्निंग वॉक से बचें।

घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर प्यूरीफायर नहीं है, तो कुछ ऐसे पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध करते हैं, जैसे स्नेक प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट। घर की खिड़कियां और दरवाजे सुबह-शाम बंद रखें ताकि बाहर का धुआं अंदर न आ सके।

अपने खानपान में भी बदलाव करें। विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाएं जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं। गुड़, अदरक, तुलसी और शहद का सेवन फेफड़ों को डिटॉक्स करने में मदद करता है। पानी खूब पिएं ताकि शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल सकें।

सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम

प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया है। इसके तहत AQI Level के आधार पर अलग-अलग चरणों में पाबंदियां लगाई जाती हैं। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों पर सख्ती है और बीएस-3 पेट्रोल व बीएस-4 डीजल गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा है और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा, अवैध रूप से कूड़ा जलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। सरकार लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

हालांकि, पर्यावरणविदों का मानना है कि ये कदम फौरी राहत तो दे सकते हैं, लेकिन समस्या के स्थाई समाधान के लिए और कड़े फैसलों की जरूरत है। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करना ही इसका दीर्घकालिक उपाय है।

निष्कर्ष: जागरूकता ही बचाव है

वायु प्रदूषण आज एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है। सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारी भी भूमिका है। हम अपने वाहनों का प्रदूषण जांच समय पर कराएं, रेड लाइट पर इंजन बंद करें और कूड़ा न जलाएं।

आज का AQI Level हमारे लिए एक चेतावनी है। अगर हम अभी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों को हम साफ हवा नहीं दे पाएंगे। अपनी सेहत का ख्याल रखें, मास्क पहनें और प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में अपना योगदान दें। सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें।

Related Disclaimer : यह लेख केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और मौसम विभाग द्वारा 13 दिसंबर 2025 को जारी किए गए आंकड़ों पर आधारित है। वायु गुणवत्ता का स्तर हर घंटे बदल सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए कृपया डॉक्टर से परामर्श लें।

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