जयपुर, 2 सितंबर 2026: अभिनेत्री स्वरा भास्कर की फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर की गई टिप्पणी पर राजस्थान में विवाद तेज हो गया है। करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे क्षत्राणियों के बलिदान का अपमान बताया और अभिनेत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वह हलाला प्रथा पर भी सवाल उठाकर दिखाएं।
स्वरा ने जौहर के दृश्य को बताया था समस्याग्रस्त
विवाद की शुरुआत उस टिप्पणी से हुई जिसमें स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत के जौहर वाले दृश्य पर अपनी पुरानी आपत्ति दोहराई। 31 अगस्त को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि फिल्म का क्लाइमेक्स उन्हें क्यों परेशान करने वाला लगा था। उनका सवाल मुख्य रूप से इस बात को लेकर था कि जौहर को जिस तरह दिखाया गया, उससे यौन हिंसा से बची किसी महिला तक क्या संदेश पहुंच सकता है।
स्वरा की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। आलोचकों ने कहा कि जौहर जैसी ऐतिहासिक घटना को केवल आधुनिक नजरिए से देखने के बजाय उसके तत्कालीन सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ को भी समझना चाहिए। इसी विवाद के बीच करणी सेना की राजस्थान महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने स्वरा पर क्षत्राणियों और उनके बलिदान को अपमानित करने का आरोप लगाया।
करणी सेना ने दी हलाला पर बयान देने की चुनौती
करणी सेना की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कीर्ति राठौड़ ने कहा कि स्वरा भास्कर को जौहर के इतिहास और उसके संदर्भ की जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक अभिनेत्री की टिप्पणी वीरांगनाओं के बलिदान का अपमान है। इसी दौरान उन्होंने स्वरा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह इस्लाम में प्रचलित हलाला प्रथा पर भी सवाल उठाकर दिखाएं। इस बयान के बाद विवाद ने नया राजनीतिक-सामाजिक रंग ले लिया है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि स्वरा भास्कर ने बाद में अपने बयान को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप के आधार पर उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। स्वरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा था। उनका सवाल फिल्म में जौहर के चित्रण और उससे निकलने वाले संदेश को लेकर था।
अभिनेत्री ने कहा गलत अनुवाद के कारण बनी विवाद की स्थिति
स्वरा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि कार्यक्रम में उनसे उनके पुराने खुले पत्र और पद्मावत के जौहर दृश्य को लेकर सवाल किया गया था। जवाब देते हुए उन्होंने बताया था कि उन्हें दृश्य में किस बात से परेशानी थी। उनका कहना है कि उनके शब्दों का गलत अनुवाद कर यह धारणा बनाई गई कि उन्होंने पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर बताया। उन्होंने लोगों से मूल वीडियो देखकर उनकी बात समझने की अपील भी की।
स्वरा का तर्क फिल्म के संदेश से जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी प्रस्तुति किसी यौन हिंसा से बची महिला को किस तरह प्रभावित कर सकती है और क्या किसी महिला की जिंदगी की तुलना उसकी शारीरिक पवित्रता या सम्मान से की जानी चाहिए। दूसरी ओर, उनके आलोचकों का कहना है कि जौहर को उस समय की परिस्थितियों और ऐतिहासिक संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए। यही अलग-अलग दृष्टिकोण इस विवाद को लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं।
बयान से आगे बढ़कर अब ऐतिहासिक और सामाजिक बहस
स्वरा भास्कर और करणी सेना के बीच सामने आया यह विवाद केवल एक फिल्मी दृश्य तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ अभिनेत्री फिल्म में जौहर के चित्रण और उसके संभावित सामाजिक संदेश पर सवाल उठा रही हैं, वहीं करणी सेना इसे राजपूत महिलाओं के ऐतिहासिक बलिदान और सम्मान से जोड़कर देख रही है। स्वरा की सफाई के बाद विवाद का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है कि वायरल क्लिप और मूल बयान के बीच कितना अंतर है।
फिलहाल करणी सेना की प्रतिक्रिया और स्वरा भास्कर की सफाई दोनों सार्वजनिक हो चुकी हैं। ऐसे में इस विवाद का केंद्र अब केवल यह नहीं है कि पद्मावत में जौहर को किस तरह दिखाया गया, बल्कि यह भी है कि ऐतिहासिक घटनाओं को आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण से देखने और उनके पारंपरिक ऐतिहासिक अर्थ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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