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Darbhanga News: दरभंगा राज की संपत्ति पर सरकार का दावा! शाही परिवार के उत्तराधिकारी अब जाएंगे कोर्ट

दरभंगा राज की बेशकीमती संपत्ति को लेकर बिहार सरकार और राज परिवार के बीच बड़ी कानूनी जंग शुरू होने वाली है। सरकार ने लावारिस संपत्ति बताकर दावा ठोका है, वहीं वारिसों ने कोर्ट जाने की बात कही है।
Ashutosh Kumar Jha Published on: 24 अप्रैल 2026
Darbhanga News: दरभंगा राज की संपत्ति पर सरकार का दावा! शाही परिवार के उत्तराधिकारी अब जाएंगे कोर्ट
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दरभंगा | 24 अप्रैल 2026: बिहार सरकार ने दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी की बेशकीमती संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की अहम प्रक्रिया शुरू कर दी है। चौरानवे वर्ष की उम्र में इसी साल उनका निधन हो गया था। अधिकारियों के अनुसार महारानी निस्संतान थीं और उन्होंने अपनी संपत्ति के लिए कोई भी वैध वसीयत या कानूनी उत्तराधिकारी पीछे नहीं छोड़ा है।

राजस्व विभाग का नोटिस और अधिग्रहण का कानूनी सिद्धांत

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर तीस दिनों के भीतर सभी दावों और आपत्तियों को आमंत्रित किया है। प्रशासन ने बोना वेकेंटिया के कानूनी सिद्धांत का उपयोग किया है जिसके तहत बिना किसी कानूनी मालिक वाली संपत्तियां स्वतः ही राज्य सरकार के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में बहुत ही आसानी से पूरी तरह आ जाती हैं।

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सरकार के इस कदम से दरभंगा के शाही परिवार और उत्तराधिकारियों के बीच भारी हड़कंप मच गया है। वे इस अधिग्रहण को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं। दिवंगत महाराजा कामेश्वर सिंह के छोटे भाई के पोते कुमार राजेश्वर सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह इस बड़ी कानूनी लड़ाई की एकदम पुख्ता तैयारी पूरी तरह कर रहे हैं।

महाराजा की वसीयत और कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला

दरभंगा राज के प्रबंधक आशुतोष दत्ता का साफ कहना है कि कामसुंदरी देवी को मिली संपत्ति मूल रूप से राज एस्टेट का ही अहम हिस्सा थी। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हजार पच्चीस में सिविल कोर्ट ने एक अहम फैसले में राजेश्वर और कपिलेश्वर सिंह को महारानी का द्वितीय श्रेणी का असली कानूनी वारिस पूरी तरह से घोषित किया था।

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अदालत के आदेशानुसार महारानी के जीवनकाल तक उनका दावा पूरी तरह अप्रभावी था। लेकिन उनके निधन के बाद अब वे दोनों ही संपत्ति के कानूनी हकदार माने जाएंगे। दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों का कहना है कि पूर्व महाराजा की अहम वसीयत और सुप्रीम कोर्ट के पुराने पारिवारिक फैसलों को आज तक कभी भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

बेशकीमती संपत्तियों का साम्राज्य और प्रशासन का सख्त अल्टीमेटम

दरभंगा राज कभी भारत की सबसे अमीर जमींदारी रियासतों में से एक मानी जाती थी। परिवार के पास बिहार और बाहर भी बहुत सारी कृषि भूमि शानदार महल व्यावसायिक संपत्तियां और भारी बैंक जमा राशि मौजूद है। मालिकाना हक और प्रबंधन को लेकर यह बहुत ही बड़ा विवाद कई दशकों से लगातार अदालतों में पूरी तरह से चल रहा है।

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प्रशासनिक नोटिस के अनुसार यदि तीस दिनों के भीतर कोई वैध दावेदार सामने नहीं आता है तो यह संपत्ति स्वतः सरकार की हो जाएगी। दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार ने इस सार्वजनिक नोटिस जारी होने की आधिकारिक पुष्टि की है। अब यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि आगे यह भारी कानूनी लड़ाई क्या नया और बहुत ही बड़ा मोड़ लेती है।

हमारा निष्कर्ष

हमारा यह एकदम स्पष्ट निष्कर्ष है कि दरभंगा राज की संपत्ति का भारी विवाद एक बहुत जटिल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन चुका है। सरकार का दावा और राज परिवार की चुनौती न्यायालय में एक ऐतिहासिक फैसले की ओर पक्का इशारा कर रही है। शहर की हर एक पक्की और एकदम सटीक खबर के लिए आप हमेशा खबर आंगन पढ़ते रहें।

Disclaimer: यह खबर ‘खबर आंगन’ की खास डेस्क द्वारा प्राप्त एकदम वास्तविक तथ्यों और दरभंगा राज संपत्ति विवाद से जुड़ी पुख्ता कानूनी जानकारियों के आधार पर तैयार की गई है। यह मामला पूरी तरह न्यायालय के अधीन है।

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Ashutosh Kumar Jha

Ashutosh Kumar Jha Admin

Ashutosh Kumar Jha एक डिजिटल पत्रकार और न्यूज़ लेखक हैं, जो भारत की राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, टेक्नोलॉजी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। वे तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचार लिखने के लिए जाने जाते हैं।डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहते हुए Ashutosh Jha ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विश्लेषणात्मक लेख और समाचार प्रकाशित किए हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक निष्पक्ष, प्रमाणिक और जनहित से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है।वर्तमान में वे Khabar Aangan न्यूज़ प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया की ताज़ा खबरों, सरकारी नीतियों, सामाजिक बदलाव और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

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