बिरौल, 7 सितंबर 2026: बिरौल अंचल में जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े 15 मामलों की समीक्षा के बाद राजस्व रिकॉर्ड में ऐसा अंतर सामने आया है, जिसके आधार पर अब इन मामलों को निरस्त करने की सिफारिश की गई है। मामला मौजा अकबरपुर बैंक की जमीन से जुड़ा है, जहां पुराने और बाद के राजस्व अभिलेखों के मिलान में जमीन की प्रकृति को लेकर महत्वपूर्ण अंतर सामने आने की बात कही गई है।
मामला तब गंभीर हुआ जब दाखिल-खारिज से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। स्रोत के अनुसार, थाना संख्या 296 के मौजा अकबरपुर बैंक में खाता संख्या 20 और खेसरा संख्या 198 से संबंधित दाखिल-खारिज वादों का निष्पादन आरएस खतियान के आधार पर किया गया था। बाद की जांच में इसी जमीन से संबंधित सीएस खतियान में खाता संख्या 175 और खेसरा संख्या 135 दर्ज होने की बात सामने आई।
यहीं से पूरे मामले का सबसे अहम पहलू सामने आता है। सीएस खतियान में संबंधित जमीन को “गैरमजरूआ खास” श्रेणी में दर्ज बताया गया है। यानी रिकॉर्ड की इस प्रविष्टि ने उन दाखिल-खारिज मामलों पर ही सवाल खड़े कर दिए, जिनका निष्पादन पहले किया जा चुका था। स्रोत के अनुसार, अंचल अधिकारी ने समीक्षा के बाद इन मामलों को नियमसंगत नहीं माना है।
2019 से 2026 के बीच के 15 मामले चिन्हित
अंचल अधिकारी कुमारी सरिता रानी की ओर से भूमि सुधार उप समाहर्ता, बिरौल को भेजे गए पत्र के अनुसार वर्ष 2019 से 2026 के बीच के कुल 15 दाखिल-खारिज वादों को चिन्हित किया गया है। इन मामलों को निरस्त करने के लिए डीसीएलआर से कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी इन 15 मामलों के बारे में अंतिम निरस्तीकरण का आदेश होने की जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध स्रोत में अंचल अधिकारी की ओर से डीसीएलआर को निरस्त करने की सिफारिश किए जाने की बात है। इसलिए फिलहाल इसे निरस्तीकरण की सिफारिश के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
बिहारभूमि के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार दाखिल-खारिज भूमि के अधिकार में परिवर्तन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया है और इसके लिए संबंधित खाता, खेसरा, रकबा तथा पूर्व जमाबंदी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच प्रक्रिया निर्धारित है। आपत्ति होने पर संबंधित पक्ष अपना पक्ष और दस्तावेज भी प्रस्तुत कर सकता है।
पुराने रिकॉर्ड की जांच ने बदली मामले की दिशा
इस मामले में खास बात यही है कि जांच केवल दाखिल-खारिज के आदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड को भी देखा गया। आरएस और सीएस खतियान में दर्ज विवरणों के बीच सामने आए अंतर के बाद जमीन की श्रेणी पर सवाल उठा और इसी आधार पर पहले किए गए दाखिल-खारिज मामलों की दोबारा समीक्षा की गई।
बिरौल में जमीन के पुराने रिकॉर्ड और सरकारी भूमि से जुड़े विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में अकबरपुर बैंक क्षेत्र में एक अलग मामले में भी संबंधित भूमि को पुराने खतियान के आधार पर “गैर मजरुआ खास” बताया गया था। हालांकि वह मामला जल निकासी नाले पर अतिक्रमण से जुड़ा अलग प्रकरण है और उसे इन 15 दाखिल-खारिज मामलों के साथ जोड़ना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इस पूरे मामले में अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई डीसीएलआर स्तर पर होनी है। अंचल अधिकारी की सिफारिश पर क्या निर्णय लिया जाता है और संबंधित 15 वादों के रिकॉर्ड की आगे किस तरह जांच होती है, इससे मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना जरूर स्पष्ट है कि गैरमजरूआ खास जमीन के रूप में दर्ज बताए गए रिकॉर्ड और पहले हुए दाखिल-खारिज के बीच का अंतर अब प्रशासनिक जांच का केंद्र बन गया है।
Disclaimer – इस खबर में दाखिल-खारिज मामलों को निरस्त करने की बात अंतिम आदेश के रूप में नहीं, बल्कि अंचल अधिकारी द्वारा डीसीएलआर को की गई सिफारिश के रूप में प्रस्तुत की गई है। संबंधित मामलों में अंतिम प्रशासनिक निर्णय के बाद ही उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट मानी जाएगी।
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