नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026: ट्रेन की देरी से यात्रियों को अक्सर सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब पहली ट्रेन देर से पहुंचने के कारण उनकी दूसरी यानी connecting train छूट जाती है। ऐसी स्थिति में यात्री को पूरा नुकसान उठाना जरूरी नहीं है। रेलवे के Refund Rules में ऐसी परिस्थितियों के लिए रिफंड का प्रावधान है। हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समयसीमा का पालन करना जरूरी है।
पहली ट्रेन की देरी से कनेक्टिंग ट्रेन छूटने पर क्या होगा
रेलवे के नियमों के मुताबिक यदि कोई यात्री एक ट्रेन से सफर कर रहा है और उसके देर से पहुंचने के कारण जंक्शन स्टेशन पर आगे की ट्रेन छूट जाती है, तो यात्री को बिना cancellation charge या clerkage के untravelled journey का किराया वापस मिल सकता है। यानी जिस हिस्से की यात्रा हो चुकी है उसका किराया रेलवे अपने पास रखेगा और जिस हिस्से की यात्रा नहीं हो सकी, उसका निर्धारित किराया वापस किया जा सकता है।
यह सुविधा खास तौर पर उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने एक यात्रा के दौरान आगे की ट्रेन पकड़ने की योजना बनाई थी। ऐसे मामलों में यात्रियों को केवल दूसरी ट्रेन छूट जाने के कारण अपने टिकट की पूरी रकम गंवानी नहीं पड़ती। लेकिन रिफंड लेने के लिए नियम में बताई गई प्रक्रिया और समयसीमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
तीन घंटे के भीतर करना होगा रिफंड का दावा
रेलवे Refund Rules में connecting journey miss होने की स्थिति में महत्वपूर्ण समयसीमा तय की गई है। यात्री को उस ट्रेन के जंक्शन पर वास्तविक पहुंचने के तीन घंटे के भीतर टिकट surrender करके रिफंड का दावा करना होता है, जिसके देर से आने के कारण आगे की ट्रेन छूटी है। इस समयसीमा का पालन नहीं करने पर सामान्य परिस्थितियों में रिफंड मिलने में परेशानी हो सकती है।
इसलिए यात्रियों के लिए जरूरी है कि कनेक्टिंग ट्रेन छूटने के बाद वे केवल अगली ट्रेन की व्यवस्था करने पर ध्यान न दें, बल्कि रिफंड की प्रक्रिया भी समय रहते पूरी करें। खासकर जंक्शन स्टेशन पर पहुंचने के समय और पहली ट्रेन के वास्तविक arrival time को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
तीन घंटे से अधिक देरी पर पूरी यात्रा छोड़ने की स्थिति में भी नियम
रेलवे के नियमों में केवल connecting train छूटने का ही प्रावधान नहीं है। यदि किसी यात्री की यात्रा शुरू होने वाली ट्रेन अपने निर्धारित departure time से तीन घंटे से अधिक देर से चल रही है और यात्री इस कारण यात्रा नहीं करता, तो reserved, RAC और waitlisted ticket पर निर्धारित शर्तों के अनुसार पूरा किराया बिना cancellation charge के वापस किया जा सकता है।
हालांकि यहां भी टिकट surrender या e-ticket के मामले में TDR filing जैसी प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा महत्वपूर्ण होती है। इसलिए केवल ट्रेन लेट होने की जानकारी देखकर टिकट को अपने-आप refundable मान लेना सही नहीं होगा।
यात्रियों को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
अगर पहली ट्रेन देर से चल रही है और आगे दूसरी ट्रेन पकड़नी है, तो यात्री को दोनों टिकटों की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। पहली ट्रेन का वास्तविक arrival time, PNR और टिकट से जुड़ी जानकारी बाद में refund claim के दौरान काम आ सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमूमन तीन घंटे की समयसीमा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रेलवे के नियमों में connecting journey miss होने पर इसी अवधि के भीतर टिकट surrender करने का प्रावधान दिया गया है। यात्रियों को स्टेशन पर उपलब्ध रेलवे अधिकारियों से प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए निर्धारित तरीके से दावा करना चाहिए।
टिकट बुक करते समय Connecting Journey का विकल्प
Connecting journey से जुड़े मामलों में टिकट बुक करते समय उपलब्ध विकल्पों और PNR की शर्तों को ध्यान से देखना भी जरूरी है। अलग-अलग टिकटों पर लागू नियम और booking configuration के आधार पर refund प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए यात्रियों को टिकट बुक करते समय यात्रा के दोनों चरणों की जानकारी और लागू शर्तों को जरूर पढ़ना चाहिए।
रेलवे की आधिकारिक व्यवस्था में refund से जुड़े नियम समय-समय पर संशोधित हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष मामले में दावा करने से पहले संबंधित रेलवे नियम और उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया की जांच करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
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