
धनबाद में इस बार काली पूजा को लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। दीपावली की रात को मनाई जाने वाली यह पूजा न केवल धार्मिक उत्सव है,बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की मिसाल भी बन गई है। इस वर्ष 20 अक्टूबर को काली पूजा मनाई जाएगी, जिसकी निशीथ काल पूजा रात 11:55 बजे से 12:44 बजे तक निर्धारित है।

हीरापुर में इको-फ्रेंडली पंडाल आकर्षण का केंद्र
धनबाद के हीरापुर क्षेत्र में श्री श्यामा पूजा समिति अपनी 46वीं वर्षगांठ पर “प्रकृति की रचना” (Creation of Nature) थीम पर भव्य काली पूजा आयोजित कर रही है। यह पूजा इस बार विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण संदेश के साथ इको-फ्रेंडली थीम में की जा रही है। पंडाल की सजावट प्राकृतिक सामग्री जैसे नारियल के छिलके, बांस की लकड़ी, बेल फल, जूट की चटाई, केले के पत्ते और आमला के बीज से की जा रही है। इस पंडाल की अनुमानित लागत लगभग 12 लाख रुपये है जबकि पूरे आयोजन का कुल बजट 20 लाख रुपये तक का है।समिति इस बार पूजा प्रसाद योजना भी चल रही है जिसमें 100 रुपये की सहयोग राशि से भक्त भाग ले सकते हैं और पुरस्कार जीत सकते हैं।
बंगाल के कारीगर और पारंपरिक आकर्षण
इस वर्ष बंगाल के नदियापुर से आए कारीगर पंडाल निर्माण में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं पूजा के सभी वैदिक अनुष्ठानों के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष पुरोहित बुलाए गए हैं। ढोल-ढाक की पारंपरिक धुनों के लिए रामगढ़ से कलाकारों को आमंत्रित किया गया है, जो पूजा का माहौल और भी भक्ति-मय बनाएंगे।
पूजा की परंपरा और भक्ति का उत्साह
हीरापुर चिल्ड्रन पार्क में यह पूजा 1980 से लगातार हो रही है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु मां काली की आराधना के लिए यहां जुटते हैं। इस बार पूजा की रात मां काली की आरती, पुष्पांजलि और भोग वितरण का आयोजन होगा। अगली सुबह भक्तों के लिए भंडारा रखा जाएगा, जिसमें खीर और खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाएगा। 23 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन खोखना तालाब में किया जाएगा।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन
शहर प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं। धनबाद पुलिस ने पूजा स्थलों और मेला क्षेत्रों में भीड़ नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी और अतिरिक्त पेट्रोलिंग की व्यवस्था की है। ट्रैफिक पुलिस ने धनबाद स्टेशन रोड, बैंक मोड़ और पार्क मार्केट के आसपास यातायात सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष योजना बनाई है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेला
हीरापुर झरनापाड़ा मैदान में इस बार चार दिवसीय मेला 20 से 23 अक्टूबर तक लगेगा, जिसमें झारखंड और बंगाल के स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। यहां खिलौने, झूले, सजावटी वस्तुएं, और स्थानीय उत्पादों की दुकानों के साथ मनोरंजन और भक्ति का शानदार संगम देखने को मिलेगा।






