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पुत्रदा एकादशी 23 या 24 अगस्त? जानें सही व्रत तारीख, पूजा मुहूर्त, पारण समय और जरूरी नियम

23 या 24 अगस्त, किस दिन रखें पुत्रदा एकादशी का व्रत? तारीख को लेकर चल रहे कन्फ्यूजन के बीच जानिए कौन सी तिथि किस परंपरा के लिए है, पूजा कब करें और व्रत खोलने का सही समय क्या रहेगा।
Khabar Aangan Published on: 22 अगस्त 2026
पुत्रदा एकादशी 23 या 24 अगस्त? जानें सही व्रत तारीख, पूजा मुहूर्त, पारण समय और जरूरी नियम
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नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी को लेकर इस बार तारीख का कन्फ्यूजन बना हुआ है। कहीं 23 अगस्त तो कहीं 24 अगस्त को व्रत की बात सामने आ रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर व्रत किस दिन रखा जाए और पारण कब किया जाए? पंचांग के अनुसार, स्मार्त परंपरा में पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, जबकि वैष्णव संप्रदाय में 24 अगस्त को व्रत रखने की परंपरा बताई गई है।

23 या 24 अगस्त, आखिर कब है पुत्रदा एकादशी?

तारीख को लेकर भ्रम की वजह एकादशी तिथि का दो तारीखों के बीच होना है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर स्मार्त परंपरा में 23 अगस्त को व्रत रखा जाएगा। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए 24 अगस्त की तारीख बताई गई है।

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इसलिए अगर आप सामान्य गृहस्थ परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते हैं, तो 23 अगस्त रविवार को व्रत रखना प्रमुख तिथि मानी जा रही है। हालांकि अलग-अलग पंचांग और धार्मिक परंपराओं में गणना का अंतर हो सकता है। ऐसे में वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि तय करनी चाहिए।

पुत्रदा एकादशी का व्रत क्यों माना जाता है खास?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे संतान सुख, संतान की खुशहाली तथा परिवार की समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। सावन मास में आने वाली इस एकादशी को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और दान-पुण्य करते हैं। हालांकि संतान प्राप्ति या किसी अन्य मनोकामना की पूर्ति से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित परिणाम नहीं।

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पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। एक पौष मास में और दूसरी सावन मास में। सावन की पुत्रदा एकादशी चातुर्मास के दौरान पड़ती है, इसलिए वैष्णव परंपरा में इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना कर श्रद्धालु परिवार के सुख-शांति और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

पूजा के लिए कौन सा समय और क्या विधि रखें?

पुत्रदा एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद पूजा स्थान की सफाई करने और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है। पूजा में पीले फूल, चंदन, फल, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण और शाम को आरती की जाती है।

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इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निराहार या फलाहार का संकल्प लेते हैं। एकादशी व्रत में सामान्य रूप से अनाज का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए कठोर उपवास जरूरी नहीं है और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार ही व्रत रखना उचित माना जाता है।

24 अगस्त को होगा पारण, समय का रखें ध्यान

पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वालों के लिए अगले दिन पारण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार 24 अगस्त को पारण किया जाएगा। अलग-अलग पंचांगों में पारण के समय में कुछ अंतर दिया गया है और यह स्थान के सूर्योदय तथा स्थानीय गणना के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिया गया द्वादशी पारण समय देखना बेहतर रहेगा।

यानी इस बार सबसे अहम बात यह है कि 23 अगस्त की एकादशी तिथि को लेकर सामान्य स्मार्त परंपरा में व्रत रखा जाएगा, जबकि वैष्णव संप्रदाय में 24 अगस्त की तिथि अलग हो सकती है। इसी अंतर की वजह से 23 और 24 अगस्त को लेकर भ्रम पैदा हुआ है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार सही तिथि और स्थानीय पारण समय का पालन करें।

Disclaimer: यह लेख प्रकाशित पंचांग और धार्मिक स्रोतों में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। तिथि और पारण के समय में स्थान तथा परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें।

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