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Ustaad Bhagat Singh मूवी रिव्यू: पवन कल्याण की गन और गालियां बॉक्स ऑफिस पर ला पाएंगी तूफान? या फिर ढीली कहानी कर देगी ‘गब्बर सिंह’ का जादू फीका?

Ustaad Bhagat Singh मूवी रिव्यू: पवन कल्याण की गन और गालियां बॉक्स ऑफिस पर ला पाएंगी तूफान? या फिर ढीली कहानी कर देगी ‘गब्बर सिंह’ का जादू फीका?

Ashutosh Kumar Jha Published on: 20 March 2026
Ustaad Bhagat Singh मूवी रिव्यू: पवन कल्याण की गन और गालियां बॉक्स ऑफिस पर ला पाएंगी तूफान? या फिर ढीली कहानी कर देगी ‘गब्बर सिंह’ का जादू फीका?
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आशुतोष कुमार झा | 19 मार्च 2026: पावर स्टार पवन कल्याण (Pawan Kalyan) की मोस्ट अवेटेड तेलुगु फिल्म Ustaad Bhagat Singh आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ‘गब्बर सिंह’ और ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ फेम डायरेक्टर हरीश शंकर और पवन कल्याण की सुपरहिट जोड़ी ने एक बार फिर से दर्शकों को एक हाई-ऑक्टेन मास एंटरटेनर देने का दावा किया था।

यह फिल्म बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ की आधिकारिक रीमेक है। लेकिन क्या पवन कल्याण का स्वैग और हरीश शंकर की गन व गालियां इस पुराने कंटेंट को एक नया और दिलचस्प रंग दे पाई हैं? क्या यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना पाएगी?

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ट्रेड पंडितों और दर्शकों के बीच इस फिल्म का क्रेज पिछले कई हफ्तों से चर्चा का विषय बना हुआ था। तो चलिए, बिना समय गंवाए जानते हैं कि क्या यह फिल्म वास्तव में आपके समय और पैसे के लायक है या नहीं?

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पवन कल्याण की वन-मैन शो, लेकिन ढीली कहानी है कमजोरी

फिल्म की सबसे बड़ी और एकमात्र ताकत खुद पवन कल्याण हैं। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें ‘पावर स्टार’ क्यों कहा जाता है। फिल्म में उनका स्वैग, उनकी एंट्री और उनके डायलॉग्स दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं। उनके फैन्स के लिए यह फिल्म एक परफेक्ट ट्रीट है, क्योंकि इसमें उन्हें वह सब कुछ देखने को मिलेगा जो वे अपने स्टार से उम्मीद करते हैं।

लेकिन, जैसे ही हम पवन कल्याण के जादू से बाहर निकलते हैं, फिल्म की कमजोरियां साफ नजर आने लगती हैं:

  • ढीली कहानी (The Weakest Link): फिल्म की कहानी इसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। यह हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों से काफी प्रेरित लगती है, लेकिन उसे भारतीय दर्शकों के हिसाब से ढालने में हरीश शंकर पूरी तरह नाकाम रहे हैं। कहानी में कोई नयापन नहीं है और कई जगह यह बेहद प्रेडिक्टेबल लगती है।
  • खराब स्क्रीनप्ले (The Messy Plot): फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ही मेसी और ढीला है। कई सीन बिना किसी तुक के शुरू और खत्म हो जाते हैं, जिससे दर्शक कहानी से कनेक्ट नहीं हो पाते हैं। फिल्म का पेस बहुत ही असंतुलित है।

फर्स्ट हाफ बोरिंग, सेकंड हाफ में थोड़ा दम

फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी स्लो और बोरिंग है। कहानी को सेट करने में बहुत समय लिया गया है, जिससे दर्शक बोर होने लगते हैं। हालांकि, इंटरवल के पास फिल्म थोड़ी गति पकड़ती है।

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