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जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग, 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के रास्ते

4 सितंबर 2026 की जन्माष्टमी को ज्योतिषीय दृष्टि से खास बताया जा रहा है। रोहिणी नक्षत्र और शुभ योगों के बीच वृषभ, सिंह, वृश्चिक और मकर राशि के लिए लाभ के संकेत हैं।
Khabar Aangan Published on: 2 सितम्बर 2026
जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग, 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के रास्ते
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नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इस वर्ष 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर ऐसे संयोग बन रहे हैं, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण के जन्मकाल से जोड़ा जा रहा है। इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इसके साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का संयोग भी बताया जा रहा है।

जन्माष्टमी पर बन रहे हैं ये शुभ संयोग

पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर 4 सितंबर को चंद्रमा वृषभ राशि में रहने के साथ रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मकथा में भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी, मध्यरात्रि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि के चंद्रमा का उल्लेख मिलता है। इसी समानता के कारण इस वर्ष की जन्माष्टमी को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है।

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इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग बनने की बात कही गई है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों और सफलता से जोड़कर देखा जाता है, जबकि हर्षण योग को प्रसन्नता और सकारात्मकता से संबंधित माना जाता है। हालांकि इन योगों के प्रभाव और भविष्यफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

वृषभ राशि वालों को मिल सकता है विशेष लाभ

जन्माष्टमी का यह संयोग वृषभ राशि के जातकों के लिए विशेष बताया गया है। इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में ही रहने और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव होने के कारण ज्योतिषीय गणना में इसे इस राशि के लिए अनुकूल स्थिति माना गया है। अटकी हुई योजनाओं में गति आने, आत्मविश्वास बढ़ने और कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना बताई गई है।

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आर्थिक मामलों में भी वृषभ राशि के जातकों के लिए सकारात्मक संकेत बताए गए हैं। नौकरी या व्यवसाय में लिए गए निर्णयों से लाभ मिलने और धन से जुड़े मामलों में सुधार की संभावना जताई गई है। हालांकि वास्तविक आर्थिक निर्णय केवल राशिफल के आधार पर नहीं लेने चाहिए।

सिंह राशि के लिए करियर और कारोबार में अवसर

सिंह राशि के जातकों के लिए सर्वार्थ सिद्धि और हर्षण योग को करियर तथा कारोबार की दृष्टि से शुभ बताया गया है। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं, जबकि कारोबार करने वालों के लिए विस्तार की संभावना बन सकती है। सामाजिक स्तर पर मान-सम्मान बढ़ने और पुराने निवेश या पैतृक संपत्ति से लाभ के संकेत भी बताए गए हैं।

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वृश्चिक राशि को रिश्तों और व्यापार में फायदा

वृश्चिक राशि वालों के लिए जन्माष्टमी पर बनने वाले ग्रहों के संयोग को साझेदारी और दांपत्य जीवन के लिहाज से सकारात्मक बताया गया है। जीवनसाथी का सहयोग मिलने और रिश्तों में मधुरता बढ़ने की संभावना जताई गई है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए नए समझौते या सौदे होने तथा लंबे समय से अटके धन की वापसी के संकेत भी ज्योतिषीय गणना में बताए गए हैं।

मकर राशि वालों के लिए शिक्षा और आय के संकेत

मकर राशि के जातकों के लिए रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग शुभ बताया गया है। खासकर विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को सकारात्मक समाचार मिलने की संभावना जताई गई है। परिवार में खुशी का माहौल रहने और आय के नए स्रोत बनने की बात भी कही गई है। ऐसे में जन्माष्टमी का यह पर्व मकर राशि के जातकों के लिए उम्मीद और सकारात्मकता से जुड़ा बताया जा रहा है।

जन्माष्टमी की रात क्या उपाय करने की मान्यता है

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक करना और तुलसी के साथ माखन-मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए चंद्रमा को अर्घ्य देने तथा “ॐ क्लीं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करने की सलाह दी गई है।

इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि मध्यरात्रि की पूजा का समय 5 सितंबर की शुरुआत तक जा सकता है। इसी वजह से कुछ स्थानों पर तारीख को लेकर भ्रम दिखाई दे रहा है, लेकिन मुख्य पर्व की तिथि 4 सितंबर ही बताई जा रही है। पूजा और व्रत के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग का पालन करना बेहतर रहेगा।

Disclaimer – यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित है। राशियों के बताए गए प्रभाव धार्मिक एवं ज्योतिषीय विश्वासों का हिस्सा हैं, इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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