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114 साल पहले कैसे बंगाल से अलग हुआ था हमारा राज्य, Darbhanga बार एसोसिएशन ने क्यों मनाया यह ऐतिहासिक जश्न?

114 साल पहले कैसे बंगाल से अलग हुआ था हमारा राज्य, Darbhanga बार एसोसिएशन ने क्यों मनाया यह ऐतिहासिक जश्न?

Ashutosh Kumar Jha Published on: 1 अप्रैल 2026
114 साल पहले कैसे बंगाल से अलग हुआ था हमारा राज्य, Darbhanga बार एसोसिएशन ने क्यों मनाया यह ऐतिहासिक जश्न?
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दरभंगा | 1 अप्रैल 2026: इतिहास के पन्नों में पहली अप्रैल का दिन हमारे राज्य के लिए एक बहुत ही गौरवशाली और ऐतिहासिक महत्व रखता है। साल 1912 में ठीक इसी दिन हमारा यह राज्य विशाल बंगाल प्रांत से अलग होकर एक स्वतंत्र और नए स्वरूप में दुनिया के सामने आया था। इस ऐतिहासिक और भावुक पल को याद करते हुए आज Darbhanga के वकीलों ने एक बेहद खास और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया है।

स्थानीय बार एसोसिएशन भवन में बुधवार को इस स्थापना दिवस को बड़े ही हर्षोल्लास और गर्व के साथ मनाया गया। वरीय अधिवक्ता रमण जी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में इतिहास के उन सुनहरे और संघर्षपूर्ण पन्नों को दोबारा पलटा गया। वकीलों ने 1 अप्रैल 1912 के उस मूल और अखंड नक्शे को भी प्रदर्शित किया, जब यह एक संयुक्त और बहुत ही विशाल प्रांत हुआ करता था।

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सच्चिदानंद सिन्हा के नेतृत्व में वकीलों का ऐतिहासिक संघर्ष

इस भव्य समारोह को संबोधित करते हुए लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने राज्य के निर्माण से जुड़ी कई अहम और रोचक जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि इस स्वतंत्र राज्य के गठन का सपना इतनी आसानी से पूरा नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे दशकों का एक लंबा संघर्ष छिपा था। महान शिक्षाविद और प्रख्यात अधिवक्ता सच्चिदानंद सिन्हा के नेतृत्व में सैकड़ों वकीलों ने इसके लिए एक लंबी और कूटनीतिक लड़ाई लड़ी थी।

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यह उन्हीं दूरदर्शी महापुरुषों के अथक और निरंतर प्रयासों का सुखद परिणाम था कि हमारा यह प्रांत अंततः एक स्वतंत्र अस्तित्व में आ सका। वकीलों का यह बौद्धिक संघर्ष आज भी हमारे आत्मसम्मान, सांस्कृतिक पहचान और गौरव का एक बहुत बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस नए और स्वतंत्र प्रांत के पहले उप-राज्यपाल के रूप में सर चार्ल्स स्टुअर्ट बेली को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने इसका प्रारंभिक प्रशासनिक ढांचा तैयार किया था।

Darbhanga बार एसोसिएशन के इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी न्यायविदों ने उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और बुद्धिजीवियों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने युवा पीढ़ी से यह विशेष अपील भी की कि वे अपने राज्य के इस गौरवशाली और संघर्षपूर्ण इतिहास को कभी न भूलें, क्योंकि जो समाज अपना इतिहास भूल जाता है, वह कभी एक मजबूत भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता।

5 प्रमंडल और 21 जिलों से मिलकर बना था नया प्रांत

इस ऐतिहासिक मौके पर वरीय अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने राज्य के प्रारंभिक भौगोलिक और प्रशासनिक गठन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस नए राज्य को आधिकारिक रूप से अस्तित्व में लाने के लिए 22 मार्च 1912 को ऐतिहासिक अधिसूचना संख्या 289 जारी की गई थी। इसी अहम अधिसूचना के तहत पहली अप्रैल 1912 को इस नए और विशाल प्रांत का विधिवत जन्म हुआ था।

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